मेडिकल क्षेत्र में नई तकनीक:33 साल के जयवीर बने विश्व के सबसे युवा रोबोटिक सर्टिफाइड सर्जन

लुधियाना9 महीने पहले
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  • विश्व की एकमात्र मैको रोबोट्स बनाने व ट्रेनिंग देने वाली कंपनी ने दिया सर्टिफिकेट

मेडिकल क्षेत्र में नई तकनीक, नए ट्रीटमेंट लाने और उत्तर भारत में पहले हॉस्पिटल स्थापित करने में लुधियाना अव्वल रहा है। यहां के कई माहिर ऐसे हैं जो अपने क्षेत्र में लेटेस्ट तकनीक अपना कर नाम कमा रहे हैं। इसी तरह लुधियाना के 33 वर्षीय युवा ऑर्थोपीडियन डॉ. जयवीर हुंजन रोबोटिक सर्टिफाइड सर्जन हैं जो विश्व में सबसे कम उम्र के रोबोटिक सर्जन हैं।

रोबोटिक सर्जरी में ट्रेनिंग करवाने वाली यूएसए की स्ट्राइकर कंपनी द्वारा डॉ. जयवीर को ये सर्टिफिकेट दिया है। स्ट्राइकर कंपनी विश्वभर में मैको रोबोट्स बनाने और ट्रेनिंग देने वाला एकमात्र इंस्टीट्यूट भी है। इसी कंपनी द्वारा डॉ. जयवीर का नाम विभिन्न संस्थाओं के पास नॉमिनेट भी किया गया है। डॉ. जयवीर के अनुसार पिता(डॉ. बीएस हुंजन) को देख कर ही उन्हें ऑर्थोपीडिशियन बनने की प्रेरणा मिली है।

आठवीं क्लास में पिता के साथ ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी देखने जाया करते थे, तभी से बढ़ी रुचि

डॉ. जयवीर ने बताया कि पिता को बचपन से इलाज करते हुए देखा था। आठवीं क्लास में पढ़ने के दौरान वो अपने पिता के साथ ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी देखने के लिए जाया करते थे। जहां तक रोबोटिक सर्जरी की बात है तो 5 फरवरी को उन्होंने अपने हॉस्पिटल में मैको रोबोटिक आर्म असिस्टेड टेक्नोलॉजी की स्थापना की।

अब तक वो 30 के तकरीबन रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर चुके हैं। डॉ. जयवीर ने बताया कि उन्होंने एमएस के दौरान ही सर्जरी करने की शुरुआत कर दी थी। लेकिन रोबोटिक सर्जरी की ट्रेनिंग करने के बाद उन्होंने इस फरवरी से रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की।

बिना दर्द के होती सर्जरी, इनफेक्शन का भी नहीं रहता डर

डॉ. जयवीर ने एमएस ऑर्थो के दौरान ही सर्जरी करने की शुरुआत कर दी थी। हुंजन हॉस्पिटल में कंसल्टेंट के तौर पर 2018 में जॉइन किया। तब से लेकर अब तक 2000 से भी ज्यादा ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर चुके हैं। वहीं, स्पोर्ट्स सर्जरी के माहिर के तौर पर वो ऑर्थोस्कोपी सर्जरी भी करते हैं। रोबोटिक सर्जरी में मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर सॉफ्टवेयर के आधार पर थ्री डी मॉडल तैयार होता है। इससे सर्जरी कहां पर होनी उसका बिल्कुल सही अनुमान मिलता है।

रोबोटिक सर्जरी में मरीज को बिना किसी दर्द के सर्जरी हो जाती है, साथ ही इनफेक्शन के भी चांस नहीं होते। वहीं, मरीज को हॉस्पिटल में ज्यादा समय के लिए रुकना भी नहीं पड़ता। वहीं, इंप्लांट हर मरीज के अनुसार होता है। इससे मरीज के घुटने की क्षमता भी बेहतर रहती है। उन्होंने कहा कि ये उनके लिए गर्व का अवसर है कि उन्हें विश्व में सबसे युवा रोबोटिक अॉर्थोपीडिक सर्जन बनने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि वो इससे आम लोगों का जितना ज्यादा फायदा हो सकेगा करेंगे।

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