यज्ञ एवं गीता पाठ:सनातन धर्म पथ परिषद ने गीता जयंती पर यज्ञ करवाया, बताई ग्रंथ की महत्ता

पठानकोटएक महीने पहले
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  • भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि जो व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करता है धर्म पर स्थिर नहीं रहता वह सात जन्म तक नर्क गामी होता है

गीता जयंती मोक्षदा एकादशी के शुभ पर्व पर सनातन धर्म पथ परिषद के द्वारा सैली रोड स्थित श्री बगलामुखी के पवित्र स्थान में मिथिलेश शास्त्री के सानिध्य में आचार्य सत्यपाल के द्वारा हवन यज्ञ एवं गीता पाठ करवाया। इसमें प्रकांड विद्वानों ने हिस्सा लेते हुए संदेश दिया कि गीता ग्रंथ विश्व में सर्वोपरि ग्रंथ है घर में इसका पूजन पाठ करने से घर में शांति होती है धनधान्य की वृद्धि होती है अनेका अनेक कष्टों की निवृत्ति होती है। यह ग्रंथ भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं श्रीमुख से कहा है हालांकि विश्व में अनेक ग्रंथ हैं लेकिन जो संदेश गीता से प्राप्त होता है वह किसी संप्रदाय धर्म या ग्रंथ से नहीं मिलता।

गीता मोक्ष को देने वाली है यह शाश्वत सत्य है। भगवान श्री कृष्ण ने धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। धर्म पर अटल रहना यह सबसे बड़ा पुण्य है, सबसे बड़ी भक्ति है व सबसे बड़ा दान है। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि जो व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करता है धर्म पर स्थिर नहीं रहता वह सात जन्म तक नर्क गामी होता है। इसलिए अपने धर्म की रक्षा के लिए चाहे कुछ भी करना पड़े करना चाहिए। यहां पर अखिल भारतीय सनातन धर्म पथ परिषद के संस्थापक राकेश शास्त्री, केंद्र प्रधान आचार्य सतीश शास्त्री, वरिष्ठ सरपरस्त मिथिलेश शास्त्री, मंगल शास्त्री, कोषाध्यक्ष श्याम लाल, रवि कुमार, सुरेंद्र कुमार व अन्य मौजूद थे।

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