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सुखमीत डिप्टी की अर्श से फर्श तक की कहानी:कॉलेज पॉलिटिक्स के बाद यूथ कांग्रेस प्रधान और पहली बार चुनाव लड़ 26 साल की उम्र में पार्षद बना, किडनैपिंग केस में हुई जेल, सजा काट लौटा तो मिली मौत

जालंधर4 महीने पहले
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गोली मारे जाने के बाद सड़क पर औंधे मुंह गिरा पूर्व पार्षद सुखमीत डिप्टी। - Dainik Bhaskar
गोली मारे जाने के बाद सड़क पर औंधे मुंह गिरा पूर्व पार्षद सुखमीत डिप्टी।

26 साल की उम्र में ही यूथ कांग्रेस प्रधान से पार्षद बन सियासी दांव-पेंच व दमखम का लोहा मनवाने वाले सुखमीत सिंह डिप्टी की रविवार को गाजी गुल्ला चौक पर हत्या कर दी गई। 3 कार सवार हमलावरों ने पहले उसकी बाइक को टक्कर मार गिराया। फिर उसे ताबड़तोड़ गोलियों से भून दिया। कहा जा रहा है कि डिप्टी अब सजा पूरी होने के बाद फिर से पुराने तरीके से ही सियासी तौर पर सक्रिय होने लगा था। फिलहाल पुलिस इस मामले में कई एंगल से जांच में जुटी हुई है।

सुखमीत डिप्टी को गोली मारने का पता चला तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई
सुखमीत डिप्टी को गोली मारने का पता चला तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई

यूं तो सुखमीत डिप्टी विरोधी सियासी नेताओं को शुरू से ही खटकता रहा लेकिन अर्श से फर्श और फिर जान गंवाने तक की उसी की एक गलती भारी पड़ गई। सुखमीत डिप्टी ने 2005 में कॉलेज से राजनीति शुरू की। उसके बढ़िया बोलचाल के लहजे और निडरता कांग्रेस को भा गई। वह कांग्रेस के स्टूडेंट विंग NSUI का प्रधान बन गया। इससे उसे राजनीतिक दिशा मिल गई और राजनीति की जमीन पर वह अपनी पैंठ बढ़ाता रहा। इसके बाद वह यूथ कांग्रेस के देहाती प्रधान की कुर्सी तक पहुंच गया। साल 2007 में वह पहली बार नगर निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद चुन लिया गया। उम्र भले छोटी रही हो लेकिन डिप्टी ने अपना सियासी कद खूब बड़ा बनाया।

हत्या के बाद मौके पर जांच करती पुलिस।
हत्या के बाद मौके पर जांच करती पुलिस।

इसी दौरान उससे एक गलती हुई, जिसने उसकी कामयाबी को ग्रहण लगा दिया। साल 2008 में फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर व कॉलोनाइजर सुभाष नंदा के बेटे गगन नंदा उर्फ मिक्की अपहरण कांड हो गया। जिसकी साजिश में सुखमीत डिप्टी का नाम आया। नंदा फैमिली से एक करोड़ की फिरौती भी वसूली गई लेकिन बताया जाता है कि उनका रिवॉल्वर किडनैपरों ने नहीं लौटाया। जिसके नंदा फैमिली को लगा कि कहीं कोई और वारदात न हो जाए, इसलिए वो पुलिस के पास पहुंच गए। इस मामले ने ही सुखमीत डिप्टी को अर्श से फर्श पर लाना शुरू कर दिया। मामले में बाकी आरोपियों के साथ डिप्टी भी अरेस्ट हुआ। उसे 2011 में 20 साल कैद की सजा हुई। सजा के खिलाफ डिप्टी ने अपील नहीं की और सजा काटता रहा। इसी साल अप्रैल महीने में वो सजा पूरी कर बाहर आ गया था। इसके बाद अब वह फिर से सियासी तौर पर तो नहीं लेकिन समाज सेवी के तौर पर एक्टिव हो गया था।

सेहराफील्ड हत्याकांड में मिली थी क्लीन चिट

शहर के मशहूर सेहराफील्ड हत्याकांड में भी सुखमीत डिप्टी का नाम चर्चा में आया था। उस वक्त डिप्टी जेल से पैराेल पर बाहर आया था। उस पर आरोप थे कि उसने ही सेहराफील्ड के मालिक रविंदर सिंह के बेटे दविंदर सिंह उर्फ रिंकू बाबा पर हमला करने वाले को शरण व शह दी थी। हालांकि पुलिस जांच में उसे क्लीन चिट दे दी गई थी। सुखमीत डिप्टी फिर जेल में सजा पूरी करने के लिए लौट गया था।

DCP इन्वेस्टिगेशन गुरमीत सिंह ने कहा कि सभी एंगलों से जांच की जा रही है।
DCP इन्वेस्टिगेशन गुरमीत सिंह ने कहा कि सभी एंगलों से जांच की जा रही है।

हत्या के लिए अब 4 एंगलों पर जांच

  • चचेरे भाई राजबीर ने कहा कि सुखमीत डिप्टी को किसी की कॉल आई थी। उसे बर्थडे में केक कटवाने के लिए जाना था। वह कॉल किसकी थी और उसे कहां बुलाया गया था?। इसको लेकर जांच की जा रही है।
  • जब सुखमीत डिप्टी जेल में था तो उसकी कई ग्रुपों के साथ अनबन हो गई थी। हालांकि वह कौन से गैंगस्टर थे और उनमें कोई पैराेल या जमानत पर बाहर तो नहीं आया, इसकी पुलिस जेल सुपरिटेंडेंट से रिपोर्ट निकलवा रही है।
  • मई महीने में रोपड़ में कोई घटना हुई थी। एक पार्टी की तरफ से सुखमीत डिप्टी समझौता करवाने के लिए गया था। वह घटना क्या थी और उसमें कौन-कौन पार्टियां थी व खासकर विरोधी पार्टी कौन सी थी और उसका क्या बैकग्राउंड है, इसकी जांच की जा रही है।
  • हत्या में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट कार CCTV फुटेज में पुलिस को दिखी। PB08CZ7336 नंबर की कार होशियारपुर के किसी अमरजोत के नाम पर रजिस्टर्ड है। पुलिस टीम होशियारपुर पहुंचकर कार मालिक से पूछताछ करेगी कि आखिर उसकी कार यहां वारदात में कैसे इस्तेमाल हुई?।