कनक का कीर्तिमान / 185 लाख टन होगा गेहूं का उत्पादन, सूबे में अब तक का सर्वाधिक

Wheat production to be 185 lakh tons, highest ever in the state
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Wheat production to be 185 lakh tons, highest ever in the state

  • 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल तैयार, 182 लाख टन का रिकाॅर्ड तोड़कर 185 लाख टन का कीर्तिमान 
  • सरकार ने 15 अप्रैल से खरीद शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दी, करीब 200 लेबर की जरूरत होगी

दैनिक भास्कर

Apr 10, 2020, 03:19 AM IST

जालंधर. सूबे में 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल पूरे यौवन पर है। समय पर बारिश होने के चलते और बीमारी की चपेट में नहीं आने से 2019 के मुकाबले गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद है। अभी खेतों में नमी होने के चलते 14 अप्रैल के बाद ही सूबे में कटाई जोर पकड़ेगी। 2019 में सूबे में 182 लाख टन गेहूं की पैदावार हुई थी। कृषि विभाग का अनुमान है कि इस साल यह 185 लाख टन का आंकड़ा पार कर जाएगा। यानी बीते साल से तीन लाख टन ज्यादा। हालांकि, सरकार ने 15 अप्रैल से खरीद शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार गन्ने की तर्ज पर पर्ची के माध्यम सहित घर से खरीद की योजना पर भी काम चल रहा है। लोकल लेबर भी कोरोना के भय में बाहर नहीं निकली तो कटाई और मंडीकरण का सीजन लंबा खिंच सकता है। हालांकि राज्य में 95% गेहूं की कटाई कंबाइनों से ही होती है। इसका एक कारण यह भी है कि कंबाइन से तुरंत काम निपट जाता है। वहीं कंबाईन बनी तूड़ी साफ-सुथरी भी होती है। सूबे में कटाई 4000 ट्रैक्टर ऑपरेटेड, सेल्फ प्रोपेल्ड 7600 कंबाइनों सहित 39000 स्ट्रॉ रिपर पर निर्भर है।

  • 04 लाख के करीब मजदूर  हर साल पंजाब पहुंचते हैं
  • 15 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो रही है
  • 200 के करीब लेबर की जरूरत होती है प्रति अनाज मंडी
  • 1918 अनाज मंडियों में खरीद संबंधी तैयारियां मुकम्मल नहीं

बड़ी चिंता है लेबर की कमी

  • सूबे में लॉकडाउन के चलते यूपी, बिहार व अन्य राज्यों से आने वाली 4 लाख के करीब पहुंचने वाली लेबर की कमी सताएगी।
  • वहीं सूबे की 1918 अनाज मंडियों में खरीद संबंधी तैयारियां मुकम्मल नहीं हो पाई हैं। वहां सुरक्षा भी बड़ी चिंता है। 
  • 15 अप्रैल से शुरू हो रही गेहूं खरीद का अभी मैकेनिज्म भी तय नहीं हो पाया है। कीमत व क्वालिटी भी बड़ा मुद्दा है। 

सरकारी तैयारी, मंडी बोर्ड-एजेंसियों के रिटायर कर्मचारी वापस बुलाए
सूबा सरकार ने गेहूं खरीद प्रक्रिया को निर्विघ्न सुनिश्चित बनाने के लिए कंट्रोल रूम बनाया है। मंडियों में किसानों को परेशानी न हो इस लिए मंडी बोर्ड व राज्य खरीद एजेंसियों के रिटायर कर्मचारियों को भी वापस बुलाया है। वहीं पंजाब आढ़ती एसोसिएशन भी प्लानिंग करने में जुटे हैं। मंडियों की संख्या 1918 से बढ़ा कर दोगुनी कर दी गई है।

यह भी है किसानों के लिए समस्या

  • राज्य के गोदामों में इस समय 200 लाख टन चावल और गेहूं पड़ा है। इसे शिफ्ट करने के लिए लेबर चाहिए।
  • हर महीने 15 लाख टन अनाज दूसरे राज्यों में जा रहा है। यह भी लेबर का काम है। सीजन शुरू होने वाला है। समय कम है।
  • असल चुनौती यह भी है कि किसान कम से कम संख्या में मंडियों में पहुंचे।

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