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कोशिशें हुईं नाकाम, नाला हो गया ‘बुड्ढा’:बुड्‌ढे नाले की सफाई पर 20 सालों में खर्च दिखाया 140 करोड़, अब 650 करोड़ के प्रोजेक्ट का मंगलवार को नींव पत्थर रखेंगे मुख्यमंत्री

लुधियाना10 दिन पहले
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बुड्ढे नाले की सफाई के नाम पर पिछले 20 सालों में करीब 140 करोड़ खर्च होने के बाद अब 650 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मंगलवार(12 जनवरी) को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह नींव पत्थर रखेंगे। जिसके तहत राज्य सरकार 342 करोड़ व केंद्र सरकार 208 करोड़ और निजी ऑपरेटर द्वारा 100 करोड़ रुपये खर्चे जाएंगे।

इनमें से करीब 150 करोड़ से साफ किए प्रदूषित पानी के री-यूज व 283 करोड़ से बुड्ढे नाले के किनारों पर पेड़-पौधे लगा सौंदर्यीकरण होगा। वहीं, 13 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत खर्च कर बुड्ढे नाले के दोनों किनारों पर फेंसिंग होगी। इसके साथ किनारों पर ही बायोडायवर्सिटी पार्क बनेंगे।

मेयर बलकार संधू ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की पुष्टि कर बताया कि अभी पूरा शेड्यूल नहीं आया है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि सीएम लुधियाना आएंगे या वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। दूसरी तरफ, नगर निगम कमिश्नर प्रदीप कुमार सभ्रवाल ने बुड्ढे नाले के किनारे जारी प्रोजेक्ट उद्घाटन की तैयारियों का जायजा लिया।

तीन विधानसभा हलकों और बीस से ज्यादा वॉर्डों से होकर गुजरता है नाला

लुधियाना। शहर के तीन विधानसभा हलकों व बीस से ज्यादा वाॅर्डों से गुजरता बुड्ढा नाला वाकई कभी “जवान’ था। बुजुर्गों की मानें तो वे खुद और उनसे पुरानी पीढ़ी वाले इसके साफ पानी में नहाते थे। शहर की आबादी बढ़ने के साथ इंडस्ट्रियल यूनिटें लगीं तो नाले में गंदगी बढ़ती गई व कब्जे होने से इसका वजूद सिकुड़ता गया। रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी 14.87 किमी वाले इस नाले की हद में 251 एकड़ जमीन आती है। अब जमीनी हकीकत, कब्जों के चलते नाले की चौड़ाई 198 की बजाए 80 फीट रह गई है। हर छोटे-बड़े चुनाव में नेताओं ने मुद्दा बना इसको प्रदूषण मुक्त करने के दावे किए, जीतने के बाद ज्यादातर भूल भी गए।

हर साल नाले की सफाई के नाम खर्च हो रहा एक करोड़

2011 में सांसद मनीष तिवारी ने 15.28 करोड़ के ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत नाला प्रदूषण मुक्त कराने को 100 टन बैक्टीरिया डलवाया, मगर ये प्रोजेक्ट फेल हो गया।

2012 में 1100 करोड़ से नाले के कायाकल्प को निगम ने 3.86 करोेड़ डीपीआर पर खर्च कर डाले, जो फाइलों में बंद हो गई।

2013 में निगम ने नाले के किनारे कब्जे हटाने चाहे तो सियासी-शह पर लोगों ने हिंसक विरोध कर बैरंग लौटा दिया था। फिर वैसी कोशिश करने की बजाए निगम ने खुद ही नाले के किनारे 65 प्लॉट अपने मुलाजिमों को अलॉट कर दिए। जिसके पीछे भी वोट-बैंक की राजनीति मानी गई थी।

2016 में अकाली-भाजपा सरकार में 100 करोड़ रुपये उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल द्वारा नाला प्रदूषणमुक्त करने को जारी हुए थे, वे कहां खर्च हुए, कोई पुख्ता हिसाब नहीं मिला।

20 साल से निगम हर वर्ष नाले की सफाई पर एक करोड़ रुपये खर्च करता है, मगर नाले की गंदगी साल-दर-साल और बढ़ जाती है।

2019 में पीपीसीबी ने मेयर व निगम कमिश्नर पर केस दायर कर नाले को प्रदूषणमुक्त कराने का प्रयास किया, मगर बाद में केस ही खत्म हो गया।

एनजीटी के दबाव में पीपीसीबी ने 1 करोड़ की बैंक गारंटियां भी निगम से मांगी थीं, उसका भी खास असर नहीं हुआ।

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