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प्रदर्शन:ढाई घंटे नेशनल हाईवे जाम कर किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

रोपड़8 दिन पहले
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  • कृषि आर्डिनेंस को रद्द करवाने के लिए सिंघ भगवंतपुरा के चौक पर धरना

(भास्कर न्यूज) किसान जत्थेबंदियों ने केंद्र सरकार के कृषि आर्डिनेसों को रद्द करवाने के लिए मंगलवार को नेशनल हाईवे पर धरना दिया। गांव सिंघ भगवंतपुरा के चौक पर करीब ढाई घंटे लगाए धरने में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि 25 सितंबर को चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय धरना देकर मोदी सरकार से आर्डिनेंस तुरंत वापस लेने की मांग की जाएगी।

धरने के दौरान जिला पुलिस ने पुलिस लाइन से ही चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहनों को बाया मोरिंडा की तरफ भेजा और चंडीगढ़ से आने वाले वाहनों को कुराली से ही बाया मोरिंडा से रोपड़ के लिए भेजा गया।

धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के महासचिव परमिंदर सिंह चलाकी, भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के जिला अध्यक्ष कुलविंदर सिंह, राजेवाल के गुरमेल सिंह वाड़ा, कादियां यूनियन के गुरनाम सिंह जसड़ा, लखोवाल यूनियन के चरन सिंह मुडिया ने कहा कि केंद्र सरकार खेती से जुड़े तीनों आर्डिनेंस किसान उपज व्यापार और (तरक्की व सुविधा) आर्डिनेंस 2020, किसान (एंपायरन व सुरक्षा) समझौते पर मूल्य का बीमा और फार्म सेवाओं आर्डिनेंस 2020 और जरूरी बातें (संशोधन) आर्डिनेंस केंद्र सरकार ने जारी किए हैं।

किसान नेता बोले-खेती आर्डिनेंस से मजदूर बनकर रह जाएंगे किसान

किसान नेताओं ने कहा कि इन आर्डिनेंस के मुताबिक फसल देश में किसी भी व्यक्ति या संस्था को बेचने की इजाजत होगी। किसान अपना प्रोडक्ट खेत में या व्यापारिक प्लेटफॉर्म पर देश में कहीं भी बेच सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसानों का नुकसान होगा। सबसे बड़ा डर मंडी एक्ट के प्रभाव को सीमित करने वाले आर्डिनेंस को लेकर है।

इसके जरिए राज्यों के मंडी एक्ट को सिर्फ मंडी तक ही सीमित कर दिया गया है। यानी अब कहीं पर भी फसलों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी। बस फर्क इतना होगा कि मंडी में खरीद-बिक्री पर मंडी शुल्क लगेगा जबकि बाहर शुल्क से छूट होगी। उन्होंने कहा कि सरकार के इन आर्डिनेंस से मंडी बोर्ड खत्म हो जाएगी और कॉरपोरेट को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि इसके जरिये कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनियां खेती करेगी और किसान मजदूर बनकर रह जाएगा। उसके सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी। किसान नेताओं ने कहा कि मंडी व्यवस्था खत्म होने से व्यापारियों की मनमानी और बढ़ जाएगी। वे औने-पौने दाम पर किसानों की फसल खरीदेंगे क्योंकि किसानों के पास कोई विकल्प नहीं होगा।

यूनियनों के मुताबिक इस कानून की सबसे बड़ी खामी है कि इसमें व्यापारी या कंपनी और किसान के बीच विवाद होने पर पहले एसडीएम और बाद में जिलाधिकारी मामले को सुलझाएंगे। इसमें कोर्ट जाने की व्यवस्था नहीं है। धरने में तलविंदर सिंह, मेहर सिंह, परगट सिंह, रूपिंदर सिंह रूपा भी शामिल थे।

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