खुशियां दा वेला / आज सीजन के आखिरी शुभ मुहूर्त में होंगी 80 शादियां, 27, 29 और 30 जून शादी के लिए शुभ

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • जिले में 3 दिन में 300 से अधिक शादियां होने का अनुमान, शहर में ही एक-दूजे के हुए 190 जोड़े
  • नाले फुल नाले फलियां: कोरोना के चलते वर-वधू पक्ष के 8 से 10 लोग मिलकर निभा रहे रस्में

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:39 AM IST

जालंधर. कोरोनावायरस का असर रीति-रिवाजों पर भी देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन के दौरान जहां लोग शादी-ब्याह से बचते रहे, वहीं अनलॉक-1.0 में 40 लोगों के प्रोग्राम में शामिल होने की छूट मिलने से वर और वधू पक्ष के लोग खुश हुए। इस महीने तीन ही दिन 27, 29 और 30 जून शादी के लिए शुभ माने गए। जबकि आज के दिन शहर में करीब 80 शादियां हो रही हैं। अब तक 20 परिवार ने जिला प्रशासन से इजाजत ले चुके हैं। लोग बेटे और बेटी का घर बसाने के लिए बैंड-बाजा और बारात के बिना ही रस्में पूरी करने को तैयार हैं। शहर की ही बात करें तो 190 जोड़े एक-दूसरे के हो गए हैं।
दोनों पक्षों के महज 10 से 20 लोग ही धार्मिक रीति-रिवाजों से कार्यक्रम निपटा रहे हैं। सिटी के पैलेस, मंदिरों के पंडितों से बातचीत में पता लगा कि जिले में 3 दिनों में करीब 300 जोड़े शादी के बंधन में बंध रहे हैं। कोरोना काल में दूल्हे राजा घोड़ी में तो आएंगे, लेकिन साथ में बैंड बाजा और बारातियों का तामझाम नहीं रहेगा। दूल्हा सात फेरे लेकर दुल्हन को ले जाएगा।

प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन
अनलॉक-1.0 में सरकार की ओर से शादी ब्याह कार्यक्रमों के लिए काफी छूट दे दी गई है। कार्यक्रमों में भीड़ न हो, इसलिए 40 से अधिक लोगों के विवाह समारोह में शामिल होने पर पाबंदी है। समय की नजाकत को देखते हुए वही लोग प्रशासन से अनुमति ले रहे हैं, जिन्होंने 40 से ज्यादा गैदरिंग करनी होती है। शहर में ऐसे 4 से 6 फीसदी लोग ही हैं। सरकार के निर्देश और संक्रमण की आशंका के मद्देनजर प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए वर और वधू पक्ष के लोग आपस में मिलकर प्रोग्राम निपटा रहे हैं। इस समय ज्यादातर लोग शादियां धार्मिक स्थलों या फिर अपने घरों में ही कर रहे हैं।

दो दिन में कम से कम 400 शादियां होनी चाहिए थीं

पंडित दिनेश शास्त्री का कहना है कि पिछले वर्षों में जिस प्रकार से शादियां होती थी, वैसा माहौल अब नहीं है। जून के अंत में शादियों के जो शुभ मुहूर्त हैं, इन 2 दिनों में तो शहर में कम से कम 400 शादियां होनी चाहिए थीं, लेकिन कोरोना के चलते इनकी संख्या घटकर बहुत कम रह गई है। संक्रमण के डर से वर और वधू पक्ष के 6 से 8 लोग मिलकर शादियां कर रहे हैं।

इससे लोगों का खर्च भी कम हो रहा है और शादियां भी मुहूर्त पर हो रही हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के चलते दक्षिणा भी कम हो गई है। जहां पहले यजमान खुशी से  20 हजार रुपए दे देते थे, अब मुश्किल से पांच हजार रुपए मिल रहे हैं। शहर में करीब 300 आचार्य हैं, जो प्रमुख रूप से धार्मिक अनुष्ठान कराने का काम कर रहे हैं।

30 साल पुराना दौर वापस आया...9वीं पातशाही दुख निवारण साहिब गुरु तेग बहादुर नगर के प्रधान जत्थेदार जगजीत सिंह का कहना है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार कोरोना के चलते शादी ब्याह में कमी आई है और खर्चे भी काफी कम हुए हैं। 30 साल पहले इसी तरह दोनों पक्षों के पारिवारिक सदस्य गुरुद्वारा या फिर धार्मिक स्थानों पर जाकर शादी करते थे। फिर पुराना दौर वापस आ गया है।

अब 5 महीने बाद आएगा मौका...लॉकडाउन के चलते जून के शुरुआती दौर में लोग शादी करने से कतरा रहे थे। अनलाॅक हुआ तो इसी महीने 27, 29 और 30 जून विवाह के लिए अति उत्तम मानी गईं। अब वैकल्पिक तिथियों को छोड़ दिया जाए तो विवाह के लिए 5 महीने बाद नवंबर में 3 और दिसंबर में 5 शुभ मुहूर्त आएंगे।

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