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  • Punjab Minister Sukhjinder Randhawa's Fret, Said On The Question Of Letter To Sonia Gandhi Do Not Defame The Leaders; Every Bet Of Rebellion Against The Captain Is Failing

मीडिया पर झल्लाए मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा:सोनिया गांधी को चिट्‌ठी के सवाल पर बोले- नेताओं को बदनाम न करो; कैप्टन के खिलाफ बगावत का हर दांव हो रहा फेल

जालंधरएक महीने पहले

पंजाब में CM कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत का हर दांव फेल होने की झल्लाहट कांग्रेस के बागियों के चेहरे पर नजर आने लगी है। इसी वजह से बगावत की अगुवाई करने वाले सहकारिता मंत्री सुखजिंदर रंधावा के बोल भी बिगड़ गए। कांग्रेस के 40 विधायकों ने सोनिया गांधी को चिट्‌ठी लिखी थी। जिसमें उनसे मांग की गई कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाने को कहा जाए। इस बारे में जब रंधावा से पूछा गया तो वे मीडिया पर ही भड़ास निकालने लगे। चिट्‌ठी लिखने के बारे में रंधावा ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन मीडिया को खरी-खोटी सुनाते रहे।

सुखजिंदर रंधावा से जब चिट्‌ठी के बारे में पूछा गया तो वे बोले कि पंजाब की पॉलिटिक्स को इतना गंदा न करो। नेताओं को लोगों के बीच बदनाम न करो। मुझे अफसोस है कि चौथे स्तंभ मीडिया से ही डेमोक्रेसी को खतरा हो गया है। रंधावा से बार-बार स्पष्ट जवाब मांगा गया कि कांग्रेस हाईकमान यानी सोनिया गांधी को लेटर लिखा गया है या नहीं तो वे भड़कते हुए अपनी कार में बैठकर चले गए।

पढ़िए वह मामला... जिस पर आया मंत्री को गुस्सा

पंजाब में नवजोत सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस प्रधान बनने के बाद पार्टी का एक गुट कैप्टन अमरिंदर सिंह से असंतुष्ट है। लगातार कैप्टन को कुर्सी से हटाने की कोशिश हो रही है। कैप्टन से बागी मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा व संगठन महासचिव विधायक परगट सिंह की अगुवाई में सोनिया गांधी को एक लेटर भेजा। जिसमें कहा गया कि विधायक दल की बैठक बुलाई जाए। इसमें मुद्दा तो कांग्रेस हाईकमान के कैप्टन अमरिंदर सिंह को दिए 18 सूत्रीय फॉर्मूले का है, लेकिन बागियों की इच्छा कैप्टन पर निशाना साधने की है। इस लेटर के बारे में जानकारी लीक होने के बाद बागी झल्लाए हुए हैं।

सोनिया गांधी को लिखे लेटर में यह की गई थी मांगें।
सोनिया गांधी को लिखे लेटर में यह की गई थी मांगें।

विधायक दल मीटिंग के रास्ते कैप्टन हटाओ मुहिम

सियासी जानकार मानते हैं कि पंजाब चुनाव से 5 महीने पहले विधायक दल की बैठक बुलाने के पीछे कैप्टन हटाओ मुहिम है। अगर वाकई में पंजाब के मुद्दों की फिक्र होती तो साढ़े 4 साल कांग्रेस के मंत्री या विधायक चुप नहीं रहते। विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजने की भी मांग की गई है। कहने को इस बैठक में कांग्रेस हाईकमान के 18 सूत्रीय फॉर्मूले पर चर्चा की बात है, लेकिन इसके रास्ते हाईकमान तक कैप्टन को हटाने का संदेश भेजना है। जब पहले खुली बगावत हुई थी तो सिद्धू के विवादित सलाहकार रहे मालविंदर माली ने भी यही सुझाव दिया था। माली ने कहा था कि अगर कैप्टन न बुलाएं तो फिर पार्टी प्रधान होने के नाते सिद्धू को कहकर बैठक बुलाई जाए। जिसके बाद कैप्टन को CM की कुर्सी से हटाने का रास्ता बन सके।

पहले बगावत हो चुकी ठुस्स, मंत्री चन्नी भी छोड़ गए साथ

मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा व सुख सरकारिया के साथ चरणजीत चन्नी ने पहले भी खुलेआम कैप्टन के खिलाफ बगावत की। वे देहरादून पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत से भी मिलकर आए। हालांकि इसके बाद उन्हें दिल्ली में सोनिया गांधी या राहुल गांधी से मिलने का टाइम नहीं दिया गया। यह बगावत तो ठुस्स हुई ही, मंत्री चरणजीत चन्नी भी बागियों को छोड़कर कैप्टन के साथ चले गए।

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