रोपड़ / सोशल डिस्टेंस भूले नेता, 200 लोग धरने में हुए जमा

Forgotten social distance leader, 200 people gathered in protest
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Forgotten social distance leader, 200 people gathered in protest

  • श्रम कानून में किए जा रहे संशोधन के विरोध में ट्रेड यूनियनों व मुलाजिम फेडरेशनों का प्रदर्शन

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

रोपड़. ट्रेड यूनियनों व मुलाजिम फेडरेशनों के आह्वान पर केंद्र की सरकार व विभिन्न राज्यों की भाजपा व कांग्रेस की सरकारों द्वारा श्रम कानूनों में की जा रहे संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। धरने में 200 से भी अधिक लोग पहुंचे हुए थे और नेताओं में सोशल डिस्टेंस नहीं रखा। जबकि सरकार की तरफ से चौथे लॉकडाउन में गाइडलाइन जारी की गई है कि 18 मई से 31 मई तक किसी भी तरह की भीड़ एकत्र नहीं की जा सकती।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी तहसीलदार कुलदीप सिंह को मांगपत्र दिया। भीड़ एकत्र होने संबंधी मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि रोष धरने संबंधी जांच की जाएगी और बनती कार्रवाई की जाएगी। 

श्रम कानून तोड़कर 12 घंटे काम और वेतन में कटौती का किया विरोध

इस मौके पर पहुंचे केंद्रीय ट्रेड यूनियन व मुलाजिम फेडरेशन के नेता गुरदेव सिंह बागी (सीटू), वेद प्रकाश, राज कुमार तिवारी, राज्य अध्यक्ष इंटक सुखदेव सिंह, आशा वर्कर नेता सुरजिंदर कौर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और विभिन्न राज्यों की भाजपा व कांग्रेस की सरकारों की द्वारा श्रम कानूनों में किए जा रहे मजदूर विरोधी संशोधन, लोक विरोधी व राष्ट्र विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया गया है। पंजाब के मजदूरों की कम से कम मजदूरी में 8 साल से संशोधन नहीं किया गया। पिछली बार यह संशोधन सितंबर 2012 में किया गया था।  नेताओं ने रोष जताया कि श्रम कानून को तोड़ कर रोजाना 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने का नोटीफिकेशन किया जा रहा है। कर्फ्यू के दौरान मजदूर-मुलाजिमों को ड्यूटी से हटाया जा रहा है और वेतन में कटौती की जा रही है। कोविड-19 विरुद्ध फ्रंट लाइन पर लड़ रहे मजदूर, मुलाजिम, ट्रांसपोर्टर वर्कर, आशा वर्करों समेत अन्य विभागों में कार्य करते मुलाजिमों को मेडिकल किटें तक नहीं दी गई।

ये हैं यूनियनों की मांगें 

कम से कम उजरत 21 हजार रुपए प्रति महीना की जाए और संशोधन सितंबर 2017 से लागू हो। 1 मई से जारी डीए संबंधी  नोटीफिकेशन लागू किया जाए और 9 मई 2020 को जारी किया नोटीफिकेशन वापस लिया जाए। श्रम कानून में किए जा रहे मजदूर विरोधी संशोधन वापस लिए जाएं। काम का समय 12 घंटे करने का नोटिफिकेशन वापस लिया जाए। डीए जाम करने का फैसला वापस लिया जाए। कर्फ्यू के कारण किसी भी मजदूर को ड्यूटी से नहीं हटाया जाए और वेतन व किसी भी तरह की सु‌विधा में कटौती नहीं होनी चाहिए। कोविड-19 विरोध फ्रंट लाइन पर लड़ने वालों को पीपीई किटों समेत 50 लाख रुपए का बीमा दिया जाए। ठेकेदारी पर काम करते वर्करों को पक्का किया जाए और प्रवासी मजदूर कानून 1979 को मजबूत किया जाए। घर वापस जाने वाले मजदूरों के लिए योग व मुफ्त सफर का प्रबंध किया जाए। मनरेगा मजदूरों को 200 दिन का काम दिया जाए। श्रम कानून में संशोधन से पहले ट्रेड यूनियनों के नेताओं के साथ मीटिंग की जाए।

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