पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

फायरिंग की 2 एफआईआर की जांच करेगी एसआईटी:कोटकपूरा फायरिंग मामले में 3 मेंबरी नई एसआईटी गठित, 6 माह में पूरी करेगी जांच

लुधियानाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
​​​​​​​एडीजीपी एलके यादव, ​​​​​​​आईजी राकेश अग्रवाल और ​​​​​​​डीआईजी सुरजीत सिंह - Dainik Bhaskar
​​​​​​​एडीजीपी एलके यादव, ​​​​​​​आईजी राकेश अग्रवाल और ​​​​​​​डीआईजी सुरजीत सिंह
  • हाईकोर्ट के एसआईटी भंग करने के 28 दिन बाद सूबा सरकार ने बनाई जांच टीम

भास्कर न्यूज | चंडीगढ़/ हाईकोर्ट के आदेशानुसार राज्य सरकार ने कोटकपूरा फायरिंग मामले में शुक्रवार को 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन कर दिया। टीम को 6 महीने में जांच मुकम्मल करने के आदेश दिए गए हैं। नई एसआईटी में विजिलेंस ब्यूरो के एडीजीपी एलके यादव, लुधियाना के पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल और फरीदकोट के डीआईजी रेंज सुरजीत सिंह को शामिल किया गया है।

जो कोटकपूरा गोलीबारी के संबंध में दर्ज 2 एफआईआर यानी 14 अक्तूबर 2015 और 7 अगस्त, 2018 वाली की जांच करेंगे। गृह विभाग यकीनी बनाएगा कि जांच में कोई भी अंदरूनी या बाहरी दखल न हो। गौरतलब है कि कोटकपूरा में 14 अक्टूबर 2015 को प्रदर्शन कर रहे सिख संगतों पर पुलिस फायरिंग हुई थी। इसमें एक को गोली लगी थी, जबकि 100 अन्य घायल हुए थे।

इसमें कोटकपूरा पुलिस थाने में एफआईआर नंबर 129 दर्ज की गई थी। 30 जून 2016 को जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी. 14 अप्रैल 2017 को कैप्टन सरकार ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन किया। 7 अगस्त 2018 को कोटकपूरा मुख्य चौक पर फायरिंग करने पर अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा ए कत्ल की नई एफआईआर दर्ज की। 16 अगस्त 2018 को जस्टिस रणजीत सिंह ने मुख्यमंत्री को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी और 27 अगस्त 2018 को जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई।

10 सितंबर 2018 को एडीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी अब तक कोटकपूरा फायरिंग केस व बहबलकलां फायरिंग केस में कुल 9 चालान कोर्ट में पेश कर चुकी है। एक चालान अभी भी पेंडिंग है, जिसे कानूनी राय के लिए भेजा गया था। इससे पहले ही एसआईटी को एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया व नई एसआईटी बनाने के निर्देश दिए, जिसमें कुंवर विजय प्रताप न हों।

ऐसे काम करेगी टीम

सभी जांच अफसर संयुक्त रूप से करेंगे हस्ताक्षर

इस बार एसआईटी साझे तौर पर काम करेगी और सभी मेंबर जांच की सभी रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर करेंगे। इससे पहले एसआईटी मुखी कुंवर के ही हस्ताक्षर किए गए थे। एसआईटी किसी भी पुलिस अथाॅरिटी को रिपोर्ट नहीं करेगी सिर्फ संबंधित मजिस्ट्रेट को ही रिपोर्ट करेगी।

अब तक ये हुआ

  • 9 अप्रैल : आईजी कुंवर की एसआईटी हाईकोर्ट ने भंग की। नई एसआईटी बनाने के आदेश। हाईकोर्ट ने इसमें कुंवर को न शामिल करने के आदेश दिए।
  • 13 अप्रैल : आईजी कुंवर ने फैसले के खिलाफ इस्तीफा दिया।
  • 19 अप्रैल : सीएम ने आईजी कुंवर प्रताप सिंह का इस्तीफा मंजूर करते हुए उसे केंद्र को भेज दिया था।

जानें- कौन हैं नई एसआईटी के मेंबर

एडीजीपी एलके यादव

1995 बैच के आईपीएस अधिकारी। विजिलेंस ब्यूरो में एडीजीपी हैं। वे आईजी जालंधर,आईजी क्राइम, डीआईजी पटियाला और 5 जिलों में एसएसपी रहे हैं।बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में पीएमटी टेस्ट घोटाले का पर्दाफाश किया। अमृतसर की चढ्डा खुदकुशी की जांच की थी। इसमें बड़े पुलिस अफसरों के नाम आए थे।

आईजी राकेश अग्रवाल

1999 बैच के आईपीएस अधिकारी। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में आईजी सिक्योरिटी रहे। कपूरथला, होशियारपुर समेत कई जिलों में एसएसपी रहे हैं। इन्हें 15 अगस्त 2016 को प्रेजिडेंट पुलिस मेडल अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। अग्रवाल ने लुधियाना के साइकिल व्यापारी के बेटे-बहू कत्ल केस का खुलासा किया था।

डीआईजी सुरजीत सिंह

एआईजी विजिलेंस ब्यूरो,
एसएसपी जगराओं के अलावा लुधियाना, समेत कई जिलों में भी डीएसपी और एसपी तैनात रह चुके हैं। विजिलेंस ब्यूरो में भी रहे हैं। इन्होंने सरकारी विभागों में रिश्वत लेकर नौकरी लगाने के मामले की जांच की थी, जिसमें कई राजनेताओं के नाम भी सामने आए थे।

मायने- चुनाव में बड़ा सियासी मुद्दा बन सकती एसआईटी रिपोर्ट

सरकार ने जो नई एसआईटी गठित की है, उसे 6 माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। छह माह का समय नवंबर अंत तक पूरा होगा। तब आगामी विधानसभा चुनाव में 3 माह शेष होंगे व चुनाव आचार संहिता सिर पर होगी। ऐसे में सत्तापक्ष यहां एसआईटी की रिपोर्ट को चुनाव में भुनाकर अपना चुनावी वादा पूरा करने का प्रयास कर सकता है। वहीं, विपक्षी शिअद आचार संहिता व चुनाव आयोग के समक्ष इसे मुद्दा बना सकता है। कुल मिलाकर इस केस की जांच रिपोर्ट का मुद्दा आगामी चुनाव में उठ सकता है।

खबरें और भी हैं...