• Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Jalandhar
  • The People Themselves Built Thatch So That The Dirty Water Could Be Cleaned And Used In The Fields; The Message Of Environmental Protection Was Also Given By Planting Saplings.

नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे आज:लोगों ने खुद ही पक्के किए छप्पड़, ताकि गंदा पानी साफ कर खेतों में इस्तेमाल हो; पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

जालंधर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
गांव लिद्दड़ां में पक्का किया गया छप्पड़। - Dainik Bhaskar
गांव लिद्दड़ां में पक्का किया गया छप्पड़।
  • वाहनों के धुएं, पराली और कूड़े की आग पर नियंत्रण पा लिया जाए तो मिलेगी राहत की सांस
  • राहत की बात- जंगलात विभाग ने जिले में एक साल में लगाए 1.50 लाख से ज्यादा पौधे
  • चिंता का विषय- हाईवे के कारण कटते गए पेड़, जंगलात एरिया 33 से 5% तक आया

आज नेशनल पाॅल्यूशन कंट्रोल डे है तो जल, भूमि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कसमें खाई जाएंगी, लेकिन उसके बाद जागरूक लोग ही इस बारे सोचेंगे। जिले की बात करें तो सिटी में वाहनों का धुआं, कूड़ा जलाना, सीवरेज जाम आदि से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और देहात में पराली आदि को जलाकर वातावरण खराब किया जा रहा है।

इसके विपरीत कुछ ऐसे लोग हैं, जो गांव अथवा अपने इलाके को वातावरण के नजरिये से संभाल रहे हैं। जल संरक्षण के लिए लोग छप्पड़ों को पक्का कर रहे हैं। भूमि संरक्षण के लिए जंगलात विभाग पौधे लगा रहा है। जंगलात विभाग ने एक साल में 1.50 पौधे लगाए, बावजूद इसके वर्तमान में जंगलात एरिया घटा है। हाईवे बनते गए और पेड़ कटते गए। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे ज्यादा पौधे समाज सेवी संस्थाओं और आरपीएफ ने लगाए हैं। इनमें कैंट एरिया में सबसे अधिक पौधारोपण हुआ है।

जल प्रदूषण रोकने की कोशिश- लिद्दड़ां गांव में लोगों ने दो छप्पड़ पक्के किए

गांव लिद्दड़ां में गांववासियों ने खुद ही दो छप्पड़ पक्के किए हैं। गांववासी रोशन लाल ने बताया कि इसमें पानी ट्रीट करके खेतों में इस्तेमाल किया जाएगा। पूरे गांव का गंदा पानी पहले यहीं फैला रहता था। गांववासियों और सरपंच ने गंदगी को खत्म करने के लिए पूरा जोर लगाया। अब राहत महसूस हो रही है।

भूमि संरक्षण का प्रयास-जंगलात विभाग ने सिटी ही नहीं, कैंट में भी किया पौधारोपण

जंगलात विभाग के रेंज अफसर हरगुरनेक सिंह ने बताया कि एक साल में 1.50 लाख पौधे लगाए गए हैं। इनमें से 50 हजार पौधे कैंट एरिया में ही वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जंगल का एरिया कम होता जा रहा है। जिले में जंगलात का एरिया 33 फीसदी चाहिए, जबकि 5 फीसदी ही है।

वायु प्रदूषण- बढ़ते वाहन, कूड़े को आग बड़े कारण

वायु प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण कंडम वाहनों और फैक्ट्रियों में से उठता धुआं है। गांव रंधावा मसंदां के जुगल किशोर, अमरजीत सिंह, जागीर सिंह ने बताया कि बिस्त दोआब नहर में लोग रोज कूड़े आदि को आग लगा देते हैं।

खबरें और भी हैं...