नवांशहर में मायावती की चुनावी रैली:बोलीं- प्रलोभनों में न आएं, सब दलित विरोधी हैं, बाबा कांशी राम और अंबेडकर का सपना करें सच

नवांशहर8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
नवांशहर में रैली के दौरान हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते सुखबीर सिंह बादल और कुमारी मायावती - Dainik Bhaskar
नवांशहर में रैली के दौरान हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते सुखबीर सिंह बादल और कुमारी मायावती

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नवांशहर दाना मंडी में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस, भाजपा और आप सभी दलितक विरोधी हैं। यह सब पूंजीवादी हैं और उन्हें दबे-कुचले, शोषित, गरीब, मजदूर से कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेस जो दलित सीएम फेस आगे कर ही उसके पीछे उसका मकसद सिर्फ प्रदेश के सबसे बड़े वर्ग को साध कर सत्ता हासिल करना है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सत्ता में रहते हुए एससी सीएम बनाने की याद नहीं आई लेकिन एन मौके पर आकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर तथा अब चुनावों में फिर से चन्नी की चेहरा आगे रखकर निचले तबके को लोगों को ठगने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह तय है कि इस बार कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं करेगी लेकिन कहीं गलती से सत्ता में आ गई तो यह भी तय है कि सत्ता हासिल करते ही वह चन्नी को दूध से मक्खी तरह निकाल कर साईड लाइन कर देंगे। यदि चन्नी को मुख्यमंत्री बना भी दिया तो कांग्रेस हाईकमान उनका रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में रखेगी। चन्नी एक भी काम अपनी मर्जी से नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि देश में सबसे लंबे समय तक कांग्रेस ने राज किया। लेकिन अपनी दलित विरोधी व जनविरोधी नीतियों के कारण पंजाब को छोड़कर पूरे देश में साफ हो गई है। अबकी बार कांग्रेस पंजाब से भी साफ हो जाएगी। यही हाल अब देश में भारतीय जनता पार्टी का भी होने वाला है। पूंजीवादी भाजपा का भी लोग देश से सूपड़ा साफ कर देंगे।

उन्होंने कहा कि आज रैली में परकाश सिंह बादल अपने खराब स्वास्थ्य के कारण नहीं आ सकें। उन्होंने बादल के शीघ्र स्वास्थ्य कामना करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। पंजाब में उन्होंने मुख्यमंत्री की हैसियत से सेवा की है। अब उम्र भी बहुत हो गई है लेकिन सेवा का जज्बा अब में उनमें कायम है। इस वजह से वह फिर चुनाव में उतरे हैं। उन्होने ध्येय किया हुआ है कि जब तक वह ठीक हैं चल फिर सकते हैं तब तक वह लोगों की सेवा करेत रहेंगे। उन्होंने पुरजोर अपील की कि पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल को भारी मतों से जिताकर उनका सम्मान करें।

मायावती को हाथी का स्मृति चिन्ह भेंट करते बसपा नेता
मायावती को हाथी का स्मृति चिन्ह भेंट करते बसपा नेता

बाबा कांशी राम और अंबेडकर ने उपेक्षित वर्ग के उत्थान के लिए पूरा जीवन लगा दिया

मायावती ने बाबा कांशी राम व भीम राव अंबेडकर को प्रणाम करते कि दोनों ही शख्सियतों ने उपेक्षित वर्ग, दलितों, गरीबों, मजलूमों, कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए अपना सारा जीवन लगा दिया। अब दोनों ही बेशक इस दुनिया में नहीं है लेकिन बहुजन समाज पार्टी उनके इस कार्य में अब भी जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में कांग्रेस की सरकार बनी। पहली ही सरकार में बाबा भीमराव अंबेडकर कानून मंत्री बने। उन्होंने शोषित, दलित वर्ग के लिए आवाज उठाई उन्हें आरक्षण का मुद्दा उठाया तो कांग्रेस के उच्च जाति के लोगों ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद बाबा साहेब ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और वह देश में इस वर्ग के उत्थान के लिए खुद ही जुट गए।

उनके सपने को पूरा करने के लिए पंजाब से बाबा कांशी राम ने आवाज बुलंद की और देशभर में जाकर दलितों को एकजुट करने में अपनी भूमिका निभाई। बाबा कांशी राम को त्यागी करार देते हुए कहा कि उन्होंने समाज के शोषित वर्ग को एकजुट करने के लिए उन्होंने ताउम्र समर्पण की भावना से काम किया। उन्होंने रोष भी जताया कि जिस धरती से उन्होंने आगाज किया वहां से उन्हें रिस्पॉन्स ठीक ढंग से नहीं मिला।

नवांशहर में रैली को संबोधित करती मायावती
नवांशहर में रैली को संबोधित करती मायावती

न अंबेडकर को भारत रतन दिया, न कांशी राम के निधन पर राष्ट्रीय शोक किया

मायावती ने कहा कि कांग्रेस में जातिवाद कूट-कूट कर भरा हुआ है। उन्होंने कहा सारी सारी उम्र दलितों के लिए लड़ने वाले संविधान निर्माता डाक्टर भीम राव अंबेडकर को इतनी सेवा के बावजूद भी भारत रतन नहीं दिया। बाबा कांशी राम जिन्होंने सबकुछ त्याग कर दलित, दबे-कुचलों, शोषित लोगों के लिए समर्पण की भावना से काम किया उनके निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। इससे इनकी मानसिकता का पता चलता है। यहां तक कांग्रेस ने मंडल कमिशन लागू कर आरक्षण को खत्म कर दिया था। जिसे बसपा ने संघर्ष कर वीपी सिंह की सरकार में खारिज करवाया। उन्हीं की सरकार में बाबा साहेब को भारत रतन भी दिलवाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब सत्ता में होती है तो उसे दलितों का उत्थान नजर नहीं आता। तब सीएम व अन्य उच्च पदों पर दलितों को बिठाने की याद नहीं आती है। महिलाओं के उत्थान की भी याद नहीं आती।

चन्नी मंदिर में गए अच्छी बात है, अपने गुरु के दर पर भाी माथा टेक लेते

मायावती ने चन्नी पर तंज कसते हुए कहा कि वह सीएम का चेहरा घोषित होने बाद वह खुशी के मारे हिमाचल में एक मंदिर में आशीर्वाद लेने चले गए। उन्हें इससे एतराज नहीं है। लेकिन बेहतर यह होता कि यदि वह अपने समाज के संत गुरु रविदास जी तो भी याद कर लेते। उनके मंदिर में जाकर माथा टेक लेते। संत रविदास के अनुयायियों से अपील की कि वह इन्हें कांग्रेस ने वीकर सेक्शन की योजनाएं बंद कर दी गई हैं।

पंजाब में निराशा के कारण बीमार हुए थे कांशी राम

मायावती ने कहा कि गरीबों, मजलूमों, दलितों, शोषितों के उत्थान को लेकर पंजाब से मुहिम छेड़ने वाले बाबा कांशी राम को यहीं से उत्साहवर्धक नतीजे न मिलने के कारण वह बहुत निराश थे। यही निराशा उनकी बीमारी का कारण भी बनी। वह पंजाब में अपने वर्ग की सरकार चाहते थे। लेकिन यहां सबसे ज्यादा तादाद में होने के बावजूद लोगों ने उनका साथ नहीं दिया। अंत समय तक वह पंजाब को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि आज वह हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके सपने को सच कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का हमारे पास अच्छा मौका है। उन्होंने कहा कि सभी लोग गठबंधन की सरकार को सत्ता में लाकर बाबा कांशी राम के सपनों को सच करें। वह जहां कहीं भी होंगे उन्हें अच्छा लगेगा। उन्होंने दलितों के लिए बहुत त्याग किया है।