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भाखड़ा में नकली रेमडेसिविर फेंकने वाले 6 गिरफ्तार:किंगपिन बोला- मेरी दवा से किसी को नुकसान नहीं हुआ, ट्रायल के बाद नतीजे अच्छे आए, फिर मैंने ये धंधा आगे बढ़ाया

रोपड़एक महीने पहले
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  • नकली इंजेक्शन पंजाब समेत पानीपत, रेवाड़ी, पंचकूला, यूपी और दिल्ली में बेचे गए
  • नहर से मिले नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में बड़ा खुलासा
  • एक माह में 5 करोड़ के इंजेक्शन बेच डाले, 2 करोड़ कैश बरामद

एक महीने पहले भाखड़ा नहर में तैरते मिले सैकड़ों नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में पुलिस ने किंगपिन समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनसे 2 करोड़ रुपए कैश और 4 कारें भी बरामद की हैं। नकली इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली पैकिंग सामग्री भी मिली है।

आरोपियों की पहचान किंगपिन मोहम्मद शाहवार निवासी मुजफ्फरनगर यूपी, अरशद खान निवासी बागपत यूपी, मोहम्मद अरशद सहारनपुर यूपी, प्रदीप सरोआ कुरुक्षेत्र, शाहनजर व शाह आलम हाल निवासी बहलोलपुर मोहाली के रूप में हुई। पुलिस ने इन सभी को आईपीसी की धारा 188, 278, 468, 103 व एपीडैमिक डिसीज एक्ट समेत कई धाराओं में नामजद किया है। इन लोगों ने नकली इंजेक्शन पानीपत, रेवाड़ी, पंचकूला के अलावा पंजाब, दिल्ली और यूपी में भी बेचे हैं।

पुलिस द्वारा गठित एसआईटी ने एक माह में मामले का खुलासा कर दिया। धंधे के मास्टरमाइंड ने बताया कि इस इजेक्शन से किसी को नुकसान नहीं हुआ। मैंने ट्राॅयल किया था, जिसके नतीजे अच्छे आए थे। डिमांड भी खूब थी इसलिए धंधे को आगे बढ़ाया।

पुलिस ऐसे पहुंची मास्टरमाइंड तक...नहर से मिले इंजेक्शन में था चंडीगढ़ का पता
रोपड़ पुलिस द्वारा बनाई गई एसआईटी ने दवाइयों पर जो पता था वह चंडीगढ़ के मलोया का दिया गया था, वहां पर पुलिस ने दबिश दी। यहां 10 महीने पहले ही शाहवर ने सनबैट फार्मा के नाम से मार्केटिंग के लिए एक फर्म रजिस्टर्ड करवाई थी, जिसके लिए वह दवाइयां कालाअंब से पिपराटैजो के एंटीबायोटिक मंगवाता था। यहीं पर लेवल उतार कर रेमडेसिविर के लेबल लगाया जाता था। यहीं से पता चला कि उसके 2 साथी शाहनजर और शाहआलम हाल निवासी बहलोलपुर में रहते हैं। सबसे पहले उन्हें पकड़ा। फिर पुलिस मोहम्मद अर्शद और मोहम्मद शाहवर तक पहुंची।

किंगपिन का कबूलनामा... 100 रुपए में खरीदकर 3 से 4 हजार में बेच देता था
मुजफ्फरनगर के गांव खुड्‌डा का मास्टरमाइंड मोहम्मद शाहवर सबसे बड़ा सप्लायर था। हरियाणा के रेवाड़ी का सत्नारायण व पानीपत का प्रदीप भी शाहवर से ही रेमडेसिविर की सप्लाई लेते थे। शाहवर 5 साल से दवाइयों की मार्केटिंग कर रहा था और यह बीएससी एमएलटी (मेडिकल लैब टैक्नीशियन) में की हुई है।

यह पहले कालाअंब स्थित फर्म में काम करता था। कोरोनाकाल में ही करीब 10 महीने पहले ही इसने चंडीगढ़ स्थित मलोया में फर्म रजिस्टर्ड करवा कर कालाअंब से 1 नंबर में पिपराटैजो एंटीबायोटिक इंजेक्शन मंगवाता था और आगे सप्लाई करता था। जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो रेमडेसिविर की डिमांड बढ़ गई।

इस पर इसने रेमडेसिविर के नकली लेवल तैयार करवा कर एंटीबायोटिक दवाइयों पर लगवाने शुरू कर दिए और इसकी सप्लाई हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, यूपी, दिल्ली में करने लगा। कोरोना की दूसरी पीक में करीब एक महीने के दौरान इसने अकेले रेमडेसिविर का ही 5 करोड़ का बिजनेस किया। उसने यह खुद कबूल किया है। ये लोग 1 नकली रेमडेसिविर का टीका 3 से 4 हजार रुपए के बीच बेचते थे।

मोहम्मद शाहवर ने कहा कि देश में इस दवाई की डिमांड ज्यादा थी, जिसके कारण वह लेवल बदल कर यह दवाई बेचने लगे। पानीपत, रेवाड़ी, पंचकूला में यह इंजेक्शन बेचे गए हैं। मैंने एंटीबायोटिक का प्रयोग किया था। इससे किसी की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता। इससे नतीजा अच्छा आया। पहले मैंने ट्रायल भी किया था। उसके बाद ही मैंने आगे इसे बढ़ाया। मोहम्मद शाहवर को छोड़ कर बाकी आरोपी ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हैं।

इसलिए फेंक दी थी दवाएं...साथी पकड़े गए तो डर गया था शाहवर
किंगपिन शाहवर ने बताया कि जब धंधे से जुड़े हरियाणा में 2 लोग पकड़े गए और दिल्ली पुलिस ने भी सख्ती की तो डर से सभी दवाइयां भाखड़ा नहर में फेंक दी और खुद फरार हो गया था। हम सभी पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं। शाह नजर और शाह आलम दोनों सगे भाई हैं।

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