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  • Schools Opening From October 19, 75% In Private Schools, 60% In Government Parents Are Not Ready To Send Children To School

अभिभावकों को डर:19 अक्टूबर से खुल रहे स्कूल,निजी स्कूलों में 75%, सरकारी में 60% पेरेंट‌्स बच्चों काे स्कूल भेजने काे तैयार नहीं

जालंधर10 दिन पहले
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  • पेरेंट्स की अनुमति से तीन घंटे के लिए स्कूल अाएंगे बच्चे, लगेंगे डाउट सेशन
  • अभिभावकों को डर यदि बच्चे स्कूल गए ताे साेशल डिस्टेंस नहीं रख पाएंगे
  • एसओपी में फुट ऑपरेटिंग वाटर टैप लगाने के निर्देश- सरकारी स्कूल के प्रबंधकों ने कहा- यह मुश्किल, बच्चे अपनी वाटर बाॅटल लेकर आएं

राज्य के सभी सरकारी, प्राइवेट व एडिड स्कूलाें में नौवीं से बारहवीं क्लास तक के स्टूडेंट्स के लिए स्कूल 19 अक्टूबर से खाेलने की अनुमति दे दी गई है। बच्चे पेरेंट्स की अनुमति के साथ 3 घंटे के लिए स्कूल आएंगे। बहुत सारे स्कूल में डाउट सेशन लगाए जाएंगे। स्कूलाें की ओर से पेरेंट्स काे कन्सेंट फाॅर्म भेजे गए थे, लेकिन 75 फीसदी पेरेंट्स अपने बच्चाें काे स्कूल भेजने काे तैयार नहीं है। जबकि सरकारी स्कूलाें में 60 फीसदी अभी बच्चाें काे स्कूल नहीं भेजना चाहते। पेरेंट्स को डर है कि इतने दिनों बाद बच्चे स्कूल जाएंगे तो सोशल डिस्टेंस मेंटेन नहीं कर पाएंगे। जिले में 152 सरकारी सीनियर सेकेंडरी व 122 हाई स्कूल हैं। प्राइवेट व एडिड काे मिलाकर करीब 700 स्कूल हैं। दैनिक भास्कर की ओर से पेरेंट्स से बात करके जाना गया कि अभी वे अपने बच्चाें काे स्कूल क्याें नहीं भेजना चाहते।

क्या कहते हैं पेरेंट्स

पहले स्कूल में खुद जाकर चेक करेंगे सुरक्षा प्रबंध... रीतिका मेहरा मरवाहा ने कहा कि उनका बेटा नौवीं क्लास में पढ़ता है। स्कूल की ओर से कन्सेंट फाॅर्म भेजा गया था, जिसमें हमने उन्हें बच्चे काे अभी स्कूल भेजने से मना कर दिया है। पहले हम स्कूल जाकर देखेंगे कि क्या सीटिंग अरेंजमेंट है, बच्चाें के लिए क्या सुरक्षा प्रबंध है। चूंकि काेराेना अभी खत्म नहीं हुआ है। बच्चाें के लिए लापरवाह नहीं हाे सकते। सारे इकट्ठे हाेंगे, एक-दूसरे से मिलेंगे, बच्चाें काे समझाना मुश्किल हाेता है... साक्षी व कमलप्रीत काैर ने कहा कि कन्सेंट फाॅर्म में लिखा गया था भेजना चाहत है, हां या न। हमने अभी न में ही जबाव दिया है। अभी हालात देखेंगे, अगर काेराेना केस कम हुए तभी भेजेंगे। डर है कि बच्चे स्कूल में इकट्ठे हाेंगे, एक दूसरे से मिलेंगे। चूंकि उनकाे समझाना मुश्किल हाेता है। अभी ऑनलाइन पढ़ाई ताे चल ही रही है, वही ठीक है। बच्चा घर में सुरक्षित ताे है।

इसलिए डर रहे अभिभावक

1. स्कूल में टीचिंग व नाॅन टीचिंग स्टाफ कहां - कहां से आता है, इसकी काेई जानकारी नहीं है। बच्चा किसी के भी संपर्क में आ सकता है।
2. स्कूल प्रबंधक ताे कह रहे हैं क्लासरूम सैनिटाइज किए जाएंगे, लेकिन इसकी क्या गारंटी कि राेज सारी क्लासें सैनिटाइज हाेंगी।
3. बच्चा स्कूल जाएगा ताे दाेस्ताें के साथ मिलेगा। ऐसे में साेशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करना बहुत मुश्किल हाेगा। टीचर्स भी कितना ध्यान देंगे।
4. क्लासरूम या डेस्क ताे सैनिटाइज कर देंगे, रेलिंग या अन्य जगहाें का क्या? वाटर टैप से पानी पीएंगे। बच्चे शरारती हाेते हैं, कहीं भी टच करेंगे।
5. राेज घर पर टेंशन रहेगी कि कहीं बच्चे काे काेराेना न हाे जाए। मन में लगा रहेगा कि बच्चा क्या कर रहा हाेगा। क्लासरूम में ठीक हाेगा या नहीं।

पीटीए फंड से प्रिंसिपल ने खरीदे सैनिटाइजर : डीईओ हरिंदरपाल

डीईओ हरिंदरपाल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन स्कूल खाेलने काे तैयार है। सैनिटाइजर का प्रबंध भी सभी की ओर से पीटीए व अमालगेमेटिड फंड से कर लिया गया है। सभी बच्चे अपनी पानी की बाेतल लेकर आएं। मास्क लगाना अनिवार्य है। सरकारी सीसे स्कूल रंधावा मसंदा की प्रिंसिपल दलबीर काैर और सरकारी जूनियर माॅडल स्कूल लाडाेवाली राेड की प्रिंसिपल मनिंदर काैर ने कहा कि हमने कन्सेंट फाॅर्म पेरेंट्स काे भेज दिए हैं। अभी 60 फीसदी पेरेंट्स ने बच्चाें काे स्कूल भेजने की हामी भरी है। पीटीए फंड से हमने सैनिटाइजर ताे अरेंज कर लिया है, लेकिन फुट ऑपरेटिड वाटर सिस्टम लगाना अभी मुश्किल है क्योंकि, सरकार की ओर से काेई फंड नहीं मिला है। इसलिए बच्चाें काे बाेला है कि घर से ही अपना खाना व पानी की बाेतल लेकर अाए।

गाइडलाइंस स्वघोषणा पत्र देना अनिवार्य

1. स्टूडेंट्स, पेरेंट्स व टीचर्स काे अपने स्वास्थ्य का स्व-घोषणा पत्र, ट्रैवलिंग की जानकारी और इमरजेंसी नंबर स्कूल प्रबंधक काे देने हाेंगे।
2. काेविड सेंटर बनाए गए स्कूल व हाेस्टल अच्छे तरीके से सैनिटाइज करने के बाद ही वहां बच्चे बुलाएं जाएं। वाशरूम, वाटर टैंक, किचन, कैंटीन आदि काे भी सैनिटाइज किया जाए।
3. स्कूल में काेई इवेंट नहीं करवाया जाएगा। क्लासरूम में ही सुबह की प्रार्थना करवा सकते हैं। स्कूल ट्रांसपाेर्ट काे दाे बार सैनिटाइज किया जाएगा। बस कंडक्टर बच्चों के चढ़ने से पहले थर्मल स्क्रीनिंग करेगा। बस की खिड़कियों में पर्दे नहीं लगाए जाएंगे। मास्क अनिवार्य हाेगा। 6 फीट का डिस्टेंस मेंटेन किया जाएगा।
4. हरेक जिले में टास्क फाेर्स बनाई जाएगी, जिसमें डाइट व डीईओ शामिल रहेंगे। वे स्कूलाें में सरप्राइज विजिट कर वहां के सुरक्षा प्रबंध देखेंगे। कंटेनमेंट जाेन में रहने वाला स्टाफ व स्टूडेंट्स अभी स्कूल नहीं आएगा।

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