सफाई योजना का कचरा:1100 टन कूड़ा लिफ्टिंग, क्षमता 550, बिना देखरेख के 5 माह से प्लांट बंद, निगम को 1.80 करोड़ जुर्माना

लुधियाना10 महीने पहलेलेखक: दिनेश वर्मा
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ताजपुर रोड डंप पर जमा 20 लाख टन कूड़े पर रोजाना 1100 टन कचरा एकत्र हो रहा है। - Dainik Bhaskar
ताजपुर रोड डंप पर जमा 20 लाख टन कूड़े पर रोजाना 1100 टन कचरा एकत्र हो रहा है।
  • डंप खत्म करने को पहले 100 करोड़ का प्लान बना, फिर 30 करोड़ की बनी डीपीआर, नहीं तलाश पाए कंपनी, दो किमी एरिया का भूजल हुआ जहरीला

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के तहत नगर निगम लुधियाना सॉलिड वेस्ट का प्रबंध करने में फेल साबित हुआ है। बिना देखरेख के इसी साल फरवरी से बंद पड़े कूड़े की प्रोसेसिंग के काम को दोबारा से अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। नतीजा शहर से रोजाना 1100 मीट्रिक टन कूड़ा लिफ्टिंग के जरिए ताजपुर रोड पर 50 एकड़ में बने निगम के सालों पुराने कूड़ा डंप पर जाकर स्टोर होकर 20 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ बनता जा रहा है।

अब पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने एक जुलाई 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 तकएटूजेड के काम की सही से माॅनीटरिंग न करने, कंपनी के काम को सही न पाने और पांच माह से कूड़े की प्रोसेसिंग बंद होने पर नगर निगम को बड़ा झटका देते हुए 1.80 करोड़ का जुर्माना ठोका है। पीपीसीबी चेयरमैन एसएस मरवाहा ने ऑर्डर जारी करते हुए निगम लुधियाना को 15 दिनों में ये सारा पैसा पीपीसीबी के खाते में जमा करवाने के आदेश भी दिए हैं।

कई बार जांच हुई, कंपनी और निगम की सामने आई लापरवाही, नोटिस जारी हुए लेकिन नहीं हुआ सुधार
फरवरी 2021 से पहले निगम की अगुवाई में एटूजेड कंपनी कूड़े की प्रोसेसिंग का काम कर रही थी। शहर से रोजाना 1100 मीट्रिक टन कूड़ा तो उठाया जा रहा था, लेकिन कंपनी द्वारा वहां पर 550 मीट्रिक टन प्रोसेसिंग क्षमता का प्लांट लगाया गया था। पीपीसीबी ने एटूजेड के कामों की जांच डंप साइट पर 30 जून 2019, 14 अगस्त 2019, 12 दिसंबर 2019 और 20 अक्तूबर 2020 को की। वहां पर प्रोसेसिंग के नाम पर बड़े स्तर पर लापरवाही सामने आई। जांच में तो यहां तक भी पाया गया कि जितने समय प्लांट चलाने के लिए निगम पैसे अदा करता है, उतना समय तो प्लांट चल ही नहीं रहा था, जबकि ज्यादातर कूड़ा बिना प्रोसेसिंग के पहले से जमा डंप पर ही जमा होता रहा।

इस लापरवाही पर पीपीसीबी ने निगम और कंपनी को शाेकाॅज नोटिस जारी किए। इसके अलावा अलग से पटियाला में सुनवाई भी हुई। इसके अलावा एनजीटी ने भी सॉलिड वेस्ट के मामले में निगम को फटकार लगाई। इसके बावजूद प्रोसैसिंग के मामले में काेई सुधार नहीं आया। पीपीसीबी ने एनजीटी की हिदायतों के अनुसार फिर से जांच की। इस दौरान 25 नवंबर 2020 और 21 दिसंबर 2020 को नाेटिस जारी हुए कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों की पालना नहीं की जा रही है।

जिम्मेदार महकमे का देखिए काम

  • 100 फीसदी डोर टू डोर कलेक्शन और सेग्रिगेशन नहीं हो रही।
  • सेकेंडरी कूड़ा डंप शहर में ओपन हैं जहां गीला-सूखा कूड़ा मिक्स हो पहुंच रहा है।
  • 100 करोड़ लोन लेकर सालों पुराने कूड़े को खत्म का प्रावधान रखा।
  • इंदौर का दौरा कर सालों पुराने कूड़े को खत्म करने की विधि को जाना।
  • वहां से लौटकर सालों पुराने कूड़े की प्रोसेसिंग की डीपीआर बनी।
  • 30 करोड़ की डीपीआर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मंजूर हुई, लेकिन फाइल चंडीगढ़ में अटकी हुई है।
  • चेन्नई और दिल्ली में भी निगम टीम प्रोसेसिंग का गुर सीखने गई, पर अभी तक इंप्लीमेंट नहीं हुआ।

कूड़े के डंप से 2.50 लाख आबादी पर बुरा असर

  • निगम के 6 वार्डों की ढाई लाख आबादी इस कूड़े के डंप से प्रभावित है।
  • साथ लगता गांव कक्का उजड़ चुका है, लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हुए।
  • डंप साइट के दो किलोमीटर एरिया का भू-जल जहरीला हो चुका है।
  • डंप के साथ लगती काॅलोनियों के सबमर्सिबल और ट्यूबवेल बंद करने के आदेश जारी हो चुके हैं।

अफसरों की सैलरी से वसूलेंगे
एटूजेड कंपनी से काम करवाने की जिम्मेदारी जिन-जिन अफसरों को सौंपी गई थी, उनकी जांच करवाते हुए पीपीसीबी द्वारा लगाए जुर्माने के पैसे उन लोगों की सैलरी से कटवाएंगे। रही बात प्राेसेसिंग के काम की शुरूआत की, मैं नहीं चाहता कि एटूजेड कंपनी की तरह कोई कंपनी फिर से निगम पर बोझ बन जाए। इसलिए दूसरे शहरों में काम करने वाली अलग-अलग कंपनियों से संपर्क करके उनका काम चेक किया जा रहा है। अब निगम की टीम अगले सप्ताह इलाहाबाद जा रही है। इसके उपरांत प्रोसेसिंग से लेकर लिफ्टिंग और डोर टू डोर कलेक्शन का टेंडर लगाया जाएगा। -बलकार संधू, मेयर लुधियाना

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