स्टाफ और अफसरों की कमी / बिना अफसर पठानकोट के दफ्तर, जनता के काम एडिशनल चार्ज के सहारे

Offices without officer Pathankot, with the help of the public, additional charge
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Offices without officer Pathankot, with the help of the public, additional charge

  • ट्रस्ट और निगम में पूरा स्टाफ न होने से लोगों के काम हो रहे प्रभावित, लगाने पड़ रहे चक्कर पर चक्कर
  • 8 साल पहले बने निगम को कभी फुल फ्लैश कमिश्नर नहीं मिला, कोई बिल्डिंग इंस्पेक्टर नहीं

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

पठानकोट. जिले के सरकारी विभागों में स्टाफ और अफसरों की बेहद कमी है। प्रशासकीय अफसरों, सेहत विभाग और लोकल बाडी ( नगर निगम और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट) के ज्यादातर अफसर एडीशनल चार्ज पर हैं और जनता के काम प्रभावित हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि इससे समझा जा सकता है कि पंजाब सरकार आम लोगों की समस्याओं को लेकर कितनी गंभीर है?गौर हो कि 8 साल पहले बने पठानकोट नगर निगम को कभी फुल फ्लैश कमिश्नर नहीं मिला, जिस कारण लोगों के काम प्रभावित रहे हैं।

मौजूदा समय में डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैहरा के पास निगम कमिश्नर का एडीशनल चार्ज है जो महीने में एक बार भी निगम नहीं आ पाते हैं। निगम के एडीशनल कमिश्नर सुरेंद्र सिंह को हाल ही में ट्रांसफर हुए एडीसी जनरल अभिजीत कपलिस का भी एडीशनल चार्ज दे दिया गया।

यही नहीं सुरेंद्र सिंह के पास एडीसी (ग्रिवेंसेज) पिरथी सिंह के ट्रांसफर हो जाने के बाद से उनका भी चार्ज है। निगम में एक्सईएन नहीं है जालंधर के एक्सईएन सुरजीत सिंह को बिना प्रमोशन ही पठानकोट निगम में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर का एडीशनल चार्ज दे दिया गया है जो यहां कम ही आते हैं।

निगम के एटीपी एसएस बिंद्रा का फरवरी में ट्रांसफर हो गया तो अब होशियारपुर के एटीपी को पठानकोट का एडीशनल चार्ज है जो कम ही आते हैं।

निगम के 3 बिल्डिंग इंस्पेक्टरों मोनिका मल्होत्रा, किरनदीप और रूपिंदर का फरवरी में ट्रांसफर हुआ तो अभी तक कोई बिल्डिंग इंस्पेक्टर नहीं है। निगम एकाउंटेंट राजन होशियारपुर के एकाउंटेंट हैं यहां एडीशनल चार्ज पर हैं व कभी-कभी ही आ पाते हैं।  

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट : एक्सईएन है नहीं, जेई के पास एसडीओ का चार्ज भी 

यही हाल इंप्रूवमेंट ट्रस्ट का है जहां के ईओ मनोज शर्मा का ट्रांसफर गुरदासपुर हो गया तो अब अमृतसर ट्रस्ट के ईओ हरिंदर सिंह चाहल को यहां का एडीशनल चार्ज दे दिया गया।

चाहल के पास तरनतारन ट्रस्ट का भी अतिरिक्त चार्ज है। अमृतसर जैसे बड़े ट्रस्ट का ईओ पठानकोट और तरनतारन के लिए कितना समय दे पाएगा। ट्रस्ट के एक्सईएन रबिंदरपाल सिंह काहलों का ट्रांसफर भी पिछले हफ्ते जालंधर किया गया अब ट्रस्ट में कोई एक्सईएन नहीं है।

निगम में जेई पद पर तैनात परमजोत सिंह को निगम एसडीओ तथा ट्रस्ट एसडीओ दोनों का अतिरिक्त चार्ज है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में पक्का क्लर्क नहीं है, एकाउटेंंट, ड्राफ्ट्समैन, सर्वेयर, ट्रेसर, कोर्ट क्लर्क पक्के नहीं है, सभी काम टेंपरेरी मुलाजिम देखते हैं।

सेहत विभाग : एसएमओ भूपिंद्र पर सिविल सर्जन की जिम्मेदारी भी

जिले के सेहत विभाग के सबसे बड़े पद सिविल सर्जन डॉ. विनोद सरीन का ट्रांसफर 26 जून को ही हुआ है, उसके पहले दबाव में आकर उन्होंने इस्तीफा भेज दिया था।

अब सिविल हास्पिटल के एसएमओ डॉ. भूपिंद्र सिंह को सिविल सर्जन का भी एडीशनल चार्ज सौंप दिया गया। इसके अलावा जिला स्तर के 130 बेड के पठानकोट सिविल हास्पिटल में 190 बेड डाले गए हैं जबकि एनेस्थीसिया, रेडियोलाजिस्ट और स्किन स्पेशलिस्ट एक भी नहीं है।

गायनी 4 चाहिए हैं 2, चाइल्ड स्पेशलिस्ट 4 चाहिए हैं 2, रेडियोलाजिस्ट 4 चाहिए एक भी नहीं है। ईएनटी 2 चाहिए केवल एसएमओ डॉ. भूपिंद्र सिंह हैं जिनके पास सिविल सर्जन का भी चार्ज है। इमरजेंसी के लिए मेडिकल अफसर 15 चाहिए हैं 8 और नर्सेज 52 चाहिए हैं केवल 32 हैं।

पुलिस में कोटा फुल :4 एसपी, 12 डीएसपी तैनात

8 साल पहले जिला बनने के बाद किसी विभाग में अफसरों का कोटा पूरा किया है तो वह है पुलिस विभाग। पठानकोट पंजाब के सबसे छोटे जिलों में (महज 3 विधान सभा हल्कों वाला) आता है।

अन्य जिलों की अपेक्षा क्राइम रेट भी कम है। ठीक भी है, अपराध खत्म करने और लोगों को सुरक्षा का अहसास दिलाना इसी विभाग की जिम्मेदारी जो है।

जिले में एसएसपी को सहयोग करने के लिए 4 एसपी (प्रभजोत सिंह, रमनीक चौधरी, हेमपुष्प शर्मा, मनोज कुमार) तथा 12 डीएसपी  तैनात है। 8 साल पहले जिला बनने के पहले तहसील पठानकोट में केवल एक एसपी और 2 डीएसपी (सिटी और ग्रामीण) की पोस्ट थी।

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