डेंजर्स डेंगू:अब तक 10 साल तक के 31 बच्चों और 20 वर्ष तक के 57 लोगों समेत, 166 को डेंगू

जालंधरएक महीने पहले
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सिविल अस्पताल के डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज। - Dainik Bhaskar
सिविल अस्पताल के डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज।
  • 500 से ज्यादा घरों में मिल चुका डेंगू का लारवा, संक्रमितों में 118 पुरुष
  • मजबूत हुए मच्छर क्योंकि इन्हें खत्म करने की रणनीति कमजोर

कोरोना की दूसरी लहर की पीक खत्म हो चुकी है और डेंगू के संक्रमितों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हालांकि पिछले साल 2020 के मुकाबले जिले में अक्टूबर, 2021 में ही 50 फीसदी ज्यादा केस आ चुके हैं। 20 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार इस साल डेंगू का डंक बच्चों को ज्यादा बीमार कर रहा है।

सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 12 संक्रमित और 30 से ज्यादा डेंगू के संदिग्ध मरीज बुधवार तक इलाज करवा चुके हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों में भी ब्लड सेल कम होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके अलावा 21 से 30 साल तक के 39 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि पिछले साल से ज्यादा मामले आने का कारण यह है कि लोग बुखार होने पर अस्पताल में देरी से पहुंच रहे हैं। बता दें कि जिले में बुधवार तक डेंगू के कुल 166 संक्रमित सामने आ चुके हैं।

शहर में आए 120 केस

देहात के मुकाबले शहर में डेंगू के केस ज्यादा हैं। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला- नगर निगम द्वारा शहर में फॉगिंग देरी से शुरू करना है, जिससे बस्तियात और भीड़भाड़ वाले एरिया में ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। दूसरा- लोग डेंगू के प्रति सावधानी नहीं बरत रहे। सेहत विभाग की टीमों को 500 से ज्यादा घरों से डेंगू का लारवा मिल चुका है। वहीं, विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल 166 में से 120 से ज्यादा मरीज शहर और 40 से ज्यादा ग्रामीण इलाकों से मिले हैं। कुल आंकड़े में 118 पुरुष हैं। सेहत विभाग की तरफ से अक्टूबर में 400 से ज्यादा सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इस साल जो मरीज अस्पताल में आ रहे हैं, उन्हें बुखार के साथ कमजोरी भी काफी ज्यादा है।

डेंगू का लारवा जब एक बार पैदा हो जाए तो मच्छरों में उसकी ब्रीडिंग की चेन विकसित हो जाती है, जो फॉगिंग के साथ भी खत्म नहीं होती। इसके लिए हाई रिस्क एरिया में सर्वे करना जरूरी है। वहीं, वर्तमान में जहां से बार-बार डेंगू के मामले आ रहे हैं, उस एरिया में बार-बार डोर-टू-डोर सर्वे करना चाहिए।
-पूर्व जिला एपिडिमोलॉजिस्ट डाॅ. सतीश कुमार

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