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पुलिस ने कहा:बेटे ने दातर मारकर पिता की हत्या का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया इंजरी शार्प नहीं ब्लंट थी, बरी

जालंधर8 दिन पहले
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सेशन जज रुपिंदरजीत चाहल की कोर्ट में धीरपुर में पिता की हत्या के आरोप से बेटे रंजीत सिंह को बरी कर दिया। पुलिस ने चार्जशीट में कहा था कि बेटे ने पिता की हत्या इसलिए कर दी थी कि वह शराब पीकर मां को मारता था। दातर मारकर पिता की हत्या की थी। कत्ल में इस्तेमाल दातर बरामद कर लिया गया था, मगर बचाव पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर केस से जुड़े तमाम पहलू कोर्ट में रखे, जिससे यह साबित किया कि बेटे ने कत्ल नहीं किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाॅक्टर ने लिखा था कि दलजीत सिंह के सिर में मिली इंजरी ब्लंट थी न कि शार्प।

पोस्टमार्टम में शराब पीने की बात तक नहीं आई थी।23 दिसंबर, 2018 को थाना करतारपुर में किसान रंजीत सिंह वासी धीरपुर की शिकायत पर 4 अज्ञात हत्यारों के खिलाफ कत्ल का केस दर्ज किया गया था। 25 साल के रंजीत सिंह ने कहा था कि 22 दिसंबर की देर रात उनके घर में काले कपड़े से मुंह ढके हुए 4 लोग आ गए। उनके हाथ में रॉड थी।

उन्हें धमकी दी गई कि अगर शोर मचाया तो जान से मार देंगे। उनके मोबाइल छीन छीनकर आंगन में फेंककर वे फरार हो गए। डरते हुए बाहर आकर शोर मचाया। दूसरे कमरे में देखा तो बिस्तर में पिता की लाश पड़ी थी। थाना करतारपुर की पुलिस ने 3 जनवरी, 2019 को गांव के रहने वाले भजन सिंह ने पुलिस से कहा कि रंजीत उसके पास आया था। उसने कहा कि मैंने ही पिता की हत्या की थी, क्योंकि वह शराब पीकर मां मंजीत कौर को पीटते थे। पुलिस ने बेटे के खिलाफ कत्ल की चार्जशीट फाइल कर दी थी। ट्रायल के दौरान बेटे को जमानत मिल गई थी।

पुलिस ने जांच किए बिना ही बेटे को अंदर कर खत्म कर दिया था केस
बचाव पक्ष के एडवोकेट दर्शन सिंह दयाल ने पोस्टमार्टम करने वाले डाॅक्टर से मौत किस वेपन से हुई थी, को लेकर सवाल किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतक के शरीर पर ब्लंट इंजरी थी, मगर पुलिस ने बेटे की निशानदेही पर कत्ल में प्रयुक्त दातर बरामद करने की बात कहीं थी। बचाव पक्ष के सवाल पर डाॅक्टर ने कहा- दातर से नहीं, बल्कि रॉड नुमा चीज से मृतक के शरीर पर प्रहार किए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शराब

पीने जैसे बात नहीं आई थी। इतना ही नहीं, दातर पर खून के धब्बे तक नहीं मिले थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मृतक के बेटे ने अपनी स्टेटमेंट में कहा था कि 4 अज्ञात लोग रॉड लेकर उनके घर में आए थे और पिता की हत्या कर गए। जांच करने की बजाय बेटे को अंदर कर केस खत्म कर दिया। बचाव पक्ष की दलील से सहमत होते हुए कोर्ट ने बेटे रंजीत को बरी कर दिया।

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