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पर्व:संकष्टी गणेश चतुर्थी आज...8:45 पर होगा चंद्रोदय

जालंधर3 महीने पहले
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  • चंद्रदर्शन कर कच्चा दूध, जल-तिल-गुड़ के मिश्रण का अर्घ्य दें
  • गणेश जी को बेलपत्र अर्पित करें, न चढ़ाएं तुलसी

संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजा करने से मनुष्य के रुके हुए कार्य सफल हो जाते हैं। यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थ तिथि को मनाया जाता है जोकि इस बार 31 जनवरी को है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि जब मन संकट से घिरा महसूस करे तो संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करें। इस दिन संतान की सलामती के लिए माताएं और बहनें निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को श्री गणेश जी की कथा सुनकर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत को खोला जाता है। 31 जनवरी को चंद्रोदय 8:45 पर होगा।

भगवान गणेश की पूजा करने से सभी कार्य होते हैं सिद्ध
मान्यता है कि इस खास दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मनुष्य को इनकी पूजन पंडितों द्वारा विधि-विधान से करानी चाहिए। पं. विजय शास्त्री ने कहा कि चतुर्थी में ही संकट हरने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि वैसे तो हर महीने के दोनों पक्षों में चतुर्थी आती है। पूर्णिमा के बाद शुक्ल पक्ष में जो चतुर्थी आती है उसकी विनायक चतुर्थी और अमावस के बाद कृष्ण पक्ष में जो चतुर्थी आती है। उसको संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। श्री गणेश बुद्धि-समृद्धि के देवता और विघ्नहर्ता है। इसलिए जो कोई व्यक्ति प्रेमपूर्वक इनका व्रत करके रात में चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलता है तो उसके कष्टों का निवारण हो जाता है।

निर्जला व्रत करने का संकल्प लें
संतान की लंबी आयु के लिए संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सुबह नहा-धोकर पूजाघर में जाकर निर्जला व्रत करने का संकल्प लें। पूरे दिन मन ही मन गणेश भगवान का स्मरण करें। दिनभर व्रत रखें और शाम के समय विधिवत गणेश जी की पूजा करें। गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं।

मान्यता है कि ऐसा करने से वे नाराज हो जाते हैं। उन्हें बेलपत्र अर्पित करें। तिल के लड्डुओं का भोग लगा भगवान गणेश जी की आरती उतारें व चांद को कच्चे दूध, जल-तिल-गुड़े के मिश्रण का अर्घ्य दें। इसके बाद तिल के लड्डू या तिल खाकर व्रत खोलना चाहिए। तिल का दान भी करना चाहिए। वहीं, कंद-मूल का सेवन न करें। हालांकि कुछ महिलाएं अगले दिन नहा धोकर पूजा करने के बाद व्रत खोलती हैं।

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