शिक्षा विभाग की हिदायतें:न्यू शिवालिक स्कूल मियांपुर के अध्यापकों ने मैनेजमेंट पर एक साल से वेतन न देने का लगाया आरोप, डीसी से मिले

रोपड़8 महीने पहले
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  • कहा- शिक्षा विभाग की हिदायतें के मुताबिक आधा वेतन भी नहीं दिया, डीईओ बोले- बात न मानी तो स्कूल पर करेंगे कार्रवाई

न्यू शिवालिक पब्लिक स्कूल मियांपुर की महिला अध्यापकों द्वारा स्कूल मैनेजमेंट पर कई माह से वेतन न देने का आरोप लगाया गया। इसके संबंध में वह डीसी रोपड़ से भी मिलीं। समाजसेवी व जट महासभा के जिला अध्यक्ष जैलदार सतविंदर सिंह चैड़ीयां की अगुवाई में शिक्षिका सरबजीत कौर, सतिंदरजीत कौर, मंजू ने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट कोविड-19 का बहाना लगाकर पिछले 1 वर्ष से वेतन नहीं दे रही।

इस संबंधी जब उन्होंने शिक्षा अधिकारी से शिकायत की तो मैनेजमेंट धमकियां देने लगी। उन्होंने बताया कि वह 30 मार्च को डीईओ से मिले थे तो उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट को कोविड-19 के दौरान मार्च 2021 से मार्च 2021 तक 50 फीसदी वेतन देने की हिदायत की थी और जनवरी 2021 से जब स्कूल लग गए थे, तो वेतन देने के लिए कहा था लेकिन स्कूल द्वारा कहा गया कि कोविड-19 के चलते बच्चे कम ही स्कूल में आ रहे हैं और पेरेंट्स द्वारा फीसें भी जमा नहीं करवाई जा रही।

इस कारण वेतन देने से असमर्थ हैं। जबकि स्कूल मैनेजमेंट द्वारा हमें बच्चों के घर भेजकर पैसे इकट्ठे किए गए हैं। इसके बावजूद उन्हें 50 फीसदी वेतन भी नहीं दिया। उनका घर का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। डीसी ने आश्वासन दिया कि स्कूल मैनेजमेंट को जल्द बुलाकर मामला हल किया जाएगा। इस मौके अध्यापक परमजीत कौर, रुपिंदर कौर, तमन्ना देवी, मनप्रीत कौर, पूर्व ब्लॉक समिति मेंबर सुरिंदर सिंह मीयांपुर, किसान नेता गुरइकबाल सिंह हरीपुर आदि उपस्थित थे।इस संबंधी जब स्कूल प्रिंसिपल को फोन किया गया तो किसी अन्य अध्यापक ने फोन उठाया और कहा कि प्रिंसिपल बीमार हैं।

स्कूल मैनेजमेंट को 7 अप्रैल तक वेतन का चेक लेकर आने को कहा था, लेकिन नहीं आए : डीईओ

डीईओ राज कुमार खोसला ने कहा कि न्यू शिवालिक पब्लिक स्कूल मियांपुर की मैनेजमेंट के कुछ अध्यापकों की शिकायत आई थी कि उन्हें करीब 1 साल से वेतन नहीं मिला। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट को बुलाकर पक्ष सुनने के बाद 7 अप्रैल तक शिकायतकर्ता अध्यापकों के वेतन का चेक लेकर दफ्तर पेश होने के लिए कहा था लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। खोसला ने कहा कि अगर स्कूल मैनेजमेंट ने शिक्षा विभाग की बात न मानी तो स्कूल की मान्यता रद्द करने के लिए उच्चाधिकारियों से सिफारिश की जाएगी।

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