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निर्देश:केयरमैक्स, सिक्का, ऑक्सफोर्ड समेत सात अस्पतालों ने नहीं लगाए ऑक्सीजन प्लांट, कारण बताओ नोटिस जारी

जालंधरएक महीने पहले
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  • कोरोना की दूसरी लहर में कई मरीजों की सांसें ऑक्सीजन की कमी से रुकीं तो जारी किए थे निर्देश

कोरोना काल में सबसे ज्यादा यानी करीब 10 हजार मरीज दूसरी लहर के दौरान सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल हुए। सभी मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ी थी, जिसके बाद कोरोना का इलाज करने वाले सभी प्राइवेट अस्पतालों को सेहत विभाग ने अपने ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए कहा था।

सेहत विभाग ने 29 जुलाई को सिविल सर्जन और शहर के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश जारी किए थे कि कोरोनावायरस की तीसरी लहर से पहले प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट लगाए जाएं, लेकिन शहर के सात प्राइवेट अस्पतालों ने सेहत विभाग और डीसी के निर्देशों की परवाह नहीं की। इसके चलते डीसी घनश्याम थोरी ने बुधवार को केयरमैक्स, शरणजीत, सिक्का, घई, किडनी, ऑक्सफोर्ड और न्यूरोनोवा अस्पताल को शोकाॅज नोटिस जारी किया है। अस्पतालों से पूछा गया है कि अब तक प्लांट क्यों नहीं लगाया गया।

जिन अस्पतालों में 50 से अधिक बेड और रोज 50 से ज्यादा सिलेंडरों की खपत, वहां प्लांट लगाना लाजिमी
कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों के मुकाबले प्राइवेट में ज्यादा मरीज भर्ती हुए। इसके चलते अस्पतालों ने मरीजों से इलाज के अच्छे खासे पैसे भी लिए। इसके बावजूद कई मरीजों को अॉक्सीजन के िलए जद्दोजहद करनी पड़ी थी। एेसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए कोरोना का इलाज कर रहे हर प्राइवेट अस्पताल को 31 अगस्त तक आॅक्सीजन प्लांट लगाने के लिए कहा था। यह कंडीशन उन अस्पतालों के लिए है, जहां 50 से ज्यादा बेड हैं और रोज 50 से ज्यादा सिलेंडरों की खपत होती है।

निर्देशों की अवहेलना करने वाले नहीं कर पाएंगे कोविड मरीजों का इलाज
सेहत विभाग और जिला प्रशासन ने कोविड की तीसरी लहर की तैयारी शुरू की है। सेहत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि अस्पतालों में बेडों की गिनती कम नहीं है, फिर भी कई अस्पतालों में 25 फीसदी तक गिनती बढ़ाई गई है। सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन की रहती है, जिसके चलते मरीजों के इलाज में परेशानी आती है। डीसी ने बुधवार को नोटिस जारी करके कहा है कि जो प्राइवेट अस्पताल ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाएगा, उसका कोविड का इलाज करने का लाइसेंस रद कर दिया जाएगा।

डॉक्टर्स का सवाल - भविष्य में कोरोना मरीज कम होंगे तो 50 लाख का प्लांट किस काम आएगा?
सिटी में कई प्राइवेट अस्पतालों के लिए कोविड व्यापारिक तौर पर वरदान बना। कई अस्पताल, जहां साल भर 100 मरीज भी नहीं आते, कोविड के दौरान वहां बेड भरे रहे। डीसी द्वारा बुधवार को जारी नोटिस के बाद डॉक्टर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोविड के दौरान उनके पास काफी मरीज आए, लेकिन जब मरीज नहीं आएंगे तो अस्पताल में 30 से 50 लाख की लागत से लगाया प्लांट किस काम आएगा?

प्राइवेट अस्पतालों को तीन दिन तक ऑक्सीजन रिजर्व रखने के निर्देश
कोविड की दूसरी लहर में शहर के करीब 10 अस्पताल ने नए प्लांट लगाए और अपडेट किए। 29 जून को सेहत विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिए कि वे कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए अस्पताल में तीन दिन तक ऑक्सीजन को रिजर्व रखकर चलेंगे। इसके अलावा लेवल-3 के मरीजों के इलाज के लिए बेडों की संख्या भी बढ़ाएंगे। ताकि कोरोना की तीसरी लहर आने पर किसी भी मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी सुरक्षित रहें।

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