आवेदन / क्वारेंटाइन सेंटरों में ड्यूटी कटवाने के लिए शिक्षक लगा रहे कई तरह के बहाने

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

जालंधर. शहर के विभिन्न एरिया में होम क्वारेंटाइन किए गए 4858 लोगों की सुरक्षा और निगरानी के लिए आंगनबाडी, एनजीओ वर्करों के साथ ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को भी लगाया गया है लेकिन शिक्षक संक्रमण के डर से ड्यूटी न करनी पड़े, इसलिए कोई स्वास्थ्य खराब होने तो किसी के रिश्तेदारी में शादी ब्याह होने के चलते ड्यूटी करने में असमर्थता जता रहे हैं। इसके लिए बाकायदा नेताओं की सिफारिश भी लग रही है। नेताजी खुद अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। डीसी दफ्तर में मंगलवार तक ऐसे 33 कर्मचारियों ने ऐसा आवेदन किया है।

दरअसल कोरोनावायरस के चलते करीब 3 महीने से सभी स्कूल और कॉलेज बंद हैं। जिला प्रशासन की ओर से संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। वायरस फैलने का सबसे अधिक खतरा उन लोगों से है, जो बाहर से आए हैं और यहां पर क्वारेंटाइन हुए हैं। ऐसे लोगों की निगरानी के लिए राजस्व, हेल्थ कर्मी, आंगनबाड़ी सहित कई एनजीओ वर्करों को निगरानी के लिए लगाया गया है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई जा रही है लेकिन शिक्षक क्वारेंटाइन सेंटरों पर ड्यूटी करने को तैयार नहीं।

सरकार की ओर से निर्देश है कि क्वारेंटाइन किए गए लोगों की निगरानी में काेई कसर न छोड़ी जाए। प्रशासन की ओर से लोगों की नियमित जांच और निगरानी के लिए बाहर से वालंटियर भी हायर किए जा रहे हैं। इस संदर्भ में एडीसी जसबीर सिंह का कहना कि महामारी जैसे हालात में  जहां लोग प्रशासन की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं, वहीं कुछ कर्मचारी ड्यूटी कटवाने में लगे हुए हैं। उन्हें भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।

अधिकारी से किया ड्यूटी काटने का आग्रह 
एडीसी के कार्यालय में एक राजनीतिक पार्टी के शहरी नेता अपने परिचित शिक्षक की क्वारेंटाइन सेंटर पर लगी ड्यूटी कटवाने की सिफारिश करने आए। अधिकारी से बोले- शिक्षक को हेल्थ से संबंधित कुछ परेशानी हैं। उसकी ड्यूटी हटा दें। नेता ने अधिकारी से काफी देर आग्रह किया लेकिन अधिकारी ने दो टूक जवाब दिया, सभी इस तरह ड्यूटी से मना कर देंगे तो क्या महामारी से लड़ा जा सकता है। जवाब सुन नेता जी लौट गए।

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