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  • Sudden Oxygen Supply At Civil Hospital Caused Panic, Health Workers Were Not On The Spot, DC Asked For Report In 24 Hours

जालंधर में बड़ी चूक:सिविल अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से मची अफरातफरी, मौके पर नहीं थे सेहत कर्मचारी, DC ने 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

जालंधर6 महीने पहले
मरीज की ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद उसे चैक करता कर्मचारी।

जालंधर के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर बड़ी चूक सामने आई है। यहां अचानक सप्लाई बंद हो गई। इससे वहां काेरोना एमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को परेशानी होने लगी तो वारिसों को पता चला। उन्होंने तलाश की तो मौके पर सेहत कर्मचारी नहीं मिले। इससे अफरातफरी मची तो कर्मचारी दौड़े-दौड़े आए और सप्लाई को रिजर्व में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए सही किया गया। मामला गुरुवार का है। इसका पता चलने के बाद DC घनश्याम थोरी ने ADC विशेष सारंगल को जांच सौंप 24 घंटे में इसकी रिपोर्ट तलब कर ली है।

हालांकि गनीमत रही कि किसी मरीज को इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। शुरूआती जांच में कहा जा रहा है कि ऑक्सीजन प्लांट ट्रिप कर गया था, जिसके बाद 5 मिनट में ही सप्लाई चालू कर दी गई।

एमरजेंसी के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर भागते सेहत कर्मी
एमरजेंसी के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर भागते सेहत कर्मी

छोटी चूक भी बड़े खतरे का संकेत क्योंकि सबसे ज्यादा 79 मरीज सिविल अस्पताल में

कोरोना मरीजों के आंकड़े देखें तो इस वक्त सिविल अस्पताल में सबसे ज्यादा 79 मरीज भर्ती हैं। सिविल में 340 बैड का सबसे बड़ा आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। ऐसे में इस तरह की चूक को अफसर हलके में लेने को तैयार नहीं हैं। यह हालात तब हैं जबकि कुछ दिन पहले ही सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई का ऑडिट हो चुका है। इसके बावजूद सेहत कर्मचारियों व अफसरों के स्तर पर कोरोना मरीजों को लेकर व्यवस्था में लापरवाही बरती जा रही है।

जागे अफसर, घबराहट में कर्मचारी ... ऑक्सीजन सिलेंडर भिजवाने पहुंचे अफसर।
जागे अफसर, घबराहट में कर्मचारी ... ऑक्सीजन सिलेंडर भिजवाने पहुंचे अफसर।

पहले सामने आ चुकी ऑक्सीजन सप्लाई की गड़बड़ी

सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन को लेकर चूक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां ऑक्सीजन की सप्लाई में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। जब यहां रोजाना 410 ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत हो रही थी। जब ADC विशेष सारंगल की टीम ने आॅडिट किया तो देखा कि कई जगहों पर ऑक्सीजन का गैरजरूरी इस्तेमाल के साथ लीकेज की भी समस्या थी, जिसे दूर करने के बाद ऑक्सीजन की खपत एकदम से 410 से घटकर 214 रह गई। सेहत अफसर 196 सिलेंडर गैस बर्बाद कर रहे थे।