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आगे आएं समाजसेवी:लखनऊ से आई बुजुर्ग महिला कोरोना के बीच पठानकोट में फंसी, 1 माह से सिविल अस्पताल में बेंच पर काट रही दिन-रात, लोग दे जाते हैं खाना

पठानकोटएक महीने पहले
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सिविल अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के बाहर बेंच पर लेटी हुई बुजुर्ग महिला।
  • महिला को घर या वृद्ध आश्रम पहुंचाने के लिए आगे आएं समाजसेवी संस्थाएं
  • 1 माह से सिविल अस्पताल में बेंच पर काट रही है समय

एक बुजुर्ग महिला कोरोना महामारी के चलते सिविल अस्पताल पठानकोट की इमरजेंसी के सामने बेंच पर ही एक महीने से रह रही हैं। वह रात को भी वहीं सो जाती हैं। इस बुजुर्ग को देख आते-जाते लोग कई बार तो खाना तो दे देते हैं, लेकिन इस महिला ने कहां जाना है और कहां से आई है?

इस संबंधी किसी ने सुध नहीं ली है। देखने में बुजुर्ग महिला ठीक घर की लगती है। महिला ने अपने पास कपड़ों का बैग भी रखा है और हाथ पर घड़ी बांधी है। दिन के समय गत्ते या पंखी से हवा लेती है। बुजुर्ग महिला लखनऊ की रहने वाली बताती हैं।

आगे आएं समाजसेवी संस्थाएं

महिला बताती हैं कि वह लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से पठानकोट रिश्तेदार के घर आई है। लेकिन कोरोना के चलते पठानकोट में ही फंस गईं। पहले तो 10 से 12 दिन बारठ साहिब के आसपास रहीं और उसके बाद सिविल अस्पताल में आ गईं।

जब महिला से पूछा गया कि उसने जाना कहां है और आपका नाम क्या है। इस संबंधी महिला कुछ नहीं बताती। हालांकि, सेहत विभाग के कर्मियों ने पैसे देकर महिला को स्टेशन व बस स्टैंड पर भी भेजा लेकिन वहां से महिला फिर रिक्शा कर सिविल अस्पताल में पहुंच गईं और इमरजेंसी के बाहर लगे बेंच पर दिन के समय बैठ रहती हैं और रात को वहीं सो रही हैं।

ऐसे में स्थानीय लोगों ने कहा कि इस महिला को इसके घर तक और या वृद्ध आश्रम पहुंचाने के लिए समाज सेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए, ताकि बुजुर्ग महिला को उसके ठिकाने पर पहुंचाकर उनके घर वालों से मिलाया जा सके।

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