सतर्कता से करें निवेश:बीमा पाॅलिसी, म्युचुअल फंड के नाम पर 3 साल में 19 करोड़ ठगे; अब तक 62 केस

लुधियाना5 महीने पहले
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ठगी का कारोबार - Dainik Bhaskar
ठगी का कारोबार
  • साइबर ठगों ने पॉलिसी एजेंट बन रिटायर्ड महिला अफसर के खाते से निकाले 15 लाख रुपए
  • कई मुलाजिम डाटा कर रहे लीक, कुछ ने दूसरी कंपनियों का बेचा

बुढ़ापा संवारने और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए लोग इन्वेस्टमेंट करते हैं। मगर जब उसी पर डाका पड़ जाए तो क्या। शहर में ऐसी ही ठगी का कारोबार चल रहा है। वर्तमान दौर में डिजिटल लेन-देन बढ़ने से भी ऑनलाइन फ्रॉड बढ़ा है। इसमें लोगों की जमा पूंजी ठगी जा रही है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 3 सालों में फर्जीवाड़े और ठगी के करीब 62 पर्चे पुलिस ने इन्वेस्टमेंट के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों पर की हैं।

इसमें करीब 19 करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है। इसमें कंपनी मुलाजिमों के अलावा साइबर ठगों ने भी इन ठगी के मामलों को अंजाम दिया है, लेकिन 60 फीसदी मामलों में सिर्फ पर्चे दर्ज किए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। हाल ही में म्युचुअल फंड में 49 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। इसमें म्युचुअल फंड ब्रांच के वर्कर ने मर चुके ग्राहकों के फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बना लाखों रुए हड़प लिए। आरोपी इतना शातिर था कि उसने खुद ही मृत ग्राहकों के फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बना डाले और उनके खातों में से पैसे निकाल लिए।

ऐसे की जा रही ठगी... ग्राहक की बजाय अपने खातों में पैसे जमा करवा रहे एजेंट

इंश्योरेंस कंपनियों, म्युचुअल फंड्स और डाकखानों में मंथली स्कीमों को ऑपरेट करने के लिए ग्राहक एजेंटों की मदद लेते हैं, जोकि उन्हें समय-समय पर नफे-नुकसान के बारे में बताते हैं। कुछ एजेंट ग्राहकों के साथ ही विश्वासघात कर देते हैं। इसमें अगर कोई ग्राहक मर जाता है तो उसके जाली डेथ सर्टिफिकेट तैयार करवा लेते हैं। उन्हीं का इस्तेमाल कर फंड्स और पॉलिसी को कैश करवाकर फर्जीवाड़ा कर देते हैं। इसी तरह से डाकखाने और बाकी के विभागों में एजेंट ही पॉवर ऑफ अटॉर्नी लेकर ग्राहकों की किश्तें भरते हैं, लेकिन कई पैसे सरकारी खाते ही बजाय अपने ही खातों में जमा करवाते हैं। उन्हें पता तब चलता है जब पॉलिसी मेच्योर होती है, तब तक उन्हें पता चलता है, उस समय तक खाते खाली हो जाते हैं।

सस्ती ऑनलाइन पॉलिसी के लालच में ठगे गए

यहां ऑनलाइन ठगों की भी पूरी भरमार है, जोकि पॉलिसी और इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं। उदाहरण के लिए अगर एक पॉलिसी में 5500 रुपए का खर्च आ रहा है तो वो 3500 रुपए रेट बताते हैं। इसके साथ हेल्थ इंश्योरेंस या फिर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को 20 से 25 लाख कवर होने की बात कहकर सारी डिटेल्स और स्टेटमेंट ले लेते हैं। इसके बाद ग्राहक के बैंक खाते में पड़े पैसों को खाली कर देते हैं।

महिला एजेंट को कई साल तक देते रहे किस्त, 32 लाख रुपए लेकर फरार

केस 1- दुगरी इलाके में डाकखाने के लिए एजेंट के तौर पर काम कर रही महिला किश्त के नाम पर ग्राहकों से पैसे लेती रही। जब उनकी पॉलिसी मेच्योर हुई और वो पैसे लेने के लिए डाकखाने गए तो पता चला कि उनका खाता खाली है। इसमें किश्तें जमा ही नहीं हुई। महिला 32 लाख रुपए लेकर फरार है। अभी तक महिला का कुछ पता नहीं लग पाया।

केस 2- शहर के पॉश माने जाते इलाके भाई रणधीर सिंह नगर के रिटायर्ड महिला अधिकारी को पॉलिसी एजेंट बनकर साइबर ठगों ने खातों की सारी डिटेल्स जुटाकर सरकारी फंड के आए 15 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए थे। मामले में पर्चे के बाद कुछ पता नहीं चल पाया।

गाइडलाइन- इन बातों का रखें ध्यान

  • अगर किसी एजेंट से पॉलिसी करवा रहे हैं तो पॉलिसी की डिटेल कंपनी के टोल फ्री नंबर से चेक करवाएं।
  • पाॅलिसी की किश्त देने के बाद हर महीने अकाउंट चेक करवाएं की किश्त कटी या नहीं?
  • पॉलिसी होल्डर की मौत हो जाती है तो वो कुछ दिनों में ही इंश्योरेंस या फिर म्युचुअल फंड्स कंपनी के साथ संपर्क कर मौत की सूचना दें, ताकि मरने वाले के खाते को कोई ऑपरेट ना कर पाए।
  • ऑनलाइन पॉलिसी करवाने से परहेज करें, अगर करवा रहे हैं तो कंपनी की ऑफिशियल साइट या फिर लोकल ऑफिस में विजिट कर कंफर्म जरूर करें।
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