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इनसे सीखिए कोरोना से लड़ना:जिस विरक पिंड से जालंधर में कोरोना का पहला मरीज आया था, वहां आज एक भी केस नहीं, वैक्सीनेशन में भी सबसे आगे

जालंधर13 दिन पहलेलेखक: प्रवीण पर्व
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पिछले साल लोगों ने शिक्षा ली आज तक निभाई, मास्क पहनना और सैनिटाइजर लगाना दिनचर्या में शामिल। - Dainik Bhaskar
पिछले साल लोगों ने शिक्षा ली आज तक निभाई, मास्क पहनना और सैनिटाइजर लगाना दिनचर्या में शामिल।
  • रात को लगता है ठीकरी पहरा, लोगों ने बेवजह यात्राएं छोड़ीं, श्रमिकों की सेहत का भी रखते हैं ख्याल

अगर सिटी के लोग मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग तथा वैक्सीनेशन का गंभीरता से पालन करें तो कोरोना को हराया जा सकता है। जिले का विरक पिंड इसकी उदाहरण बन गया है। जालंधर में पहली बार जब कोरोना वायरस ने दस्तक दी तो 893 घर और करीब 5000 आबादी वाले गांव में 4 लोग पॉजिटिव आए। खास बात यह है कि आज इस गांव में कोरोना का एक भी मरीज नहीं है। पिछले साल अप्रैल में जो पहले पॉजिटिव केस आए थे उसके बाद इस गांव ने अपनी सारी आबादी ने वायरस की चेन तोड़ दी। यहां पर 45 वर्ष से ऊपर वाले करीब 70 फीसदी लोग वैक्सीनेशन में कवर हो चुके हैं, जोकि पूरे गांव की आबादी के हिसाब से 30 फीसदी बनता है।

पिछले साल कोरोना काल में गांव की सरपंच रहीं दर्शन कौर बताती हैं कि कोरोना के पहले केस से आज तक गांव के सभी लोगों ने मास्क पहनना, घर के अंदर रहना, रिश्तेदारों के प्रति और खुद बेवजह यात्रा करना छोड़ दिया था। यह सिलसिला आज तक जारी है। जब सेहत विभाग ने टीकाकरण शुरू किया तो गांव के लोगों ने इसे अपनाया। गांव के युवक मोनू बताते हैं कि मास्क पहनना और सैनिटाइजर लगाना लोगों की दिनचर्या है। जिन किसानों के पास दूसरे राज्यों से आए श्रमिक काम करते हैं, वे उनके परिवारों तक का ध्यान रखते हैं। इसी दौरान गांव के युवकों ने बताया कि अभी भी रात को ठीकरी पहरा लगाया जाता है। बाहर से आए लोगों की सेहत के प्रति खुद लोग जागरूक हैं।

विरक गांव ने गलतियां नहीं की

1. कोविड के पहले 4 मरीजों ने ठीक होने के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती।

2. गांव में एकजुटता की भावना रही। लोग इस बात से सीख ले रहे थे कि आस-पास के गांव उन्हें इस तरह देख रहे हैं कि जैसे खतरनाक बीमारी फैलने की क्षेत्रीय वजह है।

3. लंबा समय गांव को सेहत विभाग ने सील कर रखा था। पुलिस तैनात की गई थी। गांव के लोग हालात सामान्य करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर जागरूक हुए।

4. गांव की पंचायत के सदस्यों ने बीमारी को लेकर प्रशासन को समय पर सूचित किया। जब गांव को कंटेनमेंट जोन बनाया गया तो लोगों को एकजुटता के साथ बीमारी को हराने के लिए प्रेरित किया जबकि शहरी इलाकों में जब मरीज ठीक हो रहे थे तो लोग लापरवाह बन जाते थे।

बहुउद्देशीय सेहत कर्मचारी शशि बोलीं- आज विरक गांव में एक भी मरीज नहीं

पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन की बहुउद्देशीय सेहत कर्मचारी शशि बाला बताती हैं कि विरक पिंड के 45 साल से ज्यादा की उम्र के 70% लोग कोरोना वैक्सीन लगवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब पिछले साल चार केस आए तो उसके बाद सिम्टोमेटिक कैटेगरी के 15 के करीब लोगों ने समय-समय पर खुद को लक्षण होने की जानकारी दी थी। उन्हें दो हफ्ते के होम आइसोलेशन में रखा गया था। आज इस गांव में एक भी संक्रमित नहीं है।

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