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व्यापार फीका:रक्षा बंधन पर कोरोना का साया, बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं

रोपड़एक दिन पहले
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  • आज प्रशासन ने दुकानें खोलने की दी छूट, खरीदारी के लिए घर से अधिक गिनती में निकल सकते हैं लोग
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(मूनप्रीत सिंह) कोरोना वायरस की चपेट में आ जाने के कारण रक्षा बंधन पर इस बार व्यापार फीका है। आम दिनों में रक्षा बंधन से कुछ दिन पहले ही लोगों की चहल-पहल बाजारों में शुरू हो जाती थी। बाजार भी पूरी तरह सजे होते थे। मिठाई विक्रेता भी तैयारी कर लेते थे। इस बार गत वर्षों के मुकाबले बाजार में रौनक काफी कम है।

जबकि राखी के त्योहार में सिर्फ आज का दिन ही शेष है। प्रशासन ने रविवार को भी दुकानें खोलने की परमिशन दी है। इस दौरान लोग खरीदारी के लिए निकल सकते हैं। दुकानदारों ने बताया कि इस बार राखी का त्योहार कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया। इस बार सामान की बिक्री गत वर्षों के मुकाबले काफी कम रही। राखी विक्रेता चरनजीत सिंह भाटिया ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते चाइना की राखी न आने पर इंडियन राखियां बिक रही हैं, जाे रुपए से शुरू होकर 300 रुपए तक की हैं। जिसमें एडी नग वाली राखी, कुंदन, पर्ल वर्क, मैटेलिक, एनटिक वर्क और बच्चों की टैडी, लाइट वाली राखी ही ज्यादा बिक रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राखी का त्योहार एक महीना पहले शुरू हो गया था, क्योंकि लोग विदेशों में रहते अपने परिवारों को राखियां भेजते थे, लेकिन इस बार लोगों ने विदेशों में राखियां कम भेजी हैं। सुनियार संजय वर्मा बेले वाले ने बताया कि इस बार चांदी का रेट मंहगा है और लोग चांदी की राखियों की बजाय ब्रैसलेट खरीद रहे हैं, ताकि वह बाद में भी पहना जा सके। उन्होंने कहा कि चांदी की राखी 350 रुपए से 1000 रुपए तक की है और ब्रैसलेट 1000 रुपए से 4000 रुपए तक का है और कोरोना के चलते कारोबार कम हो रहा है। चूड़ी बाजार में राखी विक्रेता साैरव जैन तथा गौरव जैन ने बताया कि इस बार कोरोना महामारी के कारण चाइनीज माल न आने से उनके पास इंडियन राखियां ही हैं, जिनमें ब्रेसलेट, धागे, सिंगल राखियां, बच्चों के लिए अलग-अलग तरह की राखियां आदि हैं। इस बार सबसे अधिक भाबियों के लूंबे की अधिक बिक्री हुई है। उन्होंने बताया कि लोगों में ज्यादा क्रेज चाइनीज राखियों का है।

इसी तरह बबलू राखी भंडार के मालिक बबलू ने बताया कि चाइनीज माल न आने से राखी की बिक्री कम ही हुई है। उनके पास 20 रुपए से लेकर 700 रुपए तक की राखियां मौजूद हैं। इस बार लेडीज लूंबे, ऐडी आरा की बिक्री ज्यादा हो रही है। जो इंडिया की बनी हुई हैं। लेकिन लोग चाइनीज राखियों की ज्यादा डिमांड कर रहे हैं। इस बार कोरोना महामारी के चलते उनकी सेल गत वर्षों के मुकाबले कम ही हुई है। जिससे उन्हें नुकसान भी हुआ है।

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