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स्मृति शेष:सियासत के माहिर अनिल विज का लीवर डैमेज से 69 की उम्र में निधन, भाजपा के 3 पार्षद तोड़ बनाई थी कांग्रेस की नगर कौंसिल

पठानकोट8 महीने पहले
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अनिल विज - Dainik Bhaskar
अनिल विज
  • 3 बार जीते थे पार्षद चुनाव, तीन साल रहे जिला कांग्रेस प्रधान, 3 महीने से बीमार थे अनिल विज

पठानकोट के विधायक अमित विज के पिता अनिल विज (69) का मंगलवार तड़के निधन हो गया। नगर कौंसिल और जिला कांग्रेस के पूर्व प्रधान रहे अनिल विज सियासी खेल के इतने माहिर थे कि विरोधी भाजपाई भी उनका लोहा मानते थे। जिला और प्रदेश की शख्सियतों ने अनिल विज के निधन पर शोक जताते हुए इसे बड़ी क्षति बताया। अनिल विज 3 महीने से लीवर की बीमारी से पीड़ित थे। विधायक के पिता की बजाय उनकी अपनी दबंग पहचान थी।

यूथ कांग्रेस से सियासी सफर शुरू कर 1997 से 2008 तक 3 बार कांग्रेस से पार्षद चुनाव जीते और 2008 में ए क्लास की पठानकोट नगर कौंसिल अध्यक्ष चुने गए। उनका अध्यक्ष बनना पठानकोट की राजनीति में बड़ी घटना थी। क्योंकि, कांग्रेस में 2 गुट थे। कुछ लोगों का समर्थन गोपाल महाजन के साथ था। भाजपा के मास्टर मोहन लाल विधायक और मंत्री थे। अनिल विज ने ऐसी व्यूह रचा कि अध्यक्ष चुनने के लिए स्विमिंग पूल हाल में हुई मीटिंग से जब सभी बाहर निकले तो अध्यक्ष की माला अनिल विज के गले में थी।

उनके विरोधी गुट के माने जा रहे रमेश टोला व अन्य नेता उनके समर्थन में नारे लगाते निकले। गोपाल को 11 और अनिल विज को 14 वोट मिले थे। भाजपा वाकआउट कर गई थी और उसके 3 पार्षद मान सिंह, कमल की पत्नी और गुलशन ने अनिल को वोट दिया था। अकाली-भाजपा राज में पठानकोट एक मात्र कांग्रेसी कौंसिल बनी। वे 3 साल 8 महीने कौंसिल प्रधान रहे। 2014 में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बने और 2017 का चुनाव उन्हीं के अध्यक्ष रहते लड़ा गया।

पठानकोट से कांग्रेस टिकट उनके बेटे अमित विज को मिला और वे जीते। एक और बात के लिए उनके विरोधी भी तारीफ करते थे। 2017 चुनाव के पहले राहुल गांधी ने सभी जिलाध्यक्षों का फीड बैक लिया। कैप्टन अमरिंदर के सीएम के तौर पर जमीन तैयार की जा रही थी। पर कैप्टन के सामने अनिल ने प्रताप बाजवा का पक्ष लिया।

कैप्टन के नाराज होने की परवाह नहीं की। हमेशा उनका स्टैंड क्लियर रहा, जिसके पक्ष में खड़े हो गए। नफा-नुकसान नहीं देखा। 2011 में उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल की रैली में विज ने कांग्रेस कौंसिल का पक्ष जोरदार ढंग से रखा और करोड़ों की ग्रांट दिलाई। शहर के मोहल्ला घरथौली में पैदा हुए अनिल ने धीरे-धीरे खुद को और परिवार को शहर की प्रमुख हस्ती के तौर पर स्थापित किया। बेटे अमित को एमएलए बनाने की जमीन भी तैयार की थी।

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