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करंट है, उजाला नहीं:4461 स्ट्रीट लाइट में से 2000 से ज्यादा खराब, कई जगह 8 वॉट के बल्ब लगाए, रोशनी रोड तक नहीं पहुंचती

रोपड़8 महीने पहले
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  • शहर के एलआईजी फ्लेट्स में तो एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही

नगर कौंसिल रोपड़ के अधीन आते शहर और अन्य क्षेत्र में 4461 स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। इसमें से आधी बंद हैं। शहर के भीतर 30 फीसदी लाइटें बंद हैं। बाहरी कालोनियों जिनमें गौशाला रोड, मिनी बाईपास, सरहिंद नहर की पटड़ी, रैलों रोड, आदर्श नगर आते हैं, में लाइटें लगी होने के बावजूद अंधेरा रहता है।

शहर के ज्ञानी जैल सिंह नगर, मल्होत्रा कालोनी, गार्डन कालोनी, हरगोबिंद नगर, न्यू हरगोबिंद नगर, माधो दास कालोनी, दशमेश नगर, प्यारा सिंह कालोनी में तो स्ट्रीट लाइटों पर बेलें चढ़ गई हैं। वहीं शहर के एलआईजी फ्लेट्स में एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही। मिनी सचिवालय के बाहर लगी स्ट्रीट लाइट पर मेंटीनेंस न होने से जाला और मिट्‌टी जम गई है।

हालांकि नगर कौंसिल यह स्वीकार नहीं करता कि इतनी बड़ी संख्या में लाइट्स खराब हैं। अधिकारियों का मानना है कि कुछेक लाइटें जरूर खराब हैं जो मेंटिनेंस प्रक्रिया का हिस्सा हैं और जल्द ही ठीक करवा दी जाएंगी। लेकिन लाइटों पर लिपटी बेलें प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती हैं। इन्हें देखकर नहीं लगता कि इन पोलों की तरफ कभी ध्यान दिया गया हो। कई लाइट पर मिट्‌टी की परत जमी है। ऐसी लाइट के जलने का फायदा नहीं मिल पा रहा है क्योंकि इनकी लाइट डिम होने के चलते रोड दिखाई नहीं देता।

शहर में कई जगह पोल गड़े हैं लेकिन लाइट नहीं लगी

भास्कर टीम ने जब शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाकर स्ट्रीट लाइट्स की हकीकत जानी तो पाया कि ज्ञानी जैल सिंह नगर रिहायशी एरिया को छोड़कर बाकी शहर में करीब 50 फीसदी स्ट्रीट लाइट्स बंद पड़ी थीं। किसी में बल्ब नहीं था तो किसी को बेल ने ढक लिया था।

बहुत सी जगहों पर नगर कौंसिल ने इंजीनियरिंग का कमाल दिखाते हुए 8-8 वाट के एलईडी बल्ब लगा दिए हैं। इनकी रौशनी सड़क तक नहीं पहुंच पा रही है। रैलों रोड पर डीएवी स्कूल चौक से लेकर बाईपास तक करीब 55 से 60 लाइट लगी हैं। इनमें से 18 ही जलती पाई गईं। एक पोल ऐसा भी था जिसकी बत्ती तो जल रही थी लेकिन इसे बेल ने ढक लिया था।

वहीं हरगोबिंद नगर, मल्होत्रा कालोनी, दशमेश नगर, किड्जी स्कूल रोड तो अंधेरे में रहता है। मल्होत्रा कालोनी और गार्डन कालोनी में देखा गया कि यहां पर 27 के करीब लाइट लगी हुई हैं। इनमें से सिर्फ 9 ही जल रही थीं। 17 मेंटीनेंस को तरस रही हैं। वाल्मीकि आश्रम मार्ग से पुल तक 20 के करीब स्ट्रीट लाइट लगी हैं। इनमें से 5 लाइट बंद थीं और बाकी की जल रही थीं।

ज्ञानी जैल सिंह नगर से सांघा अस्पताल तक कुल 15 स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं। इनमें से 3 बंद मिलीं। वहीं ज्ञानी जैल सिंह नगर में बने शोरूम व फ्लेट्स के पीछे नगर सुधार ट्रस्ट द्वारा इसे आबाद करने के समय सुरक्षा के मद्देनजर स्ट्रीट लाइट लगाई जानी थीं, लेकिन तब से अब तक यहां पर पोल ही खड़े हैं लाइट नहीं लगी। मिनी बाईपास मार्ग पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं चल रही। इसी तरह रोपड़ के बीचों-बीच रोड पर लगी करीब 40 स्ट्रीट लाइट्स में से करीब 13 बंद मिलीं। रोपड़ नगर कौंसिल के अंतर्गत 4461 स्ट्रीट लाइट्स सहित 269 नए प्वाइंट लगे हैं। इन नए प्वाइंट के अभी तक कनेक्शन नहीं हो पाए हैं। यह कनेक्शन जल्द लगाए जाने की बात कही जा रही है। एक साल में 5 लाख रुपए स्ट्रीट लाइटों की मेंटीनेंस के लिए बजट में रखा जाता है।

जबकि 4 लाख 50 हजार रुपए मेंटीनेंस पर खर्च आ जाता है। नगर कौंसिल खुद स्ट्रीट लाइट्स को मेनटेन करती है। इसलिए आउटसोर्स के माध्यम से 12 मुलाजिम रखे गए हैं। इनकी सैलरी पर करीब 18 लाख 96 हजार रुपए एक साल में खर्च होता है। नगर कौंसिल के अधिकारियों के अनुसार पूरे शहर की लाइटें जल रही हैं। मात्र 40 से 50 लाइटें ही बंद होंगी। हर माह इन स्ट्रीट लाइटों का करीब 10 लाख रुपए बिल आता है।

सरकारी जवाब : लाइटें ठीक करवा रहे हैं, बल्ब भी बदले जा रहे: ईओ

नगर कौंसिल के ईओ भजन चंद ने बताया कि शहर में बंद स्ट्रीट लाइट्स को मुलाजिम भेजकर ठीक करवाया जा रहा है। वहीं जहां पर बल्ब खराब हैं उन्हें भी बदला जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में 269 नए प्वाइंट लगाए गए हैं। इनका कनेक्शन होना अभी बाकी है जोकि जल्द कर दिए जाएंगे। इसके बाद जो थोड़ी परेशानी आ रही है, वह भी ठीक कर दी जाएगी।

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