नाम रोशन:सहजप्रीत कौर और राजवीर ने कभी ट्यूशन नहीं रखी, बेटे की सफलता पर मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए

वडाला कलां14 दिन पहले
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  • उसके पिता लखबीर कुमार टैक्सी चालक हैं और माता घरेलू महिला

5वीं क्लास के नतीजों में एलिमेंटरी स्कूल डल्ला के विद्यार्थियों राजवीर मोमी व सहजप्रीत कौर ने 500 में से 500 अंक प्राप्त किए। दोनों विद्यार्थी गांव डल्ला के ही रहने वाले हैं। सूबे में दूसरा स्थान हासिल करने वाले राजवीर की उम्र 10 साल है। उसके पिता लखबीर कुमार टैक्सी चालक हैं और माता घरेलू महिला हैं। बेटे की सफलता पर मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। मां ने कहा कि बेटे ने माता-पिता व गांव का नाम ऊंचा किया है। राजवीर को उसके चाचा-चाची घर में पढ़ाते हैं और उसने कोई ट्यूशन नहीं रखी है। वह स्कूल से घर आकर चाची के पास रोज 2 घंटे पढ़ता है। चाची जसनीत कौर और चाचा अमरजीत सिंह ने कहा कि राजवीर में आम बच्चों की तुलना में किसी भी सवाल को जल्दी समझ जाता है और इस की हैंडराइटिंग में पकड़ भी बहुत मजबूत है। राजवीर के चाची उसे बड़ा पुलिस अफसर बनाना चाहती है। राजवीर का सपना बड़ा होकर डाक्टर बन समाज की सेवा करना है। राजवीर के घर में खुशी का का माहौल है।

वहीं, डल्ला गांव की रहने वाली और गांव के ही सरकारी एलिमेंटरी स्कूल में पढ़ने वाली 11 साल की सहजप्रीत कौर के माता-पिता मजदूरी करते हैं। स्कूल से घर आने के बाद उसकी माता संदीप कौर ही उसे घर में पढ़ाती है। सहजप्रीत ने कोई ट्यूशन नहीं रखी है। पिता मंगल सिंह ने कहा कि वह मेहनत मजदूरी करता है। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है पर वह बेटी का हर सपना पूरा करेगा। वह जितना भी पढ़ना चाहती है उसे पड़ाएंगे। बेटी ने उसका और उसके गांव का नाम ऊंचा किया है। यह मेरी बेटी नहीं मेरा पुत्र ही है। सहजप्रीत ने कहा कि वह पढ़कर टीचर बनना चाहती है। गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहती है। जो बच्चे घर में गरीबी होने के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं, टीचर बनने के बाद उन पर ज्यादा फोक्स करूंगी। राजवीर मोमी और सहजप्रीत कौर को पढ़ाने वाले सरकारी एलिमेंटरी स्कूल डल्ला की अध्यापकों ने कहा कि दोनों बच्चे पढ़ाई में पहली क्लास से ही होशियार रहे हैं। किसी भी मुकाबले में उच्च स्थान प्राप्त करते हैं। सहजप्रीत कौर ने कई मुकाबलों में स्कूल के लिए पहले भी इनाम जीत चुकी है। दोनों विद्यार्थियों ने स्कूल का नाम रोशन किया है।

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