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  • Private Schools Are Not Opening In The City, Parents Are Not Agreeing About The Responsibility Of Kovid, Schools Are Also Not Ready To Take The Risk

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स्कूल-पैरेंट्स में नहीं बनी सहमती:सरकार के आदेश के बावजूद जालंधर में नहीं खुले प्रा‌इवेट स्कूल, कोरोना के चलते बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं अभिभावक

जालंधर4 महीने पहले
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जालंधर में अभी कुछ ही प्राइ‌वेट स्कूल खुले हैं, जिसमें भी सिर्फ 11वीं और 12वीं के छात्र आ रहे हैं।

बच्चा अगर स्कूल में कोविड-19 पॉजिटिव आ गया तो किसकी जिम्मेदारी होगी? इसको लेकर जालंधर में स्कूल प्रबंधन और पैरेंट्स के बीच सहमति का पेंच फंस गया है। जिस वजह से ज्यादातर प्राइवेट स्कूल सरकार की मंजूरी देने के 10 दिन बाद भी नहीं खुल पाए हैं। कुछ स्कूल खुले हैं लेकिन उनमें भी सिर्फ 11वीं और 12वीं के बच्चे ही आ रहे हैं और उनके बीच भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाने से लेकर मास्क और सेनिटाइजर का इस्तेमाल सुनिश्चित करने में स्कूल प्रबंधन को पूरी मशक्कत करनी पड़ रही है।

स्कूल में पहुंचे स्टूडेंट के हाथ सैनिटाइज करवाते कर्मचारी।
स्कूल में पहुंचे स्टूडेंट के हाथ सैनिटाइज करवाते कर्मचारी।

पैरेंट्स की टेंशन, स्कूल में कैसे रखें ध्यान
पैरेंट्स को इस बात की टेंशन है कि घर में तो वह बच्चों पर नजर रख सकते हैं, लेकिन स्कूल में बच्चे कोरोना से बचाव की सावधानियों को अपना रहे हैं या नहीं, वह कैसे ध्यान रखें। पैरेंट्स का मानना है कि इसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन को लेनी चाहिए। इसी वजह से वह स्कूलों को लिखित में सहमति देने से कतरा रहे हैं।

सेंट सोल्जर स्कूल में सोशल डिस्टेंस रख क्लासरूम में पढ़ाई करते स्टूडेंट्स
सेंट सोल्जर स्कूल में सोशल डिस्टेंस रख क्लासरूम में पढ़ाई करते स्टूडेंट्स

स्कूल प्रबंधन का तर्क, सब बच्चों पर कैसे रखें ध्यान
स्कूल प्रबंधन तर्क दे रहा है कि बच्चे स्कूल में कोरोना की चपेट में ना आए और पूरी सावधानियां रखें, इसके लिए सैनिटाइजर वह मास्क सुनिश्चित करने के साथ क्लास में भी सोशल डिस्टेंस रखा जा रहा है। यहां तक कि ज्यादा बच्चे आने पर अलग-अलग समय पर पढ़ाने के लिए स्लॉट भी बनाए जा चुके हैं। इसके बावजूद अगर बच्चे कोरोना से जुड़ी सावधानियां नहीं रखते तो वह एक साथ इतने बच्चों पर नजर नहीं रख सकते। अगर कोई पेरेंट्स सहमति नहीं दे सकता तो उनके बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई पहले की तरह से ही जारी रहेगी।

यह है सहमति पत्र : स्वघोषणा पत्र के रूप में पेरेंट्स से यह फॉर्म भरवाया जा रहा है जिसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि अगर कोरोना से जुड़ी कोई समस्या हुई तो वो जिम्मेदार होंगे।
यह है सहमति पत्र : स्वघोषणा पत्र के रूप में पेरेंट्स से यह फॉर्म भरवाया जा रहा है जिसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि अगर कोरोना से जुड़ी कोई समस्या हुई तो वो जिम्मेदार होंगे।

बच्चे बोले, स्कूल में पढ़ना ज्यादा बेहतर
​​​​​​​​​​​​​​पैरेंट्स और स्कूल प्रबंधन के बीच कोरोना की जिम्मेदारी की सहमति भले ना बन रही हो लेकिन जो बच्चे स्कूल आने लगे हैं, उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ना ज्यादा बेहतर है। ला ब्लॉसम स्कूल की 12वीं की छात्रा मुस्कान व सुभाना कहती हैं कि स्कूल में वह टीचर्स से सीधे सवाल कर सकती हैं कोई डाउट हो तो वह वहीं क्लियर हो जाता है। ऑनलाइन पढ़ाई में हर वक्त मोबाइल पर नजर रखनी पड़ती है, जिससे आंखों की भी समस्या होती है और ढंग से समझ भी नहीं आता।

सरकारी स्कूलों में शुरू हो गई पढ़ाई

जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। जिले में करीब एक हजार सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं, जिनमें छठवीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। यहां ऑनलाइन क्लासेज को लेकर बच्चों को मोबाइल या इंटरनेट की वजह से परेशानी हो रही थी, जिसके चलते वहां पढ़ने वाले बच्चों के अधिकांश पेरेंट्स की सहमती मिल चुकी है। सरकार ने 7 जनवरी को छठवीं से 12वींं तक के स्कूल खोलने को मंजूरी दे दी थी। हालांकि इस दौरान कोरोना से जुड़ी सैनिटाइजर, मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंस रखने को यकीनी बनाने के लिए भी कहा था।

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