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अच्छी कारगुजारी:7 हजार एकड़ जमीन वन विभाग को ट्रांसफर होना बाकी, इसी बीच डीएफओ बदले

पठानकोट14 दिन पहले
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  • धार ब्लाक की 20 हजार एकड़ जमीन फाॅरेस्ट के नाम चढ़वाई, पौधरोपण पूरा हुआ तो 25% हो जाएगा फारेस्ट कवर
  • 2014 में हाईकोर्ट का फैसला 27 हजार एकड़ जमीन वन विभाग के नाम की जाए, लेकिन आदेश को दबाया गया, 2018 में डीएफओ डॉक्टर संजीव तिवारी ने शुरू की प्रक्रिया

जिले के अद्धपर्वतीय धार ब्लाक की यूपीडीपी (अनडिमार्केड प्रोटेक्टेड एंड डिमार्केड प्रोटेक्टेड) की 7 हजार एकड़ जमीन वन विभाग के नाम राजस्व रिकाॅर्ड में चढ़ना बाकी है जबकि इसी बीच इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले डिवीजनल फारेस्ट आफिसर डाॅ.संजीव तिवारी का तबादला हो गया है। अरबों कीमत की 27 हजार एकड़ जमीन हल्दी राम, पर्ल्स चिट फट ग्रुप, नेचर हाईट जैसी कंपनियों और बड़े भूमाफियाओं के कब्जों से निकलकर वन विभाग के नाम दर्ज कराना शुरू हुआ था जिसमें से 20 हजार एकड़ राजस्व रिकार्ड में दर्ज हो चुकी है।

धार ब्लाक में पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट की धारा 4 लागू है जिसके मुताबिक उन जमीनों पर वन विभाग की एनओसी के बगैर कोई भी कामर्शियल गतिविधि नहीं हो सकती। धार की 27 हजार एकड़ जमीन 1904 में इंडरसन ने कब्जा मालिकों से लेकर प्रोटेक्टेड फारेस्ट (संरक्षित वन) नोटिफाई कर दिया था। इनमें अधिकतर मालिकी खाने में शामलात जमीनें थीं जिन्हें राजस्व रिकाॅर्ड में भी वन विभाग के नाम चढ़ना चाहिए था लेकिन मामला पेंडिंग रहा और जिन पर जिनका कब्जा था सरकार ने उनके कब्जे में रहने दिया। 1986 में सरकार ने आदेश जारी किया कि सारी जमीन वन विभाग के नाम की जाए जिसके खिलाफ जमीनों के कब्जेदार हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने 1988 में स्टे आर्डर दिया फिर भी कब्जेदारों ने राजस्व विभाग से मिलीभगत कर जमीनें बाहर से आई कंपनियों और भूमाफियाओं को बिकवाते रहे।

2014 में हाईकोर्ट का फैसला आया कि सभी 27 हजार एकड़ जमीन वन विभाग के नाम दर्ज की जाए। इस आदेश को भी दबाए रखा गया। पठानकोट के डीएफओ का चार्ज संभालने के बाद 2018 में डा. संजीव तिवारी ने प्रक्रिया शुरू की और उनकी पहल पर पंजाब सरकार से हिदायत हासिल कर 27 हजार एकड़ जमीन राजस्व रिकार्ड में वन विभाग के नाम चढ़ाने की कार्यवाही शुरू की गई और वन विभाग के बार-बार रिमाइंडर के कारण अब तक 20 हजार एकड़ जमीन वन विभाग के नाम चढ़ चुकी है और विभाग ने जमीन कब्जे में लेकर उन पर पौधरोपण करा रहा है। विभाग के मुताबिक इतनी जमीन पर पौधरोपण हो जाने के बाद जिले का फारेस्ट कवर 21 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगा जो पंजाब में सबसे अधिक है। संजीव तिवारी यहां 4 साल रहे और प्रमोशन ड्यू है और ट्रांसफर मोहाली अटैच किया गया है जबकि राजेश गुलाटी अब यहां के डीएफओ होंगे।

टूरिस्ट प्रोजेक्ट अहम उपलब्धि

पिछले 4 साल का कार्यकाल पठानकोट का अब तक का सबसे अधिक उपलब्धियों भरा रहा। यूपीडीपी जमीन लेने के अलावा रणजीत सागर बांध की झील के पास चमरोड़ में टूरिस्ट डेस्टीनेशन विकसित करना, झील के कुलारा टापू पर ग्लोबल टूरिस्ट प्रोजेक्ट की बाधाओं को दूर करना अहम है। शहर के साथ डलहौजी रोड पर नेचर पार्क, मलिकपुर और सरना में यूबीडीसी और एमबी लिंक नहर पर नेचर ट्रेल विकसित कराना प्रमुख है। हरियाल के पास दफा 4 वाली जमीन से अवैध माइनिंग रोकना भी अहम है। हजारों एकड़ जमीन से कब्जे छुड़ाए गए।

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