हौंसलों की उड़ान भरने निकले 6 दिव्यांग:जालंधर में शानदार स्वागत; UP से चले; 4000 किमी का सफर तय करके पहुंचेगे लद्दाख

जालंधर6 महीने पहले
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कहते हैं कि उड़ान पंखों से नहीं होती, बल्कि हौंसलों से होती है। कुछ ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश से रफ्तार के साथ सड़कों को नापते हुए लेह-लद्दाख के लिए निकले 6 दिव्यांगों की है। यह उत्तर प्रदेश से 4 हजार किलोमीटर का सफर कारों से तय करने के लिए निकले हैं। साथ ही एक संदेश भी दे रहे हैं कि दिव्यांगता दिमाग से होती है। यदि हौंसले बुलंद हों तो दिव्यांगता भी रास्ता नहीं रोक सकती।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से दो दिन पहले निकले इन छह लोगों की टीम मंगलवार को जालंधर पहुंची। टीम को लीड अभियान के मुख्य संयोजक सुनील मंगल व उनके साथी स्क्वाड्रन लीडर (रि.) अभय प्रताप सिंह रहे हैं, जबकि टीम में विजय सिंह बिष्ट, सोमजीत सिंह, रवि कांत, वीर सिंह अपने 7 अन्य सहयोगी साथियों के साथ लेह लद्दाख की यात्रा पर निकले हैं।

छह दिव्यांगों का यह ग्रुप 2 दिन पहले लखनऊ से चला और चंडीगढ़ के रास्ते जालंधर पहुंचा। आगे का सफर अमृतसर, जम्मू-कश्मीर से होते हुए पूरा करेगा। यह लोग 15 दिन में अपनी हाथों से चलने वाली कार( Adapted Car) से सफर करेंगे। इस अनोखे प्रयास का मकसद दिव्यांगों को भारत की गौरवशाली प्रतिभा से जोड़ना है | इनका यह मानना है जो घर से निकला, उसे ही रास्ता मिलता है, इसी वजह यात्रा का नाम 'चलो जीतें' हम रखा गया है।

लेह लद्दाख के लिए कार की ड्राइविंग सीट पर बैठता एक दिव्यांग
लेह लद्दाख के लिए कार की ड्राइविंग सीट पर बैठता एक दिव्यांग

सफर पर निकले दिव्यांगों का कहना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग साथियों के मन में आत्मविश्वास को बढ़ावा देना है व देश के सार्वजनिक स्थलों का परिवेश बाधामुक्त करना है, ताकि उनका आवागमन बाधा-विहीन रहे । एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) की धारा से दिव्यांगजनों को जोड़ना, जिससे वे स्वावलंबी बनें, उनको अपने गांव-शहर में रोजगार प्राप्त करने में आसानी हो।

यात्रा के दौरान जालंधर के देश भगत यादगार हाल में मीडिया से रूबरू होते हुए इन्होंने कहा कि हम सब ने यह ठाना है, दिव्यांगो को सुदृढ़ बनाना है, हमारी इस मांगलिक कामनाओं में आप सभी का आशीर्वाद आपेक्षित है, ताकि मानवता विजयी हो जाए। इन दिव्यांगों को भारतीय सेना का ऑफिसर लीड कर रहा है और उनके साथ बाकी दिव्यांग भी अपने अपने क्षेत्र में बड़ा नाम कमा चुके हैं।

छह दिव्यांगों द्वारा शुरू की गई यह मुहिम देश में मनाए जा रहे आज़ादी के अमृत महोत्सव यात्रा “चलो जीतें हम” अभियान के तहत 12 से 27 जून तक चलेगी।

क्या है Adapted Car

यह कार विशेष तौर पर महिलाओं या फिर दिव्यांगों के लिए तैयार की गई है। पूरी तरह से ऑटोमैटिक इस कार में गियर नहीं होते। बल्कि इसका सारा कंट्रोल हाथ में दिया गया है। स्टीयरिंग के साथ ही एक एक रेस का लीवर लगाया गया है जिससे कार की गति को तेज या धीमा किया जा सकता है। इसी के साथ ब्रेक का कंट्रोल भी कार के स्टीयरिंग के पास दिया गया है। ताकि दिव्यांग व्यक्ति इसे आसानी से कंट्रोल कर सके।