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जालंधर के गांव खेला में 'खेल':सर्वसम्मति से चुनी लेडी सरपंच ने एक पंच से मिल पंचायती फंडों में किया लाखों का घोटाला

जालंधर2 महीने पहले
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पुलिस अब केस दर्ज कर इस घोटाले की जांच करेगी ताकि इसकी राशि का पता लगाया जा सके। इस राशि के लाखों में होने की उम्मीद है। - Dainik Bhaskar
पुलिस अब केस दर्ज कर इस घोटाले की जांच करेगी ताकि इसकी राशि का पता लगाया जा सके। इस राशि के लाखों में होने की उम्मीद है।
  • कम कीमत पर खरीदी वस्तु के दाम अधिक बता पंचायती फंड से पैसे निकाले, पेयजल बिल के बदले गांव वालों से इकट्ठा किए पैसे खुद खा गए

जिले के गांव खेला में सर्वसम्मति से चुनी गई लेडी सरपंच ने एक पंच के साथ मिलकर पंचायती फंडों में लाखों का घोटाला कर दिया। दोनों ने न केवल कम कीमत पर खरीदी वस्तु के दाम अधिक बता बिल पास किए, बल्कि रिपेयरिंग के नाम पर भी पंचायत का फंड खा गए। यही नहीं, गांव के लोगों से पेयजल बिल वसूली कर खुद ही हजम कर गए।

इस घपले की पोल RTI एक्ट से तब खुली, जब गांव के पंचों ने रिकॉर्ड लेकर इसकी जांच की। उन्होंने पंचायती राज व रूरल डेवलपमेंट के डायरेक्टर को इसकी शिकायत भेजी। जिसके बाद जालंधर रूरल पुलिस के SSP ने इसकी जांच कराई और पंचायती फंडों में गड़बड़ी पकड़े जाने पर सरपंच व एक पंच के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक पंचायती फंड में कितने का घोटाला हुआ, इसके लिए अब जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन इसकी राशि लाखों में हो सकती है।

सर्वसम्मति से चुनी गई थी पंचायत, फैसले अकेले लेने लगी सरपंच

गांव खेला के पंचायत सदस्य हरकमलजीत कौर, भोली व परमजीत सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत दिसंबर 2018 में चुनी गई थी। जिसमें सर्वसम्मति से पुष्पिंदर कौर सरपंच व भोली, हरकमलजीत कौर, संतोख राम, परमजीत सिंह व मनजीत सिंह पंच चुने गए थे। सरपंच बनने के बाद पुष्पिंदर कौर ने पंचों से सलाह किए बगैर निजी फायदे के लिए खुद ही फैसले करने शुरू कर दिए।

अफसरों ने नहीं सुनी तो RTI से खोली पोल

पंचों को इस गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने व गांव के लोगों ने पहले जिले के उच्च अफसरों को इस मामले की जानकारी दी। इसके बाद 3 व 4 जून 2020 को फिल्लौर के BDPO को इसकी लिखित शिकायत दी। रजिस्ट्री के जरिए भी अफसरों को शिकायतें भेजी लेकिन इन अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। फिर उन्होंने RTI एक्ट के जरिए ग्राम पंचायत का रिकॉर्ड मांगा। जिससे उन्हें पता चला कि सरपंच पुष्पिंदर कौर व पंच मनजीत सिंह साठगांठ कर किस तरीके से झूठे प्रस्ताव व जाली बिल बनाकर पंचायत व सरकार को चूना लगा रहे हैं।

घोटाले के कुछ चुनिंदा उदाहरण

  • सरपंच ने एक प्रस्ताव 18 मई 2020 को इंजन सैट खरीदने के लिए डाला था। जिसके मुताबिक चैक नंबर 00443 के जरिए 22 हजार की रकम निकलवाई गई। जबकि जिस दिलबाग सिंह निवासी पाल कदीन फिल्लौर से यह इंजन खरीदा गया, उसने स्व घोषणा पत्र देकर माना कि उसने 11 हजार में यह इंजन बेचा था। इस तरह 9 हजार रुपए सरपंच व पंच गबन कर गए।
  • RTI सेे उन्हें दशमेश आयरन एंड हार्डवेयर स्टोर के 4,378 रुपए के बिल की कॉपी दी गई। जो इंजन रिपेयर का 1 जुलाई 2020 का था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इंजन 18 मई को चालू हालत में खरीदा गया तो उसकी रिपेयर का कोई कारण नहीं और सच्चाई यह है कि असलियत में रिपेयर हुई ही नहीं। बिल में लिखा सामान भी गलत लिखा हुआ है। वहीं, अगर इंजन रिपेयर भी हुआ तो उसके पुराने सामान का जिक्र नहीं है। यही नहीं, इस बिल को बहुमत से पंचों ने बहुमत से वापस लेने का प्रस्ताव पास किया था लेकिन फिर भी उसे पास कर दिया गया।
  • 12 जून 2019 को सरपंच पुष्पिंदर कौर ने 6280 रुपए की जो लेबर डाली है, वह भी बाद में जोड़ी गई है।
  • 8 मार्च 2019 को पंचायती फंड से 16,770 रुपए निकलवाए गए लेकिन इस बारे में न तो पंचों को कोई एजेंडा भेजा गया और न ही कोई मीटिंग हुई। बिना बहुमत के प्रस्ताव पास कर पैसे निकलवा वित्तीय नुकसान किया गया।
  • गांव में पेयजल सप्लाई के लिए वाटर एवं सेनिटेशन कमेटी बनी है। जिसकी चेयरपर्सन सरपंच पुष्पिंदर कौर है जबकि पंप ऑपरेटर पंच मनजीत कुमार है। यह दोनों खुद ही गांव के लोगों से बिल इकट्ठा करते हैं। इसके बदले लोगों को कोई रसीद नहीं दी जाती। बिल का यह पैसा गांव कमेटी या पंचायत के खाते में जमा नहीं करवाया गया। बिल के पैसे सरपंच व पंच मनजीत अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

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