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  • The Patients Who Have Been Recovering From Depression Are Coming Back Sick, Those Suffering From Other Diseases Will Die.

काेराेना इफेक्ट:डिप्रेशन के ठीक हाे चुके मरीज दाेबारा हाे रहे बीमार, दूसरे रोगों से पीड़ित लोगों काे लग रहा जान चली जाएगी

जालंधर3 महीने पहले
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  • गंभीर बीमारियों के मरीजों ने खुद को आइसोलेट किया, डर है कि परिवार न हो जाएं इनफेक्टेड

सिविल अस्पताल के नर्सिंग स्कूल में डी-एडिक्शन विभाग की ओपीडी में साइकेट्रिस्ट के पास दिमाग से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित मरीज बढ़ रहे हैं। एचओडी डॉ. अमन सूद का कहना है कि तीन महीनों में साइकेट्री के मरीजों में इजाफा हुआ है। जिन मरीजों का इलाज हो गया था, वे दोबारा डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। वहीं, साइकेट्रिस्ट विभाग के काउंसलिंग स्टाफ के अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर लोगों के डिप्रेशन का कारण कोरोनावायरस है।

लोग अपने दिमाग में धारणा बना चुके हैं कि अगर कोरोना हो गया तो बचना मुश्किल है। हालांकि लोगों का ऐसा माइंडसेट होना स्वाभाविक भी है। लेकिन ज्यादातर लोगों में कोरोनावायरस को लेकर जागरूकता नहीं है। लोग अभी तक यह मानकर चल रहे हैं कि अगर परिवार के एक सदस्य को कोरोनावायरस की पुष्टि हो गई तो उनका सारा परिवार भी खतरे में पड़ जाएगा।

हर राेज 20 से अधिक मरीज आ रहे डिप्रेशन की दवा लेने
सिविल अस्पताल में कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज के साथ अस्पताल परिसर में बने नर्सिंग स्कूल में रोजाना 20 से अधिक डिप्रेशन की दवा लेने अा रहे हैं। विभाग की ओपीडी के मुताबिक तीन महीने में दिमाग से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे 1500 से अधिक मरीज दवा लेने पहुुंच चुके हैं। इनमें से 60 फीसदी लोगों को नींद न आने की समस्या है। डॉ. अमन सूद ने कहा कि लॉकडाउन में घर में रहने के कारण अधिकतर लोग डिप्रेशन की शिकार हुए हैं। इनमें भी हर वर्ग का व्यक्ति शामिल है। 
कंपनी ने सैलरी आधी कर दी ताे घर खर्च चलाना भी हुआ मुश्किल

ग्रीन माॅडल के रहने वाले 40 साल के व्यक्ति ने बताया कि फरवरी में नया घर लिया था। इसके चलते बैंक से 35 लाख का होम लोन लिया था। मार्च में लॉकडाउन के बाद कंपनी ने वर्क फ्राम होम किया। इसके बाद मई में सैलरी आधी कर दी। इसके बाद समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बैंक लोन की किस्त नहीं दे पाने से डिप्रेशन हाे गया। इन हालात में शराब पीने से तबीयत ज्यादा खराब हो गई। अब 24 घंटे में 2 से 3 घंटे ही नींद आती है। भगत सिंह चौक निवासी संदीप ने कहा कि आधी सैलरी मिल रही है, बहुत सारे जरूरी काम रुक गए हैं। बिल तक नहीं दे पा रहा।

काेराेना के डर से 400 हाे गया शूगर लेवल

ज्वाला नगर के रहने वाले 48 साल के व्यक्ति का डिप्रेशन में जाने का मुख्य कारण कोरोनावायरस का डर है। साइकेट्रिस्ट भी इसकी पुष्टि कर चुके हैं। इन दिनों जो लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, उनमें ज्यादातर यही सोच रहे हैं कि अगर उन्हें कोरोना हो गया तो ज्यादा दिन तक बच नहीं पाएंगे। वहीं, समाज और करीबी रिश्तेदार भी मरीज का बायकाट कर देते हैं। ऐसे में लोग घुटन महसूस हाेने लगती है। खुद काे घर के किसी कमरे में आइसोलेट कर लेते हैं और हर किसी को शक की नजर से देखते हैं। इसका कारण यह है कि वह दिमागी तौर पर बीमार हो रहे हैं।

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