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डायरेक्ट पेमेंट का पेंच:जालंधर मंडी में पहुंचा गेहूं लेकिन आढ़ती हड़ताल पर गए, खरीद न होने से मंडियों में ही गुजरेंगी किसानों की रातें

जालंधर5 महीने पहले
जालंधर की अनाज मंडी में खरीद शुरू न होने से मायूस बैठे किसान।

जालंधर में गेहूं खरीद पर केंद्र सरकार की डायरेक्ट पेमेंट का पेंच फंस गया है। 10 अप्रैल से खरीद की प्रक्रिया शुरू होनी थी। जिसे देखते हुए किसान फसल लेकर अनाज मंडी पहुंच गए लेकिन यहां पता लगा की आढ़ती हड़ताल पर चले गए हैं। इस वजह से किसान दिन भर परेशान व मायूस होकर मंडी में ही बैठे रहे। आढ़तियों के कामकाज बंद किए जाने की वजह से किसान गेहूं की ढेरी लगाकर अब मंडी में ही बैठे हैं। गेहूं न बिकने की वजह से अब किसानों को रात भी अपनी फसल की सुरक्षा के लिए मंडियों में ही बितानी पड़ेगी।

जालंधर की अनाज मंडी में गेहूं की सफाई करता मजदूर।
जालंधर की अनाज मंडी में गेहूं की सफाई करता मजदूर।

किसान बोले- जब पेमेंट उतनी ही तो फिर डायरेक्ट क्यों दी जा रही?

अनाज मंडी में पहुंचे किसान बलविंदर सिंह ने कहा कि वो सुबह गेहूं की ट्रॉली लेकर आए तो पता चला की आढ़ती हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र भी किसानों को उतना ही पेमेंट सीधे अकाउंट में देगी, जितना उन्हें आढ़ती के जरिए मिलता है। ऐसे में इस फैसले का कोई फायदा नहीं। अब उलटा हमारी परेशानी यह है कि पहले आढ़ती हमें जरूरत के वक्त पैसे दे देता था लेकिन अब नहीं देगा। जरूरत के वक्त हम कहां सरकार या बैंक के चक्कर काटते रहेंगे। ऐसे में पहले ही किसान लागत अधिक व कम कीमत से परेशान हैं, ऐसे में अब केंद्र सरकार ने नई अड़चन पैदा कर दी है। किसानों को गन्ने की सीधी पेमेंट तो मिलती नहीं, ऐसे में अब सरकार गेहूं की पेमेंट भी नहीं देगी तो फिर हमारे लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी।

जालंधर की अनाज मंडी में गेहूं की सफाई करता मजदूर।
जालंधर की अनाज मंडी में गेहूं की सफाई करता मजदूर।

आढ़ती बोले- पेमेंट के बारे में स्पष्ट नहीं, किसान-आढ़ती रिश्ता तोड़ रही सरकार

आढ़ती एसोसिएशन के मेंबर जगजीत सिंह अरोड़ा ने कहा कि मंडी में अभी तक बारदाना (गेहूं पैक करने की बाेरियां) व विभाग के अफसर नहीं अाए। पेमेंट कैसे आएगी? वह अभी तक स्पष्ट नहीं है। अगर पैसा सीधे किसान के खाते में जाएगी तो फिर हमारी जो पेमेंट दी गई है, वो कैसे निकलेगी। किसान दिन या रात कभी भी आए तो हम पैसे दे देते हैं, अगर उसे जरूरत पड़ी तो वो कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह कदम तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेवजह ही सरकार किसानों व आढ़तियों के रिश्ते को तोड़ने में जुटी हुई है।

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