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पहले विकास अब कार्रवाई में भी गोलमाल:17 साल में डेवलपमेंट की 350 मेजरमेंट बुक गायब, जिम्मेदार 59 जेई में से कार्रवाई को भेजे सिर्फ 17 के नाम, कई किए प्रमोट

लुधियानाएक महीने पहले
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सड़क निर्माण में हुए घोटालों की जानकारी मेजरमेंट बुक्स में दर्ज है लेकिन बुक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
सड़क निर्माण में हुए घोटालों की जानकारी मेजरमेंट बुक्स में दर्ज है लेकिन बुक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं है। (फाइल फोटो)
  • लोकल बाॅडीज ने मांगी शेष जेई पर एमबी जमा न कराने की रिपोर्ट

सड़क निर्माण घोटालों को छुपाने के लिए नगर निगम में अब बड़ा खेल सामने आया है। निगम की बीएंडआर और ओएंडएम ब्रांच के जेई को 2004 से लेकर जुलाई 2020 तक जारी की गई 350 से ज्यादा मेजरमेंट बुकें(एमबी) अभी तक निगम के रिकाॅर्ड में वापस जमा ही नहीं हो पाई हैं। ऐसे में ये भी बात सामने आई कि इन बुकों के जमा न होने का खुलासा होने पर निगम कमिश्नर की तरफ से जेई को नोटिस जारी कर दिए हैं।

हालांकि इन 59 जेई में से कुछ अब प्रमोशन लेकर निगम में बड़े पदों पर विराजमान हो चुके हैं, जबकि उनकी तरफ से अभी तक एमबी जमा ही नहीं करवाई गई हैं। वहीं, हाल ही में 20 के करीब सड़क निर्माण के घोटाले भी सामने आए हैं, जिनकी जानकारी एमबी में है, जो अभी तक जमा ही नहीं हो पाई हैं। इन 350 से ज्यादा एमबी के जमा न होने पर बताया जा रहा है कि निगम में बड़े स्तर पर घोटाले की संभावनाएं हैं।

हालांकि पिछले 17 सालों के दौरान जारी हुई मेजरमेंट बुकों के जमा न करवाने के मामले में निगम ने 59 अधिकारियाें काे शोकाॅज नोटिस तो जरूर दिए, लेकिन लोकल बाॅडीज विभाग के पास सिर्फ 17 ही अधिकारियों पर एक्शन लेने को लिख दिया। ऐसे में अब लोकल बाॅडीज विभाग ने निगम को दोबारा लेटर जारी करके बाकी के 42 अधिकारियों पर एक्शन की रिपोर्ट तलब कर ली है। ऐसे में अब जांच अधिकारी एडिशनल कमिश्नर ऋषिपाल सिंह ने कुल 48 अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे मेजरमेंट बुकों का रिकाॅर्ड तलब किया है।

20 के करीब सड़क निर्माण के घोटाले की जानकारी भी एमबी में दर्ज, जिनका अता पता नहीं
निगम की तरफ से लुक वाली नई सड़क बनाई जा रही है। इस सड़क में किस क्वालिटी का मेटेरियल इस्तेमाल किया गया है, सड़क की कितनी लंबाई, कितनी चौड़ाई है और कितने का एस्टीमेट से इसको पास किया गया है।

इसके अलावा कांट्रैक्टर का पूरा वेरवा और सड़क संबंधी पूरी जानकारी एमबी में दर्ज होती है। एमबी के आधार पर ही कांट्रैक्टर द्वारा भेजे गए बिल पर पेमेंट की जाती है। उसमें दर्ज रिकॉर्ड को देखते हुए ही पैसे जारी होते हैं। अगर किसी को फायदा पहुंचाया जाता है तो बाद में चेकिंग के दौरान एमबी से खुलासा हो जाता है।

आरोप एसडीओ ने पुरानी 76 एमबी की धोखे से करवाई रिसीविंग
निगम की तरफ से जुलाई 2016 में उस समय के एक्सईएन प्रवीण सिंगला को संख्या नंबर 177 से 253 नंबर तक की मेजरमेंट बुकें जारी की गई थी। जिसकी तरफ से ये बुकें जमा नहीं करवाई गई तो उन्हें शोकाॅज नोटिस जारी हुआ। तदोपरांत ये जवाब आया कि उन्होंने आगे जेई को वो बुकें जारी कर दी हैं।

ऐसे में अब इन 76 एमबी के जमा न होने के मामले में तीन जेई ने निगम कमिश्नर को शिकायत दर्ज कराई है कि उनके साथ एसडीओ ने झांसे में लेकर पुरानी जारी हुई एमबी के संबंध में हस्ताक्षर करवाए हैं, जबकि उन्हें तो यहां काम करते हुए करीब सवा साल ही हुए हैं। इस मामले की भी जांच एडिशनल कमिश्नर की तरफ से शुरू कर दी गई है।
एमबी की संख्या दर्ज होने वाला रजिस्टर भी गायब
बता दें कि मेयर बलकार सिंह संधू की तरफ कुछ माह पहले मेजरमेंट बुकों का रिकाॅर्ड दर्ज होने वाले रजिस्टर का जिक्र किया था, जिसमें मेयर ने रिकाॅर्ड रजिस्टर भी मंगवाए गए थे। जहां ये खुलासा हुआ था कि एमबी रिकाॅर्ड वाले 5 रजिस्टर में से एक रजिस्टर साल 2004 से लेकर 2010 तक की संख्या वाला गायब है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में भी मामला अभी ठंडे बस्ते में ही चल रहा है।
सिद्धू की ऑडिट रिपोर्ट में भी हुआ है खुलासा
बता दें कि तत्कालीन लोकल बाॅडीज मंत्री नवजोत सिद्धू की तरफ से कराई गई ऑडिट रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था, जब निगम की तरफ से जारी की गई बुकें ही जमा नहीं करवाई गई हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में अब फिर से ये मामला सामने आया है कि जिन अधिकारियों को 2004 में मेजरमेंट बुकें अलाॅट हुई थीं, वो प्रमोशन लेकर बड़े पदों पर भी जा विराजे हैं और हाल ही में जारी हुए नोटिस के बावजूद उन अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई जवाब भी नहीं दिया गया है।

ये मामला गंभीर है, हमने इसकी जांच शुरू कर दी है, 59 जेई को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से कुछ के जवाब आने लगे हैं, सभी के जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -ऋषिपाल सिंह, एडिशनल कमिश्नर लुधियाना।

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