मंत्री परगट सिंह का कैप्टन पर हमला:कहा- BSF को अधिकार अमरिंदर की साजिश; पहले धान खरीद लेट कराई, अब पंजाब में राष्ट्रपति शासन का रच रहे षड्यंत्र

जालंधर4 दिन पहले
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पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह। फाइल फोटो

पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में BSF को ज्यादा अधिकार देना अमरिंदर सिंह की ही साजिश है। दिल्ली के पहले दौरे में उन्होंने धान की खरीद 10 दिन लेट करवाई और दूसरी बार BSF वाला फैसला करवा दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब में राष्ट्रपति राज लगाने का षड्यंत्र रच रहे हैं।

परगट ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि हम उन्हें बड़ा नेता मानते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह केंद्र सरकार के साथ मिलकर पंजाब के खिलाफ काम करवा रहे हैं। BSF को 50 किलोमीटर का अधिकार देने से आधा पंजाब BSF के अधिकार क्षेत्र में आ रहा है। इससे पंजाब में सामुदायिक सौहार्द और वोटों को ध्रुवीकरण करने की साजिश रची जा रही है।

अमरिंदर के कट्टर विरोधी रहे परगट
परगट सिंह पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के कट्टर विरोधी रहे हैं। अमरिंदर जब मुख्यमंत्री थे तो परगट उनके खिलाफ खुली बयानबाजी करते थे। यहां तक कि अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटाने की अगुवाई करने वाले मंत्रियों के साथ परगट सिंह भी डटे रहे। परगट नवजोत सिद्धू के करीबी हैं और मंत्री बनने की दौड़ में थे। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें मंत्री नहीं बनाया, जिसके बाद सिद्धू सक्रिय हुए तो वह उनके करीब हो गए। जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया गया तो परगट सिंह भी मंत्री बन गए। उन्हें खेल के साथ शिक्षा मंत्रालय भी दे दिया गया।

परगट नवजोत सिद्धू के करीबी माने जाते हैं।
परगट नवजोत सिद्धू के करीबी माने जाते हैं।

मंत्री बनते ही सिद्धू के प्रति बदला रुख
जब तक कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री रहे परगट सिंह हमेशा सिद्धू के साथ रहे। जब उन्हें नई सरकार में मंत्री बनाया गया तो परगट का सिद्धू के प्रति भी रुख बदल गया। सिद्धू के इस्तीफे के बाद सिर्फ रजिया सुल्ताना ने मंत्री पद छोड़ा जबकि करीबी रहे परगट सिंह ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। यहां तक कि सिद्धू के समर्थन में उन्होंने पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव का पद तक नहीं छोड़ा।

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