बेटा किसी की आंखों में जिंदा रहेगा:खुद को किडनी नहीं मिली लेकिन आंखें दान कर दूसरों को रोशनी दे गया 13 साल का आदित्य

पठानकोट6 महीने पहलेलेखक: शिवबरन तिवारी
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आदित्य। - Dainik Bhaskar
आदित्य।
  • जनवरी में आदित्य की बिगड़ी थी सेहत, 28 फरवरी को पीजीआई में दिखाया तो डॉक्टर बोले- किडनी खराब है

13 साल का आदित्य अपनी छोटी सी जिंदगी में बैसाखी के सहारे चला लेकिन अंतिम समय में बड़ा काम कर गया। कुछ समय से वह किडनी फेल्याेर के कारण बेड पर था। ट्रांसप्लांट के लिए उसे किडनी तो नहीं मिल सकी, लेकिन मरते वक्त वह दूसरों की जिंदगी के लिए रोशनी का इंतजाम कर गया। आदित्य ने अपनी मां राजकुमारी की प्रेरणा से अपनी आंखें दान कर दीं। बुधवार को उपरला मनवाल गांव में उसकी अर्थी उठी तो गांव के हर व्यक्ति की आंख में आंसू थे और रोते हुए भी उसकी मां राजकुमारी को संतोष था कि उसका बेटा किसी की आखों में जिंदा रहेगा।

मां बोलीं- उसका बेटा किसी की आंखों में जिंदा रहेगा

मनवाल के विकास तथा राजकुमारी का बेटा आदित्य बचपन से दिव्यांग था और वह बैसाखी के सहारे चलता था। सातवीं कक्षा में पढ़ाई भी कर रहा था। विकास दंपति के एक बेटा और एक बेटी थे। बेटी सानिया प्लस वन में पढ़ती हैं। इसी साल जनवरी में आदित्य एक दिन बेहोश हो गया। पठानकोट में जांच कराई तो पता चला किडनी खराब है। 28 फरवरी को चंडीगढ़ पीजीआई ले गए। हालत लगातार बिगड़ती गई। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट करने को कहा।

मां राजकुमारी ने रोते हुए बताया कि बेटा आदित्य कहता था कि कौन उसे किडनी देगा तो मां ने कहा वह किडनी देगी, लेकिन ट्रांसप्लांट नहीं हो सकी और दो-तीन दिन से हालत ज्यादा खराब हो गई। मंगलवार दोपहर 3 बजे आदित्य इस दुनिया से रुख्सत हो गया। इसके पूर्व जब डॉक्टरों ने मौत करीब बताई तो मां राजकुमारी ने उसकी आंखें दान करने की इच्छा जताई ताकि वह मरने के बाद भी किसी की आंखों में ही सही जिंदा रह सके। हैरानी की बात यह कि बेहोशी का हालत में मरने के करीब 13 साल के आदित्य ने भी इस पर सहमति दे दी। मौत के कुछ देर बाद आई बैंक के लोगों ने औपचारिकता पूरी की और आंखें किसी और को ट्रांसप्लांट करने के लिए ले लीं। बुधवार को सबेरे शव मनवाल लाया गया और दोपहर 12 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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