धर्म-कर्म:विवाह पंचमी आज, श्रीराम और मां सीता की पूजा से बाधाएं होंगी दूर

रोपड़2 महीने पहले
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  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान राम और माता सीता का हुआ था विवाह
  • पूजन करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां होती हैं समाप्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी मनाई जाती है। धार्मिक ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस बार विवाह पंचमी 8 दिसंबर दिन बुधवार को मनाई जाएगी। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।

इसलिए विवाह पंचमी का पर्व भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा माना जाता है कि तुलसी दास जी की तरफ से रामचरितमानस भी इसी दिन पूरी की गई थी। इस दिन सीता-राम के मंदिरों में भव्य आयोजन किए जाते हैं और लोग पूजन, अनुष्ठान करते हैं, जिसे बहुत उत्साह और विश्वास के साथ मनाया जाता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विवाह पंचमी मार्गशीर्ष (अग्रहयान) में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आती है। इस दिन को हर साल उनकी शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां समाप्त होती हैं। आचार्य ने बताया कि शीर्ष शुक्ल पक्ष तिथि आरंभ 7 दिसंबर को रात्रि 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी। इसकी समाप्ति 8 दिसंबर को रात 9 बजकर 27 मिनट पर होगी।

रामायण का करें पाठ

पंचमी तिथि को सुबह उठकर स्नानादि करने के पश्चात भगवान राम का ध्यान करें। एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें और आसन बिछाएं। अब चौकी पर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें। राम जी को पीले और सीता जी को लाल वस्त्र अर्पित करें। अब दीप प्रज्वलित करके तिलक करें और फल-फूल नैवेद्य अर्पित करते हुए पूजन करें। इस दिन पूजन के दौरान बालकाण्ड में दिए गए विवाह प्रसंग का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन रामायण का पाठ करने से घर में सुख-शांति आती है।

विवाह पंचमी का महत्व

भगवान राम और सीता जी के विवाह उत्सव के रूप में विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन प्रभु श्री राम, माता सीता का विधि-विधान के साथ पूजन करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

पूजन अनुष्ठान करने से विवाहित लोगों का दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। इस दिन प्रभु श्रीराम और माता जनकनंदिनी की पूजा करने से सारी बाधाएं दूर होती हैं। कुंवारी लड़कियों को मां सीता की पूजा करनी चाहिए। इससे उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इस दिन घर में पूजा-पाठ और हवन करने से दांपत्य जीवन में सुख आता है। परिवार में शांति और प्रेम की वृद्धि होती है।

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