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अच्छी खबर:प्रिंसिपलों ने एनआरआइज के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों की बदली नुहार, अब शिक्षा विभाग से मिलेगा 22 लाख रुपए इनाम

जालंधर17 दिन पहले
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जमशेर खास सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बना स्मार्ट क्लासरूम। - Dainik Bhaskar
जमशेर खास सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बना स्मार्ट क्लासरूम।
  • जिले के तीन सरकारी स्कूल शिक्षा विभाग की 2020-21 के बेस्ट स्कूलों की लिस्ट में शामिल

सरकारी स्कूलों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की अवार्ड स्कीम के तहत शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में 2020-21 सेशन के मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से एक-एक बेस्ट स्कूलों के नामों की घोषणा कर दी है। इसमें जिले से सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जमशेर खास (लड़के ), सरकारी हाई स्कूल रायपुर रसूलपुर और सरकारी मिडिल स्कूल लोहारां छाहके को शामिल किया गया है।

इसमें मिडिल स्कूल को पांच लाख, हाई स्कूल को साढ़े सात लाख रुपये और सीनियर सेकेंडरी स्कूल को दस लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार स्कूल में बेहतर शिक्षा, 100 फीसदी नतीजे, बच्चों की स्मार्टनेस व क्वालिटी, बच्चों में बेहतर ज्ञान से लेकर स्मार्ट क्लासरूम सहित इन्फ्रास्ट्रक्चर व अन्य सुविधाओं के लिए दिया जाता है। शिक्षा विभाग के डायरेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों के बैंक खाते में इनाम की राशि जमा करवाकर रिपोर्ट करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में जनवरी व फरवरी के मध्य टीमों ने सर्वे किया था। टीमें स्कूल की इमारत, इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी एजुकेशन, बच्चों से बातचीत के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार करती है। इसके आधार पर ही तीनों स्कूल जिले में अव्वल रहे हैं।

सीनियर सेकेंडरी स्कूल जमशेर खास (लड़के)

सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जमशेर खास (लड़के) ने ग्रेडिंग में पहला स्थान हासिल किया है। प्रिंसिपल अशोक बसरा ने कहा कि मैंने जून 2012 में बतौर प्रिंसिपल चार्ज संभाला था। जब उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया था तो स्कूल की हालत खराब थी। उन्होंने एनआरआइज की मदद से 80 लाख रुपए फंड जुटाए। इससे मार्निंग असेंबली के लिए स्थान तैयार किया। एजुकेशनल पार्क बनाया, 10 लाख की लागत से इंटरलाकिंग टाइलें और सोलर सिस्टम लगवाया। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या पहले 417 थी और अब स्ट्रेंथ 847 तक पहुंच गई है।

सरकारी हाई स्कूल रायपुर रसूलपुर

​​​​​​​सरकारी हाई स्कूल रायपुर रसूलपुर की हैड शिखा सहगल ने कहा कि जब मैंने जनवरी 2019 में स्कूल ज्वाइन किया तो स्कूल की हालत बहुत खराब थी। गांववालों और एनआरआई के सहयोग से स्कूल की हालत में सुधार किया। स्कूल की स्ट्रेंथ पहले 250 थी, जोकि 315 तक पहुंच गई है। स्कूल की दीवारों पर कलर कोडिंग करवाई गई, इंटरलाकिंग टाइल्स लगवाई गई। स्कूल परिसर में 16 सीसीटीवी कैमरे लगवाए, एजुकेशन पार्क भी बनाया गया।​​​​​​​

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