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  • The Wife Of The Suspected Corona Patient Wandered To Pick Up The Corpse For 3 Days, Sometimes A Slip Of The Morgue And Sometimes A Cut For The PPE Kit.

जालंधर सरकारी अस्पताल के हालात:संदिग्ध कोरोना मरीज की पत्नी 3 दिन से शव लेने को भटकती रही, कभी मुर्दाघर की पर्ची तो कभी PPE किट के लिए कटवाए चक्कर

जालंधरएक महीने पहले
दोहरी पीड़ा: पति की लाश न मिलने से मुर्दाघर के बाहर बैठकर रोती महिला।

कोरोना महामारी के वक्त में जालंधर में सिविल अस्पताल प्रबंधन की बड़ी चूक सामने आई है। यहां एक संदिग्ध कोरोना मरीज की पत्नी 3 दिन से पति की लाश लेने के लिए भटकती रही। कभी उसे मुर्दाघर की पर्ची लाने को कहा जाता तो कभी PPE किट के लिए दौड़ाया जा रहा था। हार कर वह मुर्दाघर के बाहर बैठकर रोने लगी तो मीडिया तक बात पहुंची। लापरवाही की पोल खुलने के बाद भी अफसर अपनी घटिया कारगुजारी को दबाते रहे। हालांकि बाद में उसे लाश देकर भेज दिया गया। इस प्रकरण ने सिर्फ कोविड केयर बनाए इस सिविल अस्पताल की कारगुजारी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

बेबसी बयान करती महिला सुमन।
बेबसी बयान करती महिला सुमन।

हलका बुखार होने पर लाई अस्पताल, यहां डॉक्टर बोले- मौत हो चुकी, घर ले जाओ
अड्‌डा होशियारपुर चौक की रहने वाली सुमन ने बताया कि मेरे पति जतिंदर को हलका बुखार हुआ। इसके बाद शुगर बढ़ गई। उन्हें घबराहट होने लगी। उन्होंने मुझे कहा कि एंबुलेंस बुलाकर मुझे अस्पताल ले जाओ। 5 मई को वो पति को अस्पताल ले आई। यहां डॉक्टरों ने हाथ भी नहीं लगाया और कहा कि इनकी मौत हो चुकी है, घर ले जाओ। वो घर कहां ले जाती, इसलिए लाश वहीं मुर्दाघर में रखवा दी। उनका कोविड टेस्ट नहीं कराया लेकिन लक्षण वैसे ही थे। डॉक्टर भी यही बात कहते रहे।

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लाश लेने आए तो बेटी के साथ स्टाफ ने किया मिसबिहेव
इसके बाद से वह शुक्रवार तक लाश लेने के लिए चक्कर काट रही है। उसकी बेटी भी साथ आई। उसने स्टाफ से पूछना चाहा तो उनकी मदद के बजाय बेटी से मिसबिहेव किया गया। इसके बाद वो मुर्दाघर आते तो उन्हें पर्ची लाने को कहा जाता। वो पर्ची लेने जाते तो कहते कि इसकी जरूरत नहीं, सिर्फ PPE किट लेकर चले जाओ, तो वहां कोई नहीं पूछता।

गली के लोगों ने कर लिए दरवाजे बंदसुमन ने कहा कि अचानक पति की मौत से वह बुरी तरह से घबरा गए। उनके पास संस्कार तो दूर, एंबुलेंस में लाश ले जाने के भी पैसे नहीं थे। उन्होंने लोगों से मदद मांगनी चाही तो उनका दुख बांटना तो दूर, लोगों ने उन्हें देख अपने घर के दरवाजे भी बंद कर लिए।

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अफसर एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी, फिर बोले- एंबुलेंस के पैसे नहीं थे
इस बारे में सिविल अस्पताल के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने अब तर्क देना शुरू कर दिया कि महिला के पास लाश को ले जाने के लिए एंबुलेंस के पैसे नहीं थे, उन्होंने वह भी दिलवाए। हालांकि जब वहां कुछ अफसरों व डॉक्टरों से पूछने की कोशिश की गई तो महिला की परेशानी पर जवाब देने के बजाय उन्होंने एमरजेंसी सायरन बजा दिया।

सिविल सर्जन डॉ. बलवंत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. बलवंत सिंह

सिविल सर्जन बोले- SMO को पूछो इस मामले में सबसे बड़ा हैरानीजनक रवैया सिविल सर्जन डॉ. बलवंत सिंह का रहा। जब उनसे इस लापरवाही के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल अलग है, वहां के बारे में SMO से बात करो। जब उनसे कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो भी वह सिविल अस्पताल के अलग होने की बात कहते रहे।

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