शहद खतरे में:बरसात में चोर मधुमक्खियां कर देती हैं शहद के बक्सों पर हमला, बनाएं मिट्‌टी का किला, बक्सों को नदी किनारे या निचले क्षेत्रों में रखने से बचें

जालंधर5 महीने पहलेलेखक: जगमोहन शर्मा
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फूलों से रस न मिलने से कमजोर हो जाती हैं मधुमक्खियां, काम नहीं कर पातीं, इन्हें पराग या चीनी और पानी घोलकर दें - Dainik Bhaskar
फूलों से रस न मिलने से कमजोर हो जाती हैं मधुमक्खियां, काम नहीं कर पातीं, इन्हें पराग या चीनी और पानी घोलकर दें

बरसात के दिनों में मधुमक्खी पालकों को कई तरह के आर्थिक नुकसान उठाने पड़ते हैं। इनसे बचने के लिए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना ने अपने हफ्तावार लाइव प्रोग्राम में मधुमक्खी पालकों को जागरूक किया। डॉ. जुगराज सिंह पांधा ने बताया कि बरसात के दिनों में पराग कम होने के चलते कई मधुमक्खी पालक मधुमक्खियों के बक्सों को नदियों के किनारे रख देते हैं।

इससे अचानक पानी आने की सूरत में बक्से बह जाते हैं या मधुमक्खियां डूब जाती हैं और शहर सहित बक्सों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए नदी किनारे या पानी वाली अन्य जगह बक्से न रखें। ऐसी जगह भी बक्से रखने से बचें जहां निकासी नहीं हो। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बक्सों को बरसात के दिनों में स्टैंड पर रखा जाना चाहिए, ताकि मक्खियों को उमस न हो।

साथ ही बक्सों के आस-पास से घास को साफ कर दें क्योंकि बरसात में अगर मधुमक्खियों को उमस से नहीं बचाया जाता तो वह काम करना छोड़ देती हैं, जिससे शहद उत्पादन पर असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि शहद के बक्सों को लेकर यूनिवर्सिटी की तरफ से कई तरह की तकनीक विकसित की गई हैं, जिससे मधुमक्खियों को तकलीफ न हो। मधुमक्खी पालकर यूनिवर्सिटी की इन तकनीकों को अपनाकर भी बरसात के दिनों में शहद के उत्पादन को अच्छी तरह से जारी रख सकते हैं।

खुले में तिरपाल पर न बनाएं घोल, यह वैज्ञानिक नहीं

डॉक्टर जुगरात सिंह पांधा ने बताया कि बरसात के दिनों में पंजाब भर में फूल नहीं मिल पाने से मधुमक्खियां खुराक यानी रस की कमी से कमजोर हो जाती हैं, जिससे यह काम करना छोड़ देती हैं। यह शहद का निर्माण करती रहें,इसके लिए मधुमक्खी पालक फूलों की कमी के दिनों में इन्हें पानी और चीनी का घोल दें ताकि यह काम करती रहें।

उन्होंने बताया कि बरसात में लगने वाली झड़ी के दिनों में भी मुक्खी बाहर नहीं जा पाती। पराग से इसे खुराक के रूप में विटामिन, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट मिलते हैं। उन्होंने बताया कि हनी प्रोड्यूसर इस बात का खास ख्याल रखें कि मधुमक्खियों को खुराक देने मंे वैज्ञानिक विधि ही अपनाएं।

कई मधुमक्खी पालक खुले में गड्‌ढा बनाकर और तिरपाल पर चीनी का घोल बनाते हैं ताकि सभी मख्खियां यहां से अपनी खुराक ले सकतें जबकि यह गलत है। इससे यह नुकसान हो सकता है कि एक भी बीमार मक्खी अगर इस घोल को पीती है तो दूसरी मक्खियां भी बीमार हो जाएंगी और सभी छत्तों में बीमारी फैला देंगी, जिससे मधुमक्खी पालकों को बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है।

बीयर के खमीर, सूखे दूध, चीनी से बना सकते खुराक

डॉक्टर जुगराज सिंह पांधा ने बताया कि मधुमक्खी पालक बीयर के खमीर, स्प्रेटा दूध, भूने चने के बेसन, चीनी-पानी से भी लेटी तैयार कर उसका पेड़ा बना छत्ते में रख सकते हैं। इससे भी मधुमक्खियों के लिए खुराक मिलती रहेगी। बीयर का खमीर 420 ग्राम, स्प्रेटा दूध 40 ग्राम, चीना, 500 ग्राम पानी और 40 ग्राम चने का बेसन लें।

बाहरी मक्खियों के अटैक से शहद बचाने के लिए बक्से का मुंह मिट्‌टी से करें बंद

डॉक्टर जुगराज सिंह पांधा ने बताया कि बाहरी और जंगली मधुमक्खियां भी खुराक नहीं मिलने से ऐसे छत्तों पर हमला कर देती हैं, जिन छत्तों में भरपूर शहद रहता है। शहद पर ऐसा अटैक होना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि अगर मधुमक्खी पालक इस तरह का हमला देखते हैं तो सबसे पहला उपाय यह करें कि बक्से के मुंह को गीली मिट्‌टी से बंद कर दें और उसमें एक छोटा छेद कर दें ताकि एक समय में एक ही मक्खी अंदर जा सके और बाहर आ सके।

उन्होंने बताया कि जंगली मधुमक्खी ज्यादा अटैकिंग होती है और वो रानी मक्खी को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे सारा छत्ता बर्बाद हो सकता है। अगर जंगली मक्खी का अटैक न रुके तो बक्से को सभी जगह से पूरी तरह बंद कर दें। मुख्य द्वार पर ही छेद रखें।

इसके बाद भी अगर शहद चुराने का सिलसिला नहीं थमता तो बक्सों के आगे गीली घास डाल दें। इससे मक्खी को नफरत हो जाती है और वो आना छोड़ देती है। अगर फिर भी न रुके तो बक्से तो तीन किलोमीटर दूर रख दें क्योंकि मधुमक्खी तीन किलोमीटर के दायरे से आगे नहीं जा सकती है। एक उपाय यह भी हो सकता है कि अगर दूसरे बक्से की मक्खी अटैक कर रही तो बक्सों की जगह को बदल दें। इससे भी अटैक रुकने की संभावना रहती है।

6-7 मधुमक्खियां बक्से में एक साथ जाएं तो समझो शहद पर अटैक हो गया है

डॉक्टर पांधा के मुताबिक ज्यादातर किसान भाई पूछते हैं कि दूसरी मधुक्खियों के अटैक को कैसे पहचानें। इसकी एक ही पहचान है। अगर किसी भी मधुमक्खी के बॉक्स में 6-7 मधुमक्खियां एक साथ तेजी से घुस रही हों और बाहर आ रही हों तो समझो आपके बक्से के शहद पर अटैक हो गया है।

उन्होंने बताया कि मधुमक्खी का अपने छत्ते में जाने और आने का एक स्वभाव होता है वह कभी भी हड़बड़ाहट में छत्ते में नहीं जाती और न ही कभी जल्दी बाद आती है। अगर मक्खी अपने छत्ते की हो तो वह एक मिनट बाद ही बाहर आएगी। अगर किसान इन तकनीकों को समझ पाते हैं तो शहद उनके लिए कभी घाटे का कारोबार साबित नहीं होगा।

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