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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:शाहपुरकंडी डैम प्रोजेक्ट का 70% काम पूरा, दिसंबर 2022 तक बंद होगा पाकिस्तान काे जाने वाला पानी

पठानकोट18 दिन पहलेलेखक: शिवबरन तिवारी
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50 महीने जेएंडके की जिद और एक साल पड़ी कोविड की मार के बाद फिर तेजी में आया देश का बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट - Dainik Bhaskar
50 महीने जेएंडके की जिद और एक साल पड़ी कोविड की मार के बाद फिर तेजी में आया देश का बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट

50 महीने तक जेएंडके की जिद और कोविड की मार के बाद भी शाहपुरकंडी बांध प्रोजेक्ट ने फिर से गति पकड़ ली है। सब कुछ ठीक रहा है तो दिसंबर 2022 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। करीब 70 फीसदी तक काम पूरा हो चुका है। बांध तैयार होने के बाद रावी के पानी को पाकिस्तान जाने से रोक लिया जाएगा। अभी माधोपुर हेडवर्क्स से हर साल 12 हजार क्यूसेक से अधिक पानी पाक चला जाता है। प्रोजेक्ट की लागत 2013 में 2300 करोड़ रुपए तय हुई थी। करीब 50 महीने तक काम रुका रहा। विवाद सुलझने के बाद 2018 में फिर से काम शुरू हुआ, जोकि अब 2715 करोड़ रुपए में पूरा होगा।

यह प्रोजेक्ट रावी नदी पर बने 600 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले रणजीत सागर बांध का पूरक है। इससे 206 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होगा। साथ ही 37 हजार एकड़ जमीन भी सिंचित होगी। भास्कर की टीम ने एक्सपर्ट के साथ मौके पर पड़ताल की तो सामने आया कि बांध निर्माण, पावर हाउस व हाइडल चैनल का काम तेजी से चल रहा है। बांध के 22 में से 17 वेज का निर्माण पूरा हो चुका है

शाहपुरकंडी डैम प्रोजेक्ट का 70% काम पूरा, दिसंबर 2022 तक बंद होगा पाकिस्तान काे जाने वाला पानी

अगले महीने रावी के पानी को पंजाब की ओर डाइवर्ट कर जेएंडके की ओर बांध निर्माण शुरू होगा। इसके लिए जेएंडके वन विभाग की एनओसी मिल चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक बांध का काम 70 फीसदी, हाइडल चैनल का काम 80 फीसदी तथा पावर हाउस की खुदाई का काम 60 फीसदी हुआ है। खास तौर पर केंद्र सरकार चाहती है कि जल्दी बांध पूरा हो ताकि पाकिस्तान को पानी जाना बंद हो जाए।

कोविड की मार से 8 महीने की देरी हुई: लॉकडाउन मेें बांध का काम रुक गया। पावर हाउस का टेंडर काॅल करने पर कोई कंपनी नहीं आई। प्रोजेक्ट 8 महीने लेट हुआ। बाद में ओमिल जेवी कंपनी को एलाट किया गया। बांध निर्माण में लगे 150 से अधिक मजदूर कोविड पाॅजिटिव भी हुए। फिर भी बांध के अधिकारियों का दावा है कि देश भर में केवल यही प्रोजेक्ट था, जहां कोविड में भी काम तेजी से हुआ। केवल 37 दिन ही काम पूरी तरह ठप रहा। प्रोजेक्ट की महत्ता को देखते हुए पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर संयम अग्रवाल ने गाइडलाइंस के साथ काम जारी रखने की अनुमति दे दी है।

फिर भी पावर हाउस तक नहर पहुंचाने का काम 91% पूरा : कमुयाल में तीन पावर हाउस 637 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जाएंगे। सोमा बरैया कपंनी को 688 करोड़ रुपए का कांट्रैक्ट दिया गया है जो बांध निर्माण करा रही है। पावर हाउस तक नहर पहुंचाने का 91 प्रतिशत से अधिक कार्य हो चुका है। पावर हाउस के लिए 400 करोड़ रुपए भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड की ओर से बिजली उत्पादन उपकरण इंस्टाल करने के लिए दिए जाएंगे। बैराज बांध 711 मीटर लंबा तथा 55.5 मीटर ऊंचा बन रहा है।

पंजाब व जेएंडके की 3200 एकड़ भूमि है अधिगृहीत

अब डैम की लागत 2715 करोड़ तय की गई है। बांध के लिए पंजाब व जेएंडके की 3200 एकड़ भूमि को अधिगृहीत किया गया है। इसी साल केंद्र ने एस्लरेटिड इरीगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (एआईबीपी) के तहत 135 करोड़ की ग्रांट जारी की है। सरकार ने निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर करने को कहा है। मार्च 2021 तक 70 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की गई है। 21 करोड़ की राशि पंजाब सरकार ने भी जारी की है।

5 फायदे...पानी पाक नहीं जाएगा तो बाढ़ की समस्या भी हल होगी

100% जल प्रबंधन होगा। रणजीत सागर डैम से 600 मेगावाट बिजली बनेगी। बांध से 206 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसमें से जेएंडके को 20 % मिलेगी।

बकाया भूमि मुआवजा और डैम औस्तीज को नौकरी पंजाब सरकार देगी। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की 37 हजार हेक्टेयर जमीन को पानी मिलेगा। बाढ़ की समस्या का समाधान होगा। डैम पर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

विवादों से नाता...1995 में नींव रखी, 2013 मंे शुरू हुआ काम डेढ़ साल बाद जेएंडके ने रुकवाया

1995 में नींव रखी गई। 2013 मंे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित होने के बाद निर्माण शुरू। 2300 करोड़ मंजूर हुए। निर्माण शुरू होने के डेढ़ साल बाद 2014 में जेएंडके सरकार ने काम रुकवाया। तर्क दिया कि एसवाईएल समझौते काे पंजाब नहीं मान रहा। सिंधु जल समझौते के इस प्रोजेक्ट का भी नहीं करेगा। बांध का फायदा पंजाब के साथ जम्मू रीजन को होना था। लिहाजा कश्मीर में विरोध था। डैम का लेबल बढ़ाने और मुआवजे की मांग की गई। 50 माह काम रुका। पीएमओ के दखल पर जेएंडके माना। डैम का लेबल 398 मी. करने व 2715 करोड़ की मंजूरी दी।

चिंता भी...प्रोजेक्ट मेें देरी से सालाना होगा 850 करोड़ का नुकसान

प्रोजेक्ट के जीएम एसके सलूजा का दावा है कि कोविड के कारण हुए विलंब काे कवर किया है जो एप्रिसिएट किया गया। दिसंबर 2022 तक डैम पूरा कर पानी रेगुलेट कर पाक जाना बंद कर दिया जाएगा। सितंबर 2024 तक पावर हाउस भी तैयार हो जाएगा। फिर बिजली उत्पादन हो सकेगा। किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट लेट होता है तो कम से कम 850 करोड़ सालाना का नुकसान होगा।

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