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  • Police, Administration And Mining Department Officials Will Be Made Special Flying Squads To Stop Illegal Mining Of Sand; Environmental Clearance Of Mines Can Be Stopped ...

रुक सकती है खदानों की पर्यावरण मंजूरी:रेत का अवैध खनन रोकने को पुलिस, प्रशासन और माइनिंग विभाग के अधिकारियों के बनेंगे स्पेशल फ्लाइंग स्कवॉड; रुक सकती है खदानों की पर्यावरण मंजूरी...

जालंधरएक महीने पहले
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  • हाईकोर्ट में दायर याचिका का मामला... सतलुज में अवैध खनन करने वालों पर होगी कार्रवाई, याचिकाकर्ता ने पर्यावरण कमेटी से कहा- फैसला होने तक न मिले मंजूरी, 30 सितंबर तक अधिकारियों ने देना है हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब

रेत की अवैध माइनिंग रोकने के लिए जिले में पुलिस, प्रशासन और माइनिंग विभाग के अधिकारियों का स्पेशल फ्लाइंग स्कवॉड बनाया जाएगा। इसका काम सतलुज नदी में अवैध तौर पर रेत की खुदाई करने वालों पर कार्रवाई करना होगा। जिले के कस्बा नकोदर निवासी बक्शीश सिंह की जनहित याचिका के मामले में 5 दिन पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 2 हफ्ते के अंदर फ्लाइंग स्कवॉड का गठन करने के आदेश दिए थे। यह आदेश जालंधर प्रशासन पर भी लागू हो रहे हैं।

आदेशों का पालन 26 सितंबर तक करना है और 30 सितंबर तक जालंधर में माइनिंग की रिपोर्ट देनी है। ग्रामीणों के अनुसार गांव रामे, शोहलेे इत्यादि में अवैध माइनिंग से पर्यावरण का बहुत नुकसान हुआ है। सतलुज नदी की गहराई बढ़ने से कच्ची मिट्टी का बांध रहने के पूरे आसार पिछले साल बन गए थे। पंजाब में कई जगहों पर बांध टूट गया था और नकोदर तथा शाहकोट में कई गांव में किसानों ने बांध की रिपेयर करके उसे टूटने से बचाया।

रेत की अवैध माइनिंग का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जालंधर के कस्बा नकोदर के रहने वाले बख्शीश सिंह और साथियों की ओर से रखा गया है, जिसमें सतलुज में होने वाली अवैध माइनिंग से पर्यावरण के खतरों का मामला उठाया गया है।

इसके बाद जालंधर के डिप्टी कमिश्नर, लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर और सतलुज के माइनिंग वाले एरिया से संबंधित अधिकारियों को 30 सितंबर तक नोटिस का जवाब देना होगा। इस बीच जालंधर में शाहकोट और नकोदर में दी जाने वाली सरकारी रेत खदानों कि पर्यावरण क्लियरेंस की मंजूरी भी रुक सकती है।

बक्शीश सिंह ने पंजाब स्टेट पर्यावरण कमेटी को लेटर लिखकर कहा है कि माननीय हाईकोर्ट के जनहित याचिका में फैसला आने तक पर्यावरण मंजूरी न दी जाए। इस लेटर पर फैसला देने का अधिकार पंजाब स्टेट पर्यावरण कमेटी के पास है। दरअसल, जालंधर में अवैध माइनिंग के चलते कई गांवों में जमीन का लेवल खराब हो चुका है।

धुस्सी बांध के पार नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों की जमीन खराब हो रही हैंनकोदर और शाहकोट के दर्जन से ज्यादा गांवों में अवैध माइनिंग से धुस्सी बांध को खतरा बताया गया है।

जालंधर में सतलुज नदी का संकट दूर होने की उम्मीद... क्योंकि... जब हाईकोर्ट के आदेश पर दस्ता बनता है तो उसके काम की स्थिति पर जवाब भी मांगा जा सकता है

दरअसल, सतलुज नदी में रेत का अवैध खनन फिल्लौर से लेकर नकोदर और फिर शाहकोट के बाद लोहियां इलाके तक होता है। 10 साल पहले उद्योग विभाग के जरिए सरकार ने रेत की खदान उक्त कस्बों में अलॉट की थी, लेकिन बाद में सरकारी लाइसेंस के बगैर रेत की चोरी करके शहरों में इसकी सप्लाई शुरू कर दी गई। आज रेत का अवैध खनन सतलुज नदी में बाढ़ का कारण बन रहा है।

नकोदर निवासी बक्शीश सिंह ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका डालकर कहा था कि उनके इलाके में अवैध खनन से बाढ़ का खतरा बन गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने जालंधर सहित अपने आदेश में सभी जिलों में रेत की अवैध माइनिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए फ्लाइंग स्कवॉड बनाने के आदेश दिए हैं।

माइनिंग विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि जब कोई कार्रवाई के लिए अधिकारियों का दस्ता माननीय हाईकोर्ट के आदेश पर बनाया जाता है तो उसके काम की स्थिति पर जवाब भी मांगा जा सकता है। इसलिए पहले जो विभिन्न विभाग अपनी मर्जी के अनुसार कार्रवाई करते थे अब उन्हें जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठने वाले मुद्दों के तहत गंभीरता से अवैध माइनिंग रोकनी होगी।

इस लिहाज से जालंधर में सतलुज नदी का संकट दूर होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ सतलुज नदी के किनारे जेसीबी अथवा भारी मशीनरी से खनन गतिविधियों पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। माननीय जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने नेशनल हाईवे और सभी बड़े ब्रिज से एक किलोमीटर और स्टेट हाईवे और छोटे ब्रिज से आधा किलोमीटर दूर खनन गतिविधियों पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

इस लिहाज से फ्लाइंग स्कवॉड का निशाना वह लोग नहीं बनेंगे जिन्होंने सतलुज नदी के किनारे अपनी हवेली और खेतों में जेसीबी और पोकलेन मशीनों के बेड़े तैयार कर रखे हैं। इससे पहले राज्य सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए सैटेलाइट के जरिए नजर रखने की योजना बनाई थी मगर उसे लागू नहीं किया गया था। अब हाई कोर्ट के सामने मामला आने के बाद कार्रवाई की उम्मीद बंधी है।

रेत की अवैध माइनिंग का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जालंधर के कस्बा नकोदर के रहने वाले बख्शीश सिंह और साथियों की ओर से रखा गया है, जिसमें सतलुज में होने वाली अवैध माइनिंग से पर्यावरण के खतरों का मामला उठाया गया है।

इसके बाद जालंधर के डिप्टी कमिश्नर, लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर और सतलुज के माइनिंग वाले एरिया से संबंधित अधिकारियों को 30 सितंबर तक नोटिस का जवाब देना होगा। इस बीच जालंधर में शाहकोट और नकोदर में दी जाने वाली सरकारी रेत खदानों कि पर्यावरण क्लियरेंस की मंजूरी भी रुक सकती है।

बक्शीश सिंह ने पंजाब स्टेट पर्यावरण कमेटी को लेटर लिखकर कहा है कि माननीय हाईकोर्ट के जनहित याचिका में फैसला आने तक पर्यावरण मंजूरी न दी जाए। इस लेटर पर फैसला देने का अधिकार पंजाब स्टेट पर्यावरण कमेटी के पास है। दरअसल, जालंधर में अवैध माइनिंग के चलते कई गांवों में जमीन का लेवल खराब हो चुका है।

धुस्सी बांध के पार नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों की जमीन खराब हो रही हैं नकोदर और शाहकोट के दर्जन से ज्यादा गांवों में अवैध माइनिंग से धुस्सी बांध को खतरा बताया गया है।

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