कीव से 550 KM दूर बॉर्डर पर फंसे भारतीय छात्र:यूक्रेन से इंडिया लौटने की उम्मीद में पहुंचे पोलैंड बॉर्डर; पैसे-खाने का सामान तक नहीं

जालंधर9 महीने पहले
यूक्रेन से निकलकर पोलैंड बाॅर्डर पर फंसे भारतीय छात्र समस्या बताते हुए।

रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन में फंसे पंजाब के स्टूडेंट्स की परेशानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। कुछ युवा कीव शहर से 550 किलोमीटर का सफर तय करके पोलैंड बार्डर पर पहुंच तो गए हैं, लेकिन यहां फंस कर रह गए हैं। छात्रों का कहना है कि वे चार दिनों से लवीव शहर में पोलैंड के बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। यहां न तो भारतीय दूतावास उनकी मदद के लिए आगे आया है और न ही उनके वहां से निकालने के कोई प्रबंध किए जा रहे हैं।

न पैसे बचे और न ही खाना

पंजाब के विभिन्न शहरों के युवा जगजीत सिंह, कमलजीत सिंह, रामकृष्ण, सिमरन कौर और गुरलीन बराड़ ने कहा कि वे 550 किलोमीटर का सफर तय करके इस उम्मीद में पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे थे कि यहां भारत वापसी का कोई इंतजाम होगा। लेकिन अब उनको अपने फैसले पर पछताना पड़ रहा है। वे चार दिन से यहां फंसे हुए हैं। न तो उनके पास पैसे बचे और न ही खाने का सामान। यहां महंगाई इतनी है कि कुछ भी लेना संभव नहीं है। एम्बेंसी का कोई अधिकारी यहां मदद के लिए नहीं पहुंचा है। उपर से सर्दी भी खूब सता रही है। यहां से कैसे निकलेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा।

पोलैंड बॉर्डर पर फंसे छात्रों ने बताया कि यहां इंडियन एंबेसी कोई मदद नहीं कर रही है। उनके पैसे तक समाप्त हो गए हैं। खाने की भी समस्या है।
पोलैंड बॉर्डर पर फंसे छात्रों ने बताया कि यहां इंडियन एंबेसी कोई मदद नहीं कर रही है। उनके पैसे तक समाप्त हो गए हैं। खाने की भी समस्या है।

हमले के साथ ठंड का डर भी

बता दें कि यूक्रेन में मिसाइलों, बमों के हमले का डर तो भारतीयों को सता ही रहा है, उपर से कड़ाके की ठंड, हर तरफ बर्फ और तापमान माइनस दो डिग्री भी उनके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर रही है। भारत आने के लिए यूक्रेन में पढ़ाई करने गए छात्र जोखिम उठाकर पैदल या फिर अन्य साधनों से यूक्रेन की सीमाओं पर नाटो संरक्षित हंगरी, पोलैंड और रोमानिया में पहुंच रहे हैं। फिर यहीं से आगे भारत के लिए सुरक्षित यात्रा की उम्मीद करते हैं, लेकिन अब यहां आने वाले विद्यार्थी भी फंस कर रहे गए हैं।

क्षेत्र की जानकारी का भी अभाव

इनमें बहुत सारे ऐसे स्टूडेंट हैं जो अभी पिछले साल ही नवंबर या दिसंबर महीने में पढ़ाई के लिए यूक्रेन के विभिन्न शहरों में गए थे। इन्हें वहां की भौगोलिक परिस्थतियों के बारे में भी अभी तक सही ढंग से पता नहीं है। यह सब अपने वरिष्ठों के सहारे खतरे से बचते बचाते हॉस्टल या फिर किराए पर ले रखे मकानों को छोड़कर घर वापसी के लिए निकले हैं।

भारत सरकार से हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते भारतीय छात्र।
भारत सरकार से हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते भारतीय छात्र।

सामान की कीमतें आसमान पर

स्टूडेंट्स बता रहे हैं कि यहां पर खाने के सामान की कीमतें युद्ध छिड़ते ही आसमान पर पहुंच गई हैं। पानी की कमी हो गई है। टैक्सी सर्विस के दाम भी एकाएक बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में उनके पास विकल्प सिर्फ पैदल चलकर हंगरी, पोलैंड और रोमानिया की सीमाओं तक पहुंचने का बचता है। भारी ठंड में स्टूडेंट्स वहां पर चिप्स और बिस्किटों के सहारे अपना सफर तय कर रहे हैं।

नहीं मिल रही कोई मदद

कमलजीत सिंह, रामकृष्ण ने बताया कि वे अवीव शहर के पोलैंड बॉर्डर पर हैं और यहां पर भारतीय दूतावास किसी तरह की कोई मदद नहीं कर रहा है। बिस्किट के सहारे छात्र अपना सफर कर रहे हैं।

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