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कहां कितनी मिलेगी जमीन:कथलौर सेंक्चुरी की तर्ज पर शाहपुरकंडी बांध के एवज में 680 एकड़ एरिया में वन क्षेत्र होगा

पठानकोट13 दिन पहलेलेखक: शिवबरन तिवारी
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206 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा - Dainik Bhaskar
206 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा
  • विकसित, रोपड़, संगरूर, गुरदासपुर और अमृतसर में मिलेगी जमीन
  • पठानकोट- 173 एकड़, संगरूर-210 एकड़, रोपड़-200 एकड़, अमृतसर-65 एकड़, गुरदासपुर-28 एकड़
  • तीन साल पहले शाहपुरकंडी परियोजना में ली गई थी वन विभाग की जमीन

तीस साल पहले बने रणजीत सागर बांध परियोजना में गई फारेस्ट की जमीन और जंगल कटने के एवज में 1896 एकड़ में पाकिस्तान बार्डर के साथ विकसित किया जंगल अब वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी घोषित हो चुका है। कथलौर सेंक्चुरी राज्य का वन क्षेत्र बढ़ाने में सफल प्रोजेक्ट साबित हुआ है।

अब इसी तर्ज पर राष्ट्रीय प्रोजेक्ट शाहपुरकंडी बैराज बांध के एवज में (कंपेंसेटरी एफारेस्टेशन) 680 एकड़ एरिया में वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा जिसके लिए पठानकोट के अलावा रोपड़, संगरूर, अमृतसर, गुरदासपुर में वन विभाग को जमीन एलाट की जा रही है।

2715 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा बांध, 2023 में होगा तैयार

शाहपुरकंडी में रावी दरिया पर 2715 करोड़ की लागत से 711 मीटर लंबा तथा 55.5 मीटर ऊंचा बांध बन रहा है जिसे केंद्र सरकार ने नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया है। 2023 में बांध बनकर पूरा होगा। 33 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

शाहपुरकंडी बांध बनने के बाद पानी को पाकिस्तान जाने से रोका जा सकेगा

रावी का पानी पाकिस्तान जाने से पूरी तरह रोका जा सकेगा। बांध के साथ बड़ा एरिया झील का रिजर्वर बनेगा। प्रोजेक्ट में 680 एकड़ जमीन वन विभाग की गई है। फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 के मुताबिक कंपेंसेटरी एफारेस्टेशन के तहत इतनी ही जमीन एरिया के तहत लाई जानी होगी जिस पर जंगल तैयार कर उसे प्रोटेक्टेड फारेस्ट घोषित किया जाएगा।

पठानकोट के डीएफओ रहे डा.संजीव तिवारी की ओर से जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हुई थी जो अब पूरी होने वाली है। इन जमीनों पर जंगल तैयार कर उसे प्रोटेक्टेड फारेस्ट भी घोषित किया जाएगा।

पर्यावरण मंत्रालय को भेजी कथलौर सेंक्चुरी की सक्सेस स्टोरी

रणजीत सागर बांध में जमीन जाने पर कथलौर में 1896 एकड़ में जंगल तैयार किया गया। जिसमें कथलौर की 1550 एकड़ तथा कौशल्यां की 346 एकड़ जमीन है जिसे 2007 में वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी घोषित कर दिया गया।

पिछले महीने ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की मांग पर जिले के वन महकमे ने कथलौर सेंक्चुरी की सक्सेज स्टोरी भेजी है जिसके मुताबिक सेंक्चुरी में हजारों की संख्या में खैर, आंवला, शीशम, कीकड़, बांस, अमरूद, सफेदे के पेड़ हैं जहां बड़ी संख्या में हाग डीयर, बार्किंग डीयर, सांभर, चीतल, नीलगाय, अजगर, जंगली सूअर, पैंगोलियन, मोर, कई वैरायटी के तोते व अन्य जीव हैं। सेंक्चुरी के बीच से रावी दरिया बहती है जिससे जंगली जीवों और पक्षियों के लिए स्वाभाविक रूप से पीने का पानी उपलब्ध होता है।

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