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फिर सस्ती दवा मिलेगी, राहत की जगी उम्मीद:सिविल में बंद पड़े जनऔषधि सेंटर के लाइसेंस की फाइल एमडी के पास पहुंची, रोगी कल्याण समिति के तहत सेंटर शुरू करने की तैयारी

जालंधरएक दिन पहले
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डॉक्टर साल्ट लिखकर देंगे और मरीज को उसी साल्ट की कम दाम में मिल सकेगी दवाई - Dainik Bhaskar
डॉक्टर साल्ट लिखकर देंगे और मरीज को उसी साल्ट की कम दाम में मिल सकेगी दवाई

सिविल अस्पताल के गेट पर बने एक साल से बंद जनऔषधि सेंटर का शटर खुलने की उम्मीद जगी है। अस्पताल की मैनेजमेंट ने पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन की एमडी को चिट्ठी लिखी है कि वे जनऔषधि सेंटर को अस्पताल के अधीन लाया जाए और आउट सोर्स पर फार्मेसी में रखकर रोगी कल्याण समिति के अधीन सेंटर के चलाया जाए। हालांकि सिविल अस्पताल की मैनेजमेंट ने एक साल पहले भी एमडी कॉर्पोरेशन को चिट्ठी लिखकर अस्पताल के अधीन सेंटर को चलाने के लिए कहा गया था।

तब मीटिंग के दौरान फैसला हुआ था कि अस्पताल के अधीन बंद पड़े जनऔषधि सेंटर को रोगी कल्याण समिति के अधीन चलाया जाएगा, जिसकी अस्पताल को मंजूरी भी मिल गई थी। फिर सिविल अस्पताल को कोविड केयर सेंटर बनाने के बाद जनऔषधि सेंटर का प्रोजेक्ट कागजों में ही गुम हो गया। अब एक बार फिर सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर प्रोजेक्ट के लिए कोशिश कर रहे हैं।

रोगी कल्याण समिति के अधीन फार्मासिस्ट रखा जाएगा, जिसके नाम होगा दवा सेंटर का लाइसेंस

पिछले साल जनऔषधि सेंटर को खोलने की बात चली तो अस्पताल के सीनियर डॉक्टर्स ने फार्मासिस्ट रखने की बात कही थी, लेकिन रोगी कल्याण समिति के अधीन कोई फार्मासिस्ट सेंटर को चलाने के लिए राजी नहीं था। इसका कारण यह था कि सेंटर की दवाओं की सेल पर ही फार्मासिस्ट को कुछ हिस्सा दिया जाना था। हालांकि इस बार दोबारा प्रक्रिया के तहत फाइल शुरू की गई है।

कभी फंड की कमी तो कभी सही ढंग से न चलने के कारण बंद हो चुका है सिविल अस्पताल में सेंटर

केंद्र सरकार की तरफ से सस्ती दवा योजना के लिए देश के हर जिले में जनऔषधि सेंटर खोले गए थे। जिले में सिविल अस्पताल में कई वर्षों से यह प्रोजेक्ट कागजों में ही शुरू होकर कभी फंड की कमी तो कभी सही ढंग से न चलाने के कारण फाइलों में बंद हो गया। अब दोबारा सेंटर का प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद लोगों को सस्ती दवाएं मिलने की उम्मीद जगी है।

वर्तमान में कई दवाएं एेसी हैं, जो सिविल अस्पताल से नहीं मिलतीं। इस कारण मरीजों को अस्पताल से बाहर फार्मेसी से महंगी दवा लेनी पड़ती है। अगर सेंटर शुरू होता है तो डॉक्टर को दवा का साल्ट लिखकर देना होगा। इसके बाद मरीज को उसी साल्ट की दवा मिल जाएगी। अब रोगी कल्याण समिति के अधीन फार्मासिस्ट को तैनात करने के बाद सेंटर में दवा लाइसेंस का शुरू किया जाएगा। उम्मीद है मरीजों को जल्द ही सस्ती दवा मिलनी शुरू होे जाएगी।

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