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जन्म दिन:राहों में बाबा बंदा सिंह बहादुर का जन्म दिन मना दोआबा स्तरीय रैली में किसानों ने भरी हुंकार, बोले- दिल्ली में बैठे मोदी को सिखाएंगे सबक

राहोंएक महीने पहले
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किसानों की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ छेड़े गए संघर्ष के तहत बाबा बंदा सिंह बहादुर के 350वें जन्म दिवस को समर्पित दोआबा स्तरीय रैली स्थानीय दशहरा मैदान में आयोजित की गई। किरती किसान यूनियन व यूथ विंग किरती किसान यूनियन द्वारा आयोजित इस रैली के दौरान किसान नेताओं ने बार-बार इसी बात का जिक्र किया कि जैसे बाबा बंदा सिंह बहादर ने सूबा सरहिंद की ईंट से ईंट खड़काई थी, उसी तरह किसान भी दिल्ली तख्त पर बैठी भाजपा सरकार की ईंट से ईंट खड़काने के लिए तैयार हैं। यहां आयोजित दोआबा स्तरीय रैली में जिला शहीद भगत सिंह नगर के अलावा जालंधर, कपूरथला व होशियारपुर से किसान शामिल हुए।

रैली को यूनियन के प्रदेश नेता हरमेश सिंह ढेसी, जिला प्रधान सुरिंदर सिंह बैंस, जिला जालंधर के प्रधान संतोख सिंह संधू, जिला होशियारपुर के प्रधान जगतार सिंह भिंडर, जिला कपूरथला के प्रधान बलविंदर सिंह भुल्लर ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र की फासीवादी मोदी सरकार ने देश के किसानों की जमीनें उनसे छीन कर कार्पोरेटरों के हवाले करने के लिए साजिश के तहत कृषि कानून पास किए हैं। यही नहीं मोदी सरकार किसी भी फैसले को वापस न लेने की बातें करके किसानों मुंह चिढ़ा रही है, ऐसे में बाबा बंदा सिंह बहादर द्वारा बताया गया रास्ता किसानों ने अपना लिया है।

इसलए किसानों के मौजूदा संघर्ष को खंडे की धार जैसा तीखा करने की जरूरत है। हालांकि किसान संघर्ष को तबाह करने के लिए समय की सरकारों द्वारा साजिशें घड़ी जा रही हैं, जिसके लिए किसानों को सुचेत रहना चाहिए। संघर्ष को तेज करने के लिए किसान संगठनों की एकता, संघर्ष की धार को तीखा करने, संघर्ष का देशव्यापी फैलाव, भातृ संगठनों का सहयोग ही मोदी सरकार को घुटनों के बल गिरा सकता है। इस दौरान कमलजीत सणावा, भूपिंदर वड़ैच, तरनजीत सिंह, गुरपाल सिंह, तरसेम सिंह बैंस, कुलविंदर चाहल, मक्खण सिंह ने संबोधित किया।

राहों से जुड़ा है बाबा बंदा सिंह का इतिहास
एतिहासिक कस्बा राहों का बाबा बंदा सिंह बहादर के साथ ऐतिहासिक नाता है। साल 1710 में बाबा बंदा सिंह बहादर व सेना ने राहों में मुगल सेनाओं के साथ जंग लड़ी थी। अक्टूबर से संबंधित इस ऐतिहासिक लड़ाई से सीख लेने व बाबा बंदा सिंह बहादर के किसानों को जमीनों के मालिकाना हल लेकर देने के इतिहास को जिंदा रखते हुए इस हक को बरकरार रखने के लिए और किसानों में संघर्ष का नया जज्बा फूंकने के उद्देश्य से किसानों द्वारा राहों में यह रैली की गई है।

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