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नवरात्र:कल अमावस्या के साथ खत्म होगा अधिकमास, शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्र 17 अक्टूबर से

जालंधर8 महीने पहले
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नवरात्रि 17 अक्टूबर यानी शनिवार से शुरू हो जाएंगे। इन नौ दिनों तक घर-घर में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होगी। शास्त्रों में मां दुर्गा को शक्ति की देवी बताया गया है, इसलिए इसे शक्ति की उपासना का पर्व कहा जाता है। नौ दिन तक घरों में मां दुर्गा की अखंड ज्योति की स्थापना और जौ बोए जाते हैं।

ज्योतिष विद्या के अनुसार 19 वर्ष बाद पितृपक्ष के बाद अधिकमास लगने से इस बार का नवरात्र भी खास होगा। 16 अक्तूबर को अधिक मास की अमावस्या होगी। इसी दिन अधिकमास खत्म होगा। 17 तारीख को आश्विन मास के आरंभ के साथ ही शारदीय नवरात्र में जगत जननी मां जगदंबा की आराधना के लिए कलश स्थापना होगी। नवरात्र में नौ दिनों तक व्रत पूजन की मान्यता है कि नवरात्र के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं।

7:25 से 8:50 बजे तक का समय घट स्थापना के लिए शुभ

शिव दुर्गा मंदिर के पंडित गौतम भार्गव, आचार्य नरेंद्र वशिष्ठ और पं. विजय शास्त्री ने बताया कि इस दिन मां दुर्गा माता की चित्र के समक्ष अखंड दीप प्रज्ज्वलित करके सभी देवताओं का आह्वान करते हुए कलश स्थापना करें। गणेश षोडश या पंचदेव पूजन करने के उपरांत षोडशमातृका का पूजन करें और दुर्गा स्तुति, दुर्गा सप्तशती पाठ व मां के बीज मंत्रों का जाप कल्याणकारी और प्रभावी माना जाता है।

उन्होंने बताया - 17 अक्टूबर को घट स्थापना मुहूर्त द्विस्वभाव लग्न युक्त मुहूर्त सुबह 7:25 से 8:50 तक शुभ है और अभिजीत मुहूर्त 11:51 से 12:36 बजे तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। शुभ के चौघड़िया अनुसार 7:50 से 8:59 बजे, चल, लाभ, अमृत का चौघड़िया दोपहर 12 से 4:25 बजे तक और राहु काल को छोड़कर करना शुभ होता है राहुकाल सुबह 9 से 10:30 तक रहेगा।

पूजन की विधि

सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उपासक अपने घर के पवित्र स्थान पर मिट्‌टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं। इसी वेदी पर तांबे या मिट्‌टी का कलश स्थापित करें। मां भगवती की फोटो या मूर्ति रखकर उनका पूजन दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से करके मां को वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। इसके बाद मां की आरती करके गलतियों के लिए क्षमा याचना करनी चाहिए।

साधक को नौ दिन उपवास मां की उपासना करना चाहिए और घर में अखंड ज्योति जरूर जलाएं, जो कर्म की साक्षी होती है। मां को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। सुबह और शाम को नियमित तौर पर नौ दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें। माता की आरती के साथ पूजा का समापन करें। अखंड ज्योति जलाएं। मां को दिन मेें चार बार भोग लगाएं।

श्रीमहालक्ष्मी मंदिर में होंगे दुर्गा स्तुति पाठ

जेल रोड स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में 17 अक्टूबर से सुबह 6 बजे से दुर्गा स्तुति पाठ का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासन व मंदिर कमेटी के सदस्यों ने यह निर्णय लिया है कि मंदिर परिसर में केवल 50 श्रद्धालु ही बैठकर पाठ कर सकेंगे। मंदिर कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन होगी।

श्री देवी तालाब मंदिर में 108 जोतों के पाठ

श्री देवी तालाब मंदिर प्रबंधक कमेटी के ने बताया कि नवरात्र के दूसरे दिन मंदिर परिसर में सुबह 108 जोतों के पाठ होगा। पाठ में शामिल होने के लिए श्रद्धालु कमेटी के कार्यालय में आकर रजिस्ट्रेशन करवाए। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी श्रद्धालु मंदिर परिसर में नहीं बैठ सकेगा।

किस दिन किस स्वरूप की होगी पूजा

17 अक्टूबर : घट स्थापना और मां शैलपुत्री पूजन
18 अक्टूबर : मां ब्रह्मचारिणी पूजन
19 अक्टूबर : मां चंद्रघण्टा पूजन
20 अक्टूबर : मां कूष्मांडा पूजन
21 अक्टूबर : मां स्कंदमाता पूजन
22 अक्टूबर : मां कात्यायनी पूजन
23 अक्टूबर : मां कालरात्रि पूजन
24 अक्टूबर : मां महागौरी पूजन
25 अक्टूबर : मां सिद्धिदात्री की पूजा, हवन करके नवरात्र परायण
26 अक्टूबर : दशमी दुर्गा विसर्जन, विजयदशमी

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